बेहद शर्मनाक, धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला, नीतीश कुमार के हिजाब हटाने पर बरसे संभल सांसद बर्क
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के महिला का हिजाब हटाने की कोशिश पर संभल सांसद जियार्रहमान बर्क ने तीखा हमला किया है। बर्क ने इसे महिला की गरिमा और धार्मिक पहचान से खिलवाड़ बताया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ महिला से असभ्यता नहीं बल्कि एक गंभीर नैतिक अपराध भी है।

बिहार में एक सरकारी समारोह के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक महिला अभ्यर्थी का हिजाब हटाने की कोशिश का मामला अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी गरमा गया है। संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने इस घटना पर तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए इसे 'बेहद शर्मनाक' और 'धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला' करार दिया है। सांसद ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक मंच पर एक मुख्यमंत्री द्वारा ऐसी हरकत न केवल अशोभनीय है, बल्कि यह किसी महिला की गरिमा और उसकी आस्था के साथ सीधा खिलवाड़ है।
सांसद बर्क ने बुधवार को अपने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से बिहार के मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक मंच पर किसी महिला की धार्मिक पहचान और उसकी पसंद के साथ इस तरह का व्यवहार करना एक गंभीर नैतिक अपराध है। बर्क ने कहा कि हालात इतने असहज हो गए थे कि वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों को उस लड़की को पीछे खींचना पड़ा, ताकि स्थिति और न बिगड़े। सांसद ने बिना किसी शर्त के नीतीश कुमार से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।
टीवी चैनलों पर बहस क्यों नहीं
सांसद बर्क ने इस मामले में मुख्यधारा की मीडिया की चुप्पी पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, "इतनी गंभीर और निंदनीय घटना होने के बावजूद टीवी चैनलों के स्टूडियो में इस पर बहस क्यों नहीं हो रही है?" उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर यही काम किसी अन्य व्यक्ति या विपक्ष के नेता ने किया होता, तो अब तक उसका 'मीडिया ट्रायल' शुरू हो चुका होता। उन्होंने इस खामोशी को पक्षपातपूर्ण बताते हुए इसे दोहरे मापदंड का उदाहरण करार दिया।
संवैधानिक मूल्यों और गरिमा का हनन
सांसद बर्क ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक देश में हर नागरिक को अपनी धार्मिक मान्यताओं का पालन करने और अपनी पसंद के वस्त्र पहनने का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग ही इस तरह की मर्यादाओं और निजी स्वतंत्रता का उल्लंघन करेंगे, तो समाज में बहुत गलत संदेश जाएगा।
सांसद बर्क के अनुसार, यह घटना केवल एक व्यक्तिगत अपमान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की 'गंगा-जमुनी तहजीब' और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा से जुड़ा एक बड़ा प्रश्न है। उन्होंने देश भर के मानवाधिकार संगठनों और महिला आयोगों से भी इस मामले का संज्ञान लेने की अपील की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी महिला की अस्मत और उसकी धार्मिक स्वतंत्रता के साथ राजनीति की आड़ में समझौता नहीं किया जा सकता और ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त करना लोकतंत्र के लिए खतरा है।




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