Moharram Moon Sighted Mourning Begins for Imam Hussain and Martyrs मोहर्रम का चांद दिखा, Farrukhabad-kannauj Hindi News - Hindustan
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मोहर्रम का चांद दिखा

Farrukhabad-kannauj News - फर्रुखाबाद में मोहर्रम का चांद मंगलवार को दिखाई दिया। शिया मुसलमानों ने सेहा लिवास पहनकर मजलिसों का आयोजन किया। यह महीना इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत को याद करने का समय है। लोग कर्बला पहुंचकर शहीदों को याद कर मातम कर रहे हैं।

Tue, 16 June 2026 11:33 PMNewswrap हिन्दुस्तान, फर्रुखाबाद कन्नौज
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मोहर्रम का चांद दिखा

फर्रुखाबाद, संवाददाता। इस्लामी कलेंडर का पहला महीना (नव वर्ष) मोहर्रम का चांद मंगलवार को दिख गया। चांद होते ही शिया मुसलमानों नें सेहा लिवास पहन लिए, और घरों से लेकर अजाखानों में मजलिसों का दौर शुरू हो गया। देर रात तक मजलिसों में इमाम हुसैन को यादकर अज़ादार मातमकर आंसू बहाते रहे। मोहर्रम वह महीना है जिसमें मोहम्मद सहन के नवासे हजरत इमाम हुसैन व उनके 72 साथियों को शहीद कर दिया गया था। इसलिए इस्लामी नव वर्ष के बाद भी इस माह में खुशियां नहीं मनाई जाती हैं। शिया मुसलमान पूरे महीने कर्बला में हुए शहीदों को यादकर मजलिसों में मातमकर आंसू बहाते हैं। इसके अलावा अन्य कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। अलम जुलूस और ताजिये निकाले जाते हैं। मंगलवार को जब सूरज ढलने के बाद मोहर्रम का चांद नजर आया तो एकाएक मुस्लिम मोहल्लों में सन्नाटा पसर गया। शिया मुसलमानों की बस्तियों में मातम छा गया। इमाम के शैदाइयों नें सेहा लिवास पहन लिए। घरों की छतों पर काले परचम लगा दिए गए। महिलाओ नें शुर्ख लिवासों के स्थान पर सेहा लिवास पहन लिए और चूड़ियां उतार दीं। शाम को घरों में मजलिसें आयोजित की गईं। मौलाना सदाकत हुसैन शैथली ने बताया कि चांद हो गया है। मोहर्रम का महीना शुरु हो गया है। मजलिसों के साथ मातम का दौर चलेगा। मोहल्ला घेर शामू खां में मोहर्रम का चांद होते ही घरों और अजाखानों से देर रात तक सिसकियों की आवाजें आती रहीं। बुधवार को विधिवत रूप से मजलिसों और मातम का दौर शुरू होगा। उधर चांद की तस्दीक करने वाली कमेटी मस्जिद काजी साहब में एकत्र हुई और चांद होने की तस्दीक की.

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कर्बला पहुंचे अज़ादार

फर्रुखाबाद। चांद की तस्दीक होते ही लोग कर्बला पहुंचे और यहां बैठकर देर तक कर्बला के शहीदों को यादकर आंसू बहाए। चिलसरा स्थित कर्बला और नजफ़ में लोगों ने हाजिरी दी। उधर दरग़ाह हजरत अब्बास में लोगों ने पहुंचकर हाजिरी दी और इमाम हुसैन की कुर्बानियों को याद किया। ठंडी सड़क स्थित बारगाहे जैनबिया में लोगों ने पहुंचकर मातम किया और आंसू बहाए।

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