यूपी के इस जिले में पकड़ा गया एलपीजी का बड़ा खेल, अधिकारियों की छापेमारी के बाद गैस एजेंसी सील
एलपीजी संकट के बीच गैस एजेंसियां ही कालाबाजारी में लग गई हैं। बुकिंग वालों की जगह अन्य लोगों को ब्लैक में सिलेंडरों की आपूर्ति कर रही हैं। इस खेल का रविवार को छापेमारी के बाद यूपी के सीतापुर में खुलासा हुआ है।

ईरान-इजराइल युद्ध के कारण एलपीजी के संकट में गैस एजेंसियों ने ही आपदा में अवसर खोज लिया है। बड़े पैमाने पर खेल शुरू कर दिया है। बुकिंग वालों की जगह गैस सिलेंडरों की आपूर्ति ब्लैक में की जा रही है। इसका खुलासा उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में पकड़ा गया है। यहां आम लोगों के हक पर डाका डालने वाली एक गैस एजेंसी पर प्रशासन का चाबुक चला है। सिधौली तहसील के कसमंडा ब्लॉक स्थित 'आर.के. इंडियन गैस वितरक एजेंसी' में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाए जाने के बाद एसडीएम और जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) ने संयुक्त छापेमारी कर एजेंसी को सील कर दिया है। जांच में सामने आया कि एजेंसी संचालक न केवल सिलेंडरों की कालाबाजारी कर रहे थे, बल्कि ई-केवाईसी के नाम पर गरीब उपभोक्ताओं से अवैध वसूली भी की जा रही थी।
छापेमारी में खुली पोल: 14 हजार कनेक्शन, 8 हजार क्षमता
जिला पूर्ति अधिकारी अखिलेश कुमार श्रीवास्तव को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि सरौरा कलां स्थित इस एजेंसी पर बुकिंग के बावजूद उपभोक्ताओं को सिलेंडर नहीं दिए जा रहे हैं। रविवार देर शाम जब एसडीएम राखी वर्मा और डीएसओ की टीम ने गोदाम पर धावा बोला, तो स्टॉक रजिस्टर और हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर मिला। चौंकाने वाली बात यह है कि एजेंसी के पास कुल 14 हजार गैस कनेक्शन हैं, जबकि उनके गोदाम की क्षमता महज 8 हजार सिलेंडरों की है। नियमों की अनदेखी का यह स्तर देख अधिकारी भी दंग रह गए।
बिना डीएसी नंबर के बेचे जा रहे थे सिलेंडर
जांच के दौरान सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि 11 मार्च को एजेंसी के पास 342 गैस सिलेंडरों की खेप आई थी। नियमानुसार, हर सिलेंडर की डिलीवरी के लिए डीएसी (Delivery Authentication Code) अनिवार्य है, लेकिन एजेंसी ने इन सभी सिलेंडरों को बिना किसी बुकिंग और बिना डीएसी नंबर के ही बाजार में 'ब्लैक' कर दिया।
ये सिलेंडर किसे बेचे गए, इसका रिकॉर्ड में कोई जिक्र नहीं था। छापेमारी के समय गोदाम में केवल 4 भरे हुए सिलेंडर मिले, जबकि करीब 400 खाली सिलेंडर मौजूद थे। इन खाली सिलेंडरों को प्रशासन ने तत्काल कब्जे में लेकर क्षेत्र की तीन अन्य एजेंसियों को हस्तांतरित कर दिया है ताकि उपभोक्ताओं को सप्लाई बाधित न हो।
ई-केवाईसी के नाम पर 180 रुपये की 'लूट'
ग्रामीण उपभोक्ताओं ने अधिकारियों के सामने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि केंद्र सरकार द्वारा निशुल्क की जा रही ई-केवाईसी प्रक्रिया के नाम पर एजेंसी कर्मचारी 180 रुपये की मांग कर रहे थे। पैसे न देने पर या तो केवाईसी नहीं की जाती थी या सिलेंडर देने में टालमटोल किया जाता था।
उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि बुकिंग के बाद जब वे एजेंसी पहुँचते थे, तो उन्हें स्टॉक खत्म होने का बहाना बनाकर खाली हाथ लौटा दिया जाता था, जबकि पिछले दरवाजे से सिलेंडरों की कालाबाजारी धड़ल्ले से जारी थी। एसडीएम राखी वर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्ति निरीक्षक कृष्णा सिंह को विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने और दोषियों पर कड़ी विधिक कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं।




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