घाघरा पुल 2 महीने के लिए बंद होगा, बहराइच-गोंडा समेत 4 जिलों के लोग इस रूट से जाएंगे लखनऊ
यूपी में लखनऊ से बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा और बलरामपुर आने और जाने वालों के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी। बाराबंकी-बहराइच हाईवे के घाघरा नदी के संजय सेतु की मरम्मत के लिए दो महीने यानि 60 दिन के लिए यातायात पूरी तरह से बंद रहेगा।

यूपी में लखनऊ से बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा और बलरामपुर आने और जाने वालों के लिए मुश्किलें बढ़़ने वाली हैं। बाराबंकी-बहराइच हाईवे के घाघरा नदी के संजय सेतु की मरम्मत के लिए दो महीने यानि 60 दिन के लिए यातायात पूरी तरह से बंद रहेगा। इसे यातायात के लिए रोकने की संभावित तिथि 17 फरवरी तय की गई है। पुल की मरम्मत के दौरान लखनऊ से नेपाल, गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती व बलरामपुर को जाना-जाना बंद रहेगा। इससे बहराइच व श्रावस्ती के वाहनों को सीतापुर से चहलारीघाट और गोंडा व बलरामपुर के वाहनों को अयोध्या के माध्यम से लखनऊ के लिए संचालित करने की व्यवस्था रहेगी।
एनएचएआई के परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा ने बताया कि संजय सेतु करीब 45 साल पुराना है। यह नेपाल व पांच जिलों के आवागमन का एक मात्र मार्ग है। इस सेतु के एक्सपेंशन ज्वाइंट में दरारें आ गई है। इस पुल में लगी सभी 128 वियेरिंग भी डैमेज हो गई है। इसके मद्देनजर एडीजी यातायात से बातचीत हुई है। प्रमुख सचिव पीडब्ल्यूडी से इस बारे में शुक्रवार को बातचीत तय है। महाकुंभ व श्रीलोधेश्वर महादेवा के मेले के मद्देनजर अब 17 फरवरी से यातायात को बंद करने पर सैद्धांतिक सहमति बनाई जा रहीं है। यह भी बताया कि डीएम गोंडा ने सेतु पर यातायात रोके जाने के दौरान पोंटून पुल समान्तर पर बनाए जाने का प्रस्ताव दिया है। इस पर भी विचार किया जा रहा है। यातायात रोके जाने के दौरान डायवर्जन लागू होगा।
महाकुंभ के दौरान डायवर्जन व्यवस्था प्रभावी
इस बीच डीएम बाराबंकी शशांक त्रिपाठी ने बताया कि एनएचएआई 17 फरवरी से घाघरा नदी के संजय सेतु में मेजर मरम्मत करने जा रहा है। करीब दो माह की यातायात बंदी के दौरान संबंधित जिलों के वाहनों को महाकुंभ के दौरान किए गए डायवर्जन व्यवस्था को प्रभावी कराया जाएगा। इससे बहराइच व श्रावस्ती के वाहनों को सीतापुर से चहलारीघाट और गोंडा व बलरामपुर के वाहनों को अयोध्या के माध्यम से संचालित करने की व्यवस्था रहेगी।
75 हजार से अधिक लोगों का रोजाना आवागमन
निर्माण साल 1981 में शुरू हुआ और तत्कालीन मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह यानी वीपी सिंह ने 9 अप्रैल, 1981 को इसकी आधारिशला रखी थी. इससे बनने में 3 साल लगे और 1984 में इस पुल को जनता के लिए खोल दिया गया था। तब यह यूपी का सबसे लंबा पुल माना जाता था। फिलहाल पुल की हालत काफी जर्जर हो चुकी है और अब इसे बंद करके मरम्मत करना जरूरी है। इस पर गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावसती के यात्रियों और मालवाहक वाहनों का सीधा लोड है। इस रास्ते से नेपाल बार्डर के जिलों के निवासियों और सिद्धार्थनगर से भी लोगों का आवागमन हो रहा है। ऐसे में लगभग 70-75 हजार से अधिक लोगों का रोजाना आवागमन है।




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