Grabbing breasts or breaking the string of pyjamas is not rape or attempt to rape Allahabad High Court reduces sections स्तन पकड़ना और पायजामे का नाड़ा तोड़ना, रेप या रेप का प्रयास नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपियों से घटाईं धाराएं, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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स्तन पकड़ना और पायजामे का नाड़ा तोड़ना, रेप या रेप का प्रयास नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपियों से घटाईं धाराएं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि स्तन पकड़ना या पायजामे का नाड़ा तोड़ना रेप या रेप की कोशिश नहीं माना जा सकता है। यह केवल यौन उत्पीड़न की श्रेणी में आता है।

Wed, 19 March 2025 09:52 PMYogesh Yadav प्रयागराज, विधि संवाददाता
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स्तन पकड़ना और पायजामे का नाड़ा तोड़ना, रेप या रेप का प्रयास नहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपियों से घटाईं धाराएं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि नाबालिग पीड़िता के स्तनों को पकड़ना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना और उसे पुलिया के नीचे खींचने का प्रयास करना रेप या रेप की कोशिश नहीं माना जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि लगाए गए आरोप और मामले के तथ्य इस मामले में रेप की कोशिश का अपराध नहीं बनाते हैं। रेप के प्रयास का आरोप लगाने के लिए अभियोजन पक्ष को यह स्थापित करना होगा कि यह तैयारी के चरण से आगे निकल गया था। अपराध करने की तैयारी और वास्तविक प्रयास के बीच का अंतर मुख्य रूप से दृढ़ संकल्प की अधिक डिग्री में निहित है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र ने कासगंज के पटियाली थाने में दर्ज मामले में आकाश व दो अन्य आरोपियों की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए की है।

पुनरीक्षण याचिका में स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट कासगंज के सम्मान आदेश को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने स्पेशल न्यायालय के सम्मन आदेश में संशोधन करते हुए दो आरोपियों के खिलाफ आरोपों में परिवर्तन किया है। उन्हें आईपीसी की धारा 376 और पॉक्सो एक्ट की धारा 18 के तहत मुकदमे में सम्मन किया गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपियों पर धारा 354-बी आईपीसी (कपड़े उतारने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) के आरोप के साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 9/10 (गंभीर यौन हमला) के तहत मुकदमा चलाया जाए।

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हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपियों पर लगाए गए आरोप और मामले के तथ्यों के आधार पर इस मामले में रेप की कोशिश का अपराध नहीं बनता। इसकी बजाय उन्हें आईपीसी की धारा 354 (बी) यानी पीड़िता को निर्वस्त्र करने या उसे नग्न होने के लिए मजबूर करने के इरादे से हमला या दुर्व्यवहार करने और पॉक्सो एक्ट की धारा 9 (एम) के तहत आरोप के तहत तलब किया जा सकता है।

मामले में अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों (पवन और आकाश) ने 11 वर्षीय पीड़िता के स्तन पकड़े और आकाश ने उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ दिया एवं उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश की। हालांकि इस बीच लोगों के आने से आरोपी पीड़िता को छोड़कर भाग गए। संबंधित ट्रायल कोर्ट ने इसे पॉक्सो एक्ट के दायरे में रेप की कोशिश या यौन उत्पीड़न के प्रयास का मामला पाते हुए एक्ट की धारा 18 (अपराध करने का प्रयास) के साथ आईपीसी की धारा 376 को लागू किया और इन धाराओं के तहत सम्मन आदेश किया।

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सम्मन आदेश को चुनौती देते हुए पुनरीक्षण याचिका में मुख्य रूप से यह तर्क दिया गया कि यदि शिकायत पर गौर किया जाए तो भी आईपीसी की धारा 376 के तहत कोई अपराध नहीं किया गया। यह मामला आईपीसी की धारा 354, 354 (बी) और पॉक्सो एक्ट के प्रासंगिक प्रावधानों की सीमा से आगे नहीं जाता है।

हाईकोर्ट ने दलीलों की पृष्ठभूमि में और आरोपियों पर आरोपों को ध्यान में रखते हुए कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह अनुमान लगाया जा सके कि आरोपियों ने पीड़िता के साथ रेप करने का निश्चय किया था। कोर्ट ने यह भी माना कि शिकायत में या सीआरपीसी की धारा 200/202 के तहत दर्ज गवाहों के बयान में ऐसा कोई आरोप नहीं है कि आरोपी आकाश नाबालिग पीड़िता के निचले वस्त्र की डोरी तोड़ने के बाद खुद परेशान हो गया था।

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कोर्ट ने कहा कि आकाश पर विशेष आरोप यह है कि उसने पीड़िता को पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश की और उसके पजामे का नाड़ा तोड़ दिया। गवाहों ने यह भी नहीं बताया कि आरोपी के इस कृत्य के कारण पीड़िता नग्न हो गई या उसके कपड़े उतर गए। ऐसा कोई आरोप नहीं है कि आरोपी ने पीड़िता के खिलाफ़ यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की। कोर्ट ने कहा कि आरोपियों को आईपीसी की धारा 354 (बी) और पॉक्सो एक्ट की धारा 9/10 के तहत अपराधों के लिए भी सम्मन किया जा सकता है। इसी के साथ कोर्ट ने सम्मन आदेश को संशोधित करते हुए विशेष अदालत को संशोधित धाराओं के तहत पुनरीक्षणकर्ताओं के संबंध में नया सम्मन आदेश करने का निर्देश दिया।

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