End Worries for Electricity Consumers Prepaid Meter Cannot Be Made Mandatory UP Until Act Is Amended प्रीपेड मीटरों की टेंशन हमेशा के लिए खत्म; नियामक आयोग ने कर दी व्यवस्था, उपभोक्ताओं को मिला विकल्प, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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प्रीपेड मीटरों की टेंशन हमेशा के लिए खत्म; नियामक आयोग ने कर दी व्यवस्था, उपभोक्ताओं को मिला विकल्प

अब विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 47(5) में बदलाव होने तक यूपी में प्रीपेड मीटर व्यवस्था अनिवार्य तौर पर लागू नहीं की जा सकेगी। नियामक आयोग ने विद्युत संयोजन में 47(5) की अनिवार्यता का आदेश जारी कर यह अटकलें ही पूरी तरह खारिज कर दी हैं कि अब इसे कभी भी अनिवार्य किया जा सकेगा।

Sat, 30 May 2026 12:37 PMDinesh Rathour लखनऊ, विशेष संवाददाता
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प्रीपेड मीटरों की टेंशन हमेशा के लिए खत्म; नियामक आयोग ने कर दी व्यवस्था, उपभोक्ताओं को मिला विकल्प

Prepaid Smart Meter News: यूपी में प्रीपेड मीटरों को लेकर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हो चुका है। सड़क से लेकर बिजली विभाग में भी प्रीपेड स्मार्ट के चक्कर में तोड़फोड़ तक की जा चुकी है। हालांकि कुछ दिन पहले यूपी सरकार प्रीपेड व्यवस्था को समाप्त कर चुकी है, लेकिन इसके बाद भी लोगों में आशंका थी कि विवाद बढ़ने के कारण प्रीपेड मीटर की व्यवस्था को कुछ दिन के लिए बंद किया गया। अंदेशा था कि इसे दोबारा से भी लागू किया जा सकता है, लेकिन उपभोक्ताओं की ये टेंशन अब हमेशा के लिए खत्म हो गई है। अब विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 47(5) में बदलाव होने तक यूपी में प्रीपेड मीटर व्यवस्था अनिवार्य तौर पर लागू नहीं की जा सकेगी। नियामक आयोग ने विद्युत संयोजन में 47(5) की अनिवार्यता का आदेश जारी कर यह अटकलें ही पूरी तरह खारिज कर दी हैं कि अब इसे कभी भी अनिवार्य किया जा सकेगा।

नियामक आयोग ने शुक्रवार को जारी आदेश में कहा है कि उपभोक्ताओं के पास प्रीपेड व पोस्टपेड का विकल्प होगा। बिजली कंपनियों को हर हाल में विद्युत अधिनियम के मुताबिक ही चलना होगा। पहले से चले आ रहे कनेक्शनों और नया कनेक्शन लेने वालों पर एक समान रूप से यह व्यवस्था लागू रहेगी। आयोग ने यह आदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद द्वारा 16 अप्रैल 2026 को दाखिल अर्जेंट लोक महत्व प्रस्ताव पर सुनवाई करते हुए दिया है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि यूपी अब देश का पहला राज्य बन गया है, जहां नियामक आयोग ने धारा 47(5) पर अलग से आदेश जारी किए हैं। अब राज्य सरकार या पावर कॉरपोरेशन या बिजली कंपनियां इसमें अपने स्तर पर बदलाव नहीं कर सकेंगी। आयोग के इस आदेश के बाद पावर कॉरपोरेशन को अपने बिलिंग सॉफ्टवेयर में बदलाव करना होगा।

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बहुमंजिला इमारतों में प्रीपेड मीटर समेत अन्य मामलों पर याचिका दायर

वहीं दूसरी ओर बहुमंजिला इमारतों में प्रीपेड मीटर और अन्य दुश्वारियों को समाप्त करने के लिए शुक्रवार को नियामक आयोग में लोकमहत्व याचिका दायर हो गई है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने याचिका दायर कर 2018 का आदेश रद्द करने की मांग की है। साथ ही इसमें लखनऊ व नोएडा के कुछ बिल्डरों व रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) द्वारा मनमानी बिजली दरों से वसूली और मेंटेनेंस शुल्क की प्रीपेड मीटर से कटौती के आदेशों की भी शिकायत की गई है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि एक अप्रैल 2026 से केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने पूरे देश में प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है।

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बड़े शहरों में प्रीपेड मीटरों से मेंटीनेंस के लिए मांगे जा रहे पैसे

उत्तर प्रदेश में आयोग द्वारा 10 अगस्त 2018 को जारी 13वें संशोधन आदेश के तहत बहुमंजिला इमारतों में बिजली कनेक्शन केवल प्रीपेड मोड में ही दिए जा रहे हैं। पुराने प्रीपेड मीटरों को पोस्टपेड में नहीं बदला जा रहा है। तकरीबन 20-25 लाख उपभोक्ता प्रभावित हैं। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि लखनऊ सहित नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर, मेरठ समेत अन्य शहरों की बहुमंजिला इमारतों में प्रीपेड मीटरों से मेंटीनेंस शुल्क की वसूली के आदेश हो रहे हैं। उन्होंने आरडब्ल्यूए द्वारा जारी आदेश की प्रति भी याचिका में संलग्न की है। याचिका में आयोग से बहुमंजिला इमारतों में प्रीपेड व्यवस्था समाप्त करने के अलावा साझा क्षेत्रों में बिजली खर्च का ब्योरा उपभोक्ताओं को दिलवाए जाने की भी मांग की गई है। मांग की गई है कि बहुमंजिला इमारतों में भी रहने वालों को सीधे विद्युत वितरण निगम से कनेक्शन लेने का अधिकार दिया जाए। बिल्डरों द्वारा बिजली दरें तय करने पर रोक लगाई जाए।

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