बिजली कर्मचारियों के उत्पीड़न पर भड़की विद्युत कर्मचारी संघर्ष समिति
Hapur News - उत्तर प्रदेश में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर एक विरोध सभा आयोजित की गई। इसका उद्देश्य बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं पर हो रहे उत्पीड़न और बिजली क्षेत्र के निजीकरण के खिलाफ जनसमर्थन जुटाना है। वक्ताओं ने निजीकरण के खिलाफ आवाज उठाई और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा की मांग की।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर संचालित प्रदेशव्यापी जन-जागरण अभियान के अंतर्गत मंगलवार को आवास विकास कालोनी स्थित अधिक्षण अभियंता कार्यालय पर प्रभावी विरोध सभा आयोजित की गईं। इस अभियान का उद्देश्य बिजली कर्मचारियों, अभियंताओं एवं संविदा कर्मियों पर हो रहे उत्पीड़न, बिजली क्षेत्र में तेजी से बढ़ते निजीकरण तथा तानाशाहीपूर्ण नीतियों के विरुद्ध व्यापक जनसमर्थन तैयार करना है। हापुड़ की सभा को संघर्ष समिति के केन्द्रीय पदाधिकारियों जितेन्द्र सिंह गुर्जर, महेन्द्र राय, मोहम्मद वसीम, सह संयोजक गौतम कुमार एवं निखिल कुमार ने मुख्यतया संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण, ओबरा एवं अनपरा विद्युत परियोजनाओं को ज्वाइंट वेंचर के माध्यम से निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया, गंगा कैनाल स्थित जल विद्युत परियोजनाओं को लीज पर देने तथा ट्रांसमिशन क्षेत्र में टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटेटिव बिडिंग के जरिए निजीकरण के प्रयास न तो बिजली व्यवस्था के हित में हैं और न ही उपभोक्ताओं के लिए लाभकारी सिद्ध होंगे।उन्होंने
कहा कि ग्रेटर नोएडा में निजी कंपनियों के कार्यों तथा आगरा में टोरेंट पावर की फ्रेंचाइजी के खिलाफ उपभोक्ताओं से लगातार मिल रही शिकायतों और करार उल्लंघनों का उल्लेख करते हुए संबंधित कंपनियों की जवाबदेही तय करने एवं प्रभावी कार्रवाई की मांग की। संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि 3 दिसंबर 2022 को ऊर्जा मंत्री एवं शासन के साथ हुए लिखित समझौते का आज तक पालन नहीं किया गया है, जिससे कर्मचारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है। मार्च-2023 के आंदोलन एवं सांकेतिक हड़ताल के दौरान बिजली कर्मियों पर की गई दमनात्मक कार्रवाइयों-जिनमें एफआईआर, निलंबन, दूरस्थ स्थानांतरण एवं अनुशासनात्मक कार्यवाहियां शामिल है। उन्होंने इन्हें तत्काल वापस लेने की मांग की। साथ ही 19 मार्च-2023 को दिए गए निर्देशों के अनुरूप सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को समाप्त किया जाए।इस मौके पर केंद्रीय अध्यक्ष संयोजक शैलेन्द्र दुबे, जिला संयोजक सचिन द्विवेदी, महेन्द्र प्रजापति, हेमंत प्रताप सिंह, अफरोज खान, मनीष कुमार, राहुल कुमार, नीटू कुमार, रविकांत यादव, राजकुमार, राहुल कुमार आदि शामिल रहे।----------------------------------समिति ने यह रखी मांग:विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने डाउनसाइजिंग एवं वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर हटाए गए संविदा कर्मियों को पुनः बहाल करने तथा आउटसोर्स कर्मियों को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम में समाहित करने की मांग की। इसके अलावा निलंबित कर्मचारियों की सम्मानजनक बहाली, दूरस्थ स्थानांतरणों की वापसी एवं लंबित अनुशासनात्मक कार्यवाहियों को समाप्त करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। फेशियल अटेंडेंस के नाम पर वेतन कटौती, विरोध सभाओं में भाग लेने पर बड़े पैमाने पर स्थानांतरण, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अलग होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई तथा बिजली कर्मियों के आवासों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जाने जैसी कार्यवाहियों को तत्काल बंद करने की मांग की गई।
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