रामभवन-दुर्गावती को मृत्युदंड के बाद कोर्ट ने दिया ये आदेश, यौन शोषण पीड़ित बच्चों को 10-10 लाख
रामभवन और दुर्गावती को मृत्यु दंड की सजा सुनाने के बाद अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि सरकार पीड़ित परिवारों को दस-दस लाख रुपये मुआवजा देगी। सीबीआई के सहायक लोक अभियोजक सौरभ सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी को कोर्ट ने पत्र जारी किया है। इस केस में 34 बच्चों के पोर्न वीडियो न्यायालय के समक्ष आए हैं।

जेई रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती के शिकार सभी 34 पीड़ित बच्चों को कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। इन बच्चों के यौन शोषण के दोषी रामभवन और दुर्गावती को मृत्यु दंड की सजा सुनाने के बाद अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि सरकार पीड़ित परिवारों को दस-दस लाख रुपये मुआवजा देगी। सीबीआई के सहायक लोक अभियोजक सौरभ सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी को कोर्ट ने पत्र जारी किया है। यौन शोषण मामले में 34 बच्चों के पोर्न वीडियो न्यायालय के समक्ष आए हैं। इन सभी के परिवारों को यह मुआवजे की राशि मिलेगी।
छह माह के भीतर मृत्युदंड की तीसरी सजा
नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के दोषी जेई रामभवन और पत्नी दुर्गावती को मृत्यु दंड की सजा के साथ जिले में कानून का इकबाल एक बार फिर से बुलंद हुआ। पिछले छह माह के भीतर अदालत ने फांसी की तीसरी सजा सुनाईं। इनमें चार लोग शामिल रहे। बांदा कोर्ट में इस घिनौने कांड पर फैसले के आते ही पीड़ित परिवारों के जख्मों पर मरहम लगा।
पॉक्सो न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने बीते छह माह के अंदर तीसरी बार ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। तीन फैसलों में अब तक कुल चार लोगों को फांसी सजा सुनाई गई है। 8 सितंबर 2025 को चिल्ला क्षेत्र में बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या में सुनील निषाद को, छह जनवरी 2026 को कालिंजर क्षेत्र में छह साल की बच्ची से दरिंदगी में अमित रैकवार को और अब 20 फरवरी को 2026 को दंपति रामभवन व उसकी पत्नी दुर्गावती को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है।
दिल्ली एम्स में हुआ इलाज
सीबीआई के इंसपेक्टर पुरुषोत्तम कुमार ने बताया कि रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती की दंरिदगी का शिकार हुए यौन शोषण पीड़ित बच्चों को दिल्ली के एम्स में ले जाया गया। वहां डाक्टरी भी कराई गई और उनका इलाज कराया गया। इनमें कई बच्चों की हालत खराब थी। मामला प्रकाश में आने के बाद बच्चों को एम्स में ले जाया गया था।
बांदा में नहीं फांसी घर मेरठ भेजे जाएंगे दंपति
मंडल कारागार बांदा में दंपति को सजा ए मौत के बाद यहां चार दोषी मत्युदंड पाने वाले निरुद्ध हैं। चारों को पॉक्सों की अदालत से फांसी की सजा सुनाई गई है। खास बात यह है कि बांदा में फांसी घर की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में चारों दोषी मेरठ तक अंतिम सफर तय करेंगे। पॉक्सों अदालत लगातार फैसले सुना रही है। बांदा के इतिहास में पहली बार किसी दंपति को फांसी की सजा सुनाई गई है। दोषी रामभवन के बैरक तीन बी और वहीं उसकी पत्नी दुर्गावती को महिला बैरक में निरुद्ध किया गया है। जेल जाने के बाद दंपति गुमसुम रहे। जेल प्रशासन ने काउंसिलिंग कराई है।
मंडल कारागार में पांच साल से बंद है रामभवन
रामभवन को 16 नवंबर 2020 को मंडल कारागार बांदा में निरुद्ध किया गया था। कोरोना काल से वह एक विशेष बैरक में रखा गया था। इसके बाद 18 दिसंबर 2020 में दुर्गावती को यहीं मंडल कारागार भेजा गया। इसके बाद हाईकोर्ट से पत्नी की जमानत हो गई। कारागार में बंद रामभवन जेई को दो दिन पहले ही पता चल गया था कि वह दोषी पाया गया है और दो दिन बाद फांसी की सजा सुनाई जानी है। फांसी की जानकारी मिलते ही उसके हाव-भाव बदल गए थे। अधिकारियों के मुताबिक दो दिन से वह खाना कम खा रहा था।
90 दिन अपील का समय
शासकीय अधिवक्ता कमल सिंह गौतम ने कहा कि फांसी की सजा के बाद हाईकोर्ट में 90 दिन तक अपील का समय रहता है। इसके बाद 90 दिन तक सुप्रीम कोर्ट और इसके बाद राष्ट्रपति के यहां दया याचिका डाल सकते हैं।




साइन इन