देवर ने भाभी संग की अश्लील हरकत, वायरल कर दिए प्राइवेट फोटो, कोर्ट ने सुनाई तीन साल की सजा
विशेष लोक अभियोजक लव बंसल ने बताया कि महुआखेड़ा क्षेत्र के एक इलाके में रहने वाली महिला ने 28 सितंबर को मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें कहा था कि देवर ने उसके प्राइवेट फोटो वायरल कर दिए।

अलीगढ़ के महुआखेड़ा थाना क्षेत्र में पिछले साल एक महिला के आपत्तिजनक फोटो वायरल करने के मामले में उसके देवर को दोषी करार दिया गया है। एडीजे पॉक्सो द्वितीय प्रदीप कुमार राम की अदालत ने दोषी देवर को तीन साल कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही एक लाख 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। विशेष लोक अभियोजक लव बंसल ने बताया कि महुआखेड़ा क्षेत्र के एक इलाके में रहने वाली महिला ने 28 सितंबर को यह मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें कहा था कि उसके चचिया ससुर के बेटे पवन का उनके घर पर आना-जाना था।
महिला ने अपने फोन में कुछ व्यक्तिगत आपत्तिजनक फोटो खींच रखे थे। पवन ने उन फोटो को अपने मोबाइल फोन में ले लिया। उनके जरिये वह ब्लैकमेल करने लगा और शारीरिक संबंध बनाने को कहने लगा। महिला के मना करने पर उसने फोटो व वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए। इसके बाद पुलिस ने पवन के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। 15 जुलाई 2025 को उसके खिलाफ आरोप तय किए गए। साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर अदालत ने पवन को दोषी मानते हुए फैसला सुनाया है।
फर्जी केस में महिला को तीन वर्ष की सजा
लूट व एससी/ एसटी एक्ट का फर्जी मुकदमा दर्ज कराने के मामले में दोषी करार दी गयी ममता को एससी /एसटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही साथ अदालत ने निर्णय की एक प्रति जिलाधिकारी को इस आशय से भेजी है कि यदि सरकार द्वारा दोषी ममता को कोई राहत राशि दी गई है तो उसको तत्काल वापस लिया जाना सुनिश्चित करें। अभियोजन पक्ष के अनुसार ममता ने विपक्षी गुट के किसान नेता अर्जुन, विनोद कुमार व केशन के विरुद्ध थाना माल मे लूट व एससी/एसटी एक्ट का मुकदमा दर्ज कराया था।
विवेचना के दौरान जानकारी मिली कि ममता ने भाकियू (लोकतांत्रित गुट) के तहसील अध्यक्ष विष्णु पाल के कहने पर ये मुकदमा लिखवाया था। इससे पहले विष्णु पाल व अन्य के विरुद्ध विपक्षी गुट के किसान नेता अर्जुन सिंह गुट की महिला कार्यकर्ता आरती ने दहेज प्रथा, मारपीट व जान से मारने की धमकी देने का मुकदमा दर्ज कराया था। इसी की रंजिश के चलते दोषी महिला ने पेशबंदी कर यह फर्जी मुकदमा दर्ज कराया। विवेचना के दौरान घटना से जुड़े स्वतंत्र गवाहों ने भी बताया कि घटना न केवल फर्जी है, अपितु केवल रंजिशवश दर्ज कराई गयी है।




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