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अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतने नहीं दे सकते, हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए प्रशासन के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि अधिकारी की लापरवाही के कारण किसी लाभार्थी को योजना का लाभ देने से वंचित नहीं किया जा सकता।

Thu, 12 March 2026 09:27 PMDinesh Rathour प्रयागराज, विधि संवाददाता
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अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतने नहीं दे सकते, हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए प्रशासन के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि अधिकारी की लापरवाही के कारण किसी लाभार्थी को योजना का लाभ देने से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने यह आदेश याचिकाकर्ता के पति की मृत्यु के बाद बीमा दावा खारिज किए जाने के मामले में दिया।

याचिकाकर्ता के पति राम प्रवेश यादव, जो एक सीमांत किसान थे, की 6 सितंबर 2016 को भैंस के हमले में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद पोस्टमार्टम और अन्य औपचारिकताएं पूरी की गईं। याचिकाकर्ता ने बीमा योजना के तहत दावा करने के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज तत्कालीन लेखपाल को निर्धारित समय के भीतर दे दिए थे। लेकिन लेखपाल ने उन दस्तावेजों को आगे अधिकारियों तक नहीं भेजा और अप्रैल 2017 में तबादला होने के बाद भी नए लेखपाल को फाइल रिपोर्ट नहीं सौंपी। बाद में प्रयास करके याचिकाकर्ता ने 27 जनवरी 2018 को फिर से दस्तावेज जमा किए।

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लेखपाल के खिलाफ शुरू हुई थी विभागीय कार्रवाई

प्रशासन ने यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि आवेदन घटना के लगभग 20 महीने बाद प्रस्तुत हुआ, जो योजना की समयसीमा से बाहर है। इस आदेश को याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने रिकॉर्ड देखने के बाद पाया कि याचिकाकर्ता ने समय के भीतर आवेदन किया था, लेकिन लेखपाल की लापरवाही से मामला आगे नहीं बढ़ पाया। इस संबंध में लेखपाल के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की गई थी। कोर्ट ने कहा कि यह योजना किसानों के परिवारों को आकस्मिक मृत्यु या विकलांगता की स्थिति में तत्काल आर्थिक सहायता देने के लिए बनाई गई है। ऐसे कल्याणकारी कानूनों और योजनाओं की व्याख्या उदार और व्यावहारिक तरीके से की जानी चाहिए, न कि तकनीकी आधार पर लाभार्थी को वंचित किया जाए।

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बलिया जिला मजिस्ट्रेट ने रद्द किया था आदेश

कोर्ट ने 16 दिसंबर 2021 को जिला मजिस्ट्रेट, बलिया द्वारा पारित आदेश को रद्द कर दिया और मामले को पुनः विचार के लिए डीएम को भेज दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के बीमा दावे पर कानून के अनुसार पुनः निर्णय लिया जाए और यह प्रक्रिया आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के आठ सप्ताह के भीतर पूरी की जाए।

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मुख्तार अंसारी के चचेरे भाई मंसूर को राहत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्तार अंसारी के चचेरे भाई मंसूर अंसारी को राहत देते हुए डीएम गाजीपुर द्वारा गैंगस्टर एक्ट की कार्यवाही में कुर्क की गई उसकी संपत्ति को रिलीज करने का आदेश दिया है। साथ ही गाजीपुर की स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए द्वारा डीएम की कार्रवाई को सही ठहराने के आदेश भी रद्द कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजबीर सिंह ने मंसूर अंसारी की याचिका स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने याची के अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय व सरकारी वकील को सुनने के बाद गत 17 फरवरी को फैसला सुरक्षित कर लिया था। अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय का कहना है कि गाजीपुर के मोहम्मदाबाद मोहल्ला स्थित मंसूर अंसारी की 23 दुकानों को डीएम ने गैंगस्टर एक्ट में कुर्क किया था। कोर्ट ने सभी 23 दुकानों को गैंगस्टर से अर्जित संपत्ति न मानते हुए कुर्की आदेश रद्द कर दिया है।

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