गुड न्यूज: यूपी में यूं फंसी जमीनें आवंटियों को मिल सकती हैं वापस, योगी सरकार की OTS लाने की तैयारी
उत्तर प्रदेश के विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद द्वारा आवंटित की जाने वाली संपत्तियों का पैसा समय से जमा न होने से उस पर ब्याज पर ब्याज लग जाता है। इस वजह से आवंटियों और प्राधिकरण के बीच विवाद हो जाता है और संपत्तियां फंस जाती हैं। इसमें दोनों का नुकसान होता है।

योगी सरकार एक मुश्त समाधान (ओटीएस) योजना में इस बार आवासीय के साथ अन्य संपत्तियों को भी शामिल कराने जा रही है। इससे स्कूल, कॉलेज और संस्थागत उपयोग की फंसी संपत्तियों को भी शामिल किया जा रहा है। इससे ऐसी संपत्तियों के आवंटियों को मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। इतना ही नहीं इस बार नक्शे के डिफाल्टर मामलों को भी ओटीएस के माध्यम से सुलझाते हुए उसे बनाने की सुविधा दी जाएगी।
उच्चाधिकारियों की बैठक में सहमति के बाद शासन स्तर से इस संबंध में जल्द ही कैबिनेट से प्रस्ताव पास कराने की तैयारी है। प्रदेश के विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद द्वारा आवंटित की जाने वाली संपत्तियों का पैसा समय से जमा न होने से उस पर ब्याज पर ब्याज लग जाता है। इससे आवंटियों और प्राधिकरण के बीच विवाद होने से संपत्तियां फंस जाती हैं और दोनों का नुकसान होता है। पिछले काफी समय से इस तरह के मामले लंबित पड़े हुए हैं। इसीलिए उच्चस्तर पर सहमति बनी है कि ऐसी संपत्तियों के समाधान के लिए ओटीएस योजना लाई जाए, जिससे इनका समाधान हो सके।
नक्शे के डिफाल्टर मामले भी दायरे में आएंगे
इस बार सभी प्रकार की आवासीय संपत्तियों के साथ ही सरकारी संस्थाओं को आवंटित संपत्तियां, विभिन्न प्रकार के स्कूल भूखंड, चैरीटेबल संस्थाओ आदि को आवटित संपत्तियां, सभी प्रकार की व्यावसायिक संपत्तियां चाहे नीलामी की हो या अन्य माध्यम से आवंटित की गई इनको ओटीएस के दायरे में लाया जाएगा। सहकारी समितियों के साथ ही नक्शे के डिफाल्टर मामलों को भी इसके दायरे में लाने की तैयारी है।
विकास प्राधिकरणों का 28 हजार करोड़ फंसा
उच्चाधिकारियों की मानें तो एक से लेकर 10 साल तक की डिफाल्टर संपत्तियों की संख्या करीब 19 हजार बताई जा रही है। विकास प्राधिकरणों का इससे करीब 28 हजार करोड़ रुपये फंसा होने का अनुमान लगाया जा रहा है। शासन इस संबंध में कैबिनेट से प्रस्ताव पास कराने की तैयारियों में जुट गया है। कैबिनेट मंजूरी के बाद ओटीएस योजना शुरू की जाएगी, जिससे आवंटियों को राहत दी जा सके और विकास प्राधिकरणों का फंसा हुआ मूल धन वापस पाया जा सके।




साइन इन