companies under suspicion regarding smart prepaid electricity meters They have been given responsibility of test meter स्मार्ट प्रीपेड मीटर प्रकरण में जिन पर शक, उन्हीं को टेस्ट मीटरों का जिम्मा, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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स्मार्ट प्रीपेड मीटर प्रकरण में जिन पर शक, उन्हीं को टेस्ट मीटरों का जिम्मा

बिजली के स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर जिन कंपनियों पर शक है, उन्हीं कंपनियों को चेक मीटर की जिम्मेदारी दी गई। पहली दिक्कत तो यह कि उपभोक्ताओं के आवेदन पर कई-कई दिनों तक सुनवाई नहीं हो रही।

Wed, 29 Oct 2025 05:55 AMDeep Pandey लखनऊ। रोहित मिश्र
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स्मार्ट प्रीपेड मीटर प्रकरण में जिन पर शक, उन्हीं को टेस्ट मीटरों का जिम्मा

स्मार्ट प्रीपेड मीटर की रीडिंग को लेकर उपभोक्ताओं में शंका है। वे टेस्ट मीटर के लिए आवेदन कर रहे हैं। पहली दिक्कत तो यह कि उपभोक्ताओं के आवेदन पर कई-कई दिनों तक सुनवाई नहीं हो रही। जिनकी बात सुन भी ली जा रही है, उनके घरों पर टेस्ट मीटर लगाने के आदेश उन्हीं कंपनियों को दिए जा रहे हैं, जो स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगा रही हैं। यानी, जिन कंपनियों के मीटरों पर उपभोक्ताओं को शंका है, उन्हें ही चेक मीटर भी लगाने की जिम्मेदारी दी जा रही है।

प्रदेश में उपभोक्ताओं के घरों पर लगे पुराने मीटरों को स्मार्ट प्रीपेड मीटर से बदला जा रहा है। कॉरपोरेशन ने सीधे तौर पर मीटर खरीदे नहीं बल्कि कुछ कंपनियों को मीटर बदलने का टेंडर दे दिया है। साथ ही इन्हीं कंपनियों को यह भी आदेश दिए गए हैं कि वे नए कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं के यहां भी स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाएं। अब जबकि पावर कॉरपोरेशन ने मीटर खरीदे ही नहीं तो इस तरह के मीटरों की टेस्ट मीटर के तौर पर जांच करवाकर रखे ही नहीं गए। ऐसे में उपभोक्ता जब भी टेस्ट मीटर के तौर पर आवेदन कर रहे हैं तो मीटर लगाने वाली कंपनियों को ही टेस्ट मीटर के तौर पर एक और मीटर लगाने के आदेश दे दिए जा रहे हैं।

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हर लाट में से कुछ मीटर टेस्टिंग के लिए भेजते हैं

जब पावर कॉरपोरेशन उपभोक्ताओं के घरों पर लगाने के लिए टेस्ट मीटर की खरीद करता है तो हर लाट में से कुछ मीटर निकालकर टेस्टिंग के लिए भेजता है। एनएबीएल मीटरों का परीक्षण करके प्रमाण पत्र के साथ सीलपैक करके पावर कॉरपोरेशन को वापस कर देता है। इन परीक्षित मीटरों को डिविजनवार स्टोर में भेज दिया जाता है ताकि इन्हें टेस्ट मीटर की तरह इस्तेमाल किया जा सके।

चेक मीटर के आंकड़े भी सार्वजनिक नहीं

बदले जा रहे स्मार्ट प्रीपेड मीटरों के सापेक्ष पांच प्रतिशत पुराने मीटर घरों पर लगे रहने देने के आदेश हैं। यह आदेश इसलिए किए गए थे ताकि उपभोक्ता पुराने मीटरों की रीडिंग का नए मीटरों से मिलान कर लें और उन्हें इत्मिनान हो जाए कि स्मार्ट उनके पुराने मीटर जैसे ही चल रहे हैं। चेक मीटर तो छोड़े जा रहे हैं, लेकिन अब तक उनके मिलान की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।

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