Changur mafia raj was run with bullying, no officer like Kotwal CO SDM had any control over it छांगुर का माफिया राज दबंगई से चला, कोतवाल, सीओ, एसडीएम किसी अफसर की नहीं चली, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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छांगुर का माफिया राज दबंगई से चला, कोतवाल, सीओ, एसडीएम किसी अफसर की नहीं चली

यूपी में अवैध धर्मातंरण के मास्टरमाइंड छांगुर का माफिया राज दबंगई से चला। उसने अपने आगे किसी अफसर की नहीं सुनी। उसे राज में कोतवाल, सीओ व एसडीएम की भी नहीं चलती थी।

Mon, 14 July 2025 06:33 AMDeep Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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छांगुर का माफिया राज दबंगई से चला, कोतवाल, सीओ, एसडीएम किसी अफसर की नहीं चली

जमालुद्दीन उर्फ छांगुर का माफिया राज पूरी दबंगई से चला। उसके साम्राज्य के आगे कोतवाल, सीओ व एसडीएम की भी नहीं चलती थी। उसने अपने आगे किसी अफसर की नहीं सुनी। उसकी करतूतों की जब जांच शुरू हुई तो एसटीएफ की सख्ती का भी उस पर असर नहीं पड़ा। एसटीएफ ने उसे बयान के लिए कई नोटिस दी लेकिन उसने एसटीएफ मुख्यालय जाने से साफ मना कर दिया। दबाव बना तो उसने कोर्ट की शरण ले ली।

कोर्ट के आदेश पर एसटीएफ पूछताछ करने छांगुर की कोठी पहुंची तो जिस कमरे में टीम बैठाई गई, वहां पहले से हर कोने में सीसी कैमरे लगे थे। छांगुर का एक वकील पहले से वहां पर था। छांगुर से एसटीएफ की पूछताछ की बाकायदा रिकार्डिंग होती रही। जांच एजेन्सियों के सामने भी यह बात आई है। कोर्ट ने एसटीएफ से कहा था कि वह छांगुर से उसकी कोठी में बयान ले।

तालाब की जमीन पर कब्जा मिला, कुछ नहीं किया प्रशासन ने

सूत्रों के मुताबिक, पिछले साल एसटीएफ ने जब जांच की तो इसके प्रमाण मिले कि छांगुर की कोठी का काफी हिस्सा तालाब की जमीन पर है। इस पर एसटीएफ की ओर से बलरामपुर के जिला प्रशासन को पत्र लिखकर जानकारी मांगी गई। उतरौली तहसील से एसटीएफ के पत्र का कोई जवाब ही नहीं दिया गया। एसटीएफ ने तत्कालीन अफसरों से सम्पर्क किया लेकिन कोई जवाब लिखापढ़ी में नहीं दिया गया। यही नहीं एसटीएफ के साथ प्रशासन का कोई अधिकारी छांगुर से पूछताछ के लिए कोठी भी नहीं पहुंचा। अब शासन के सख्त होने पर प्रशासन को कोठी का कब्जे वाला हिस्सा ढहाना पड़ा।

एक कोतवाल पर 20 लाख लेने का आरोप

एसटीएफ जब जांच कर रही थी तो सर्विलांस में कई चौंकाने वाली जानकारी मिली। सूत्रों के मुताबिक तत्कालीन कोतवाल के 20 लाख रुपये लेने की बात एसटीएफ के जांच अधिकारियों ने मोबाइल पर सुनी। इस टीम ने जांच के दौरान छांगुर व अन्य सदस्यों के मोबाइल की कॉल रिकार्डिंग के दौरान रिश्वत लेने की बात सुनी गई। इस कोतवाल के खिलाफ जांच आगे बढ़ती, उससे पहले ही कार्रवाई रोक दी गई। हालांकि यह भी बताया जाता है कि इस संबंध में जांच पूरी हो गई है, जल्दी ही कार्रवाई की जाएगी। जांच तेजी से आगे बढ़ने लगी तो छांगुर ने पहुंच का फायदा उठाया और कुछ समय बाद ही यह जांच सुस्त कर दी गई।

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फटकार भी लगी थी पुलिस मुख्यालय में

छांगुर बाबा के खिलाफ जब एसटीएफ ने जांच पूरी कर एटीएस को रिपोर्ट सौंपी। इस दौरान एक सब इंस्पेक्टर कुछ तथ्यों की जांच के लिए उतरौला गए। यहां फिर जांच धीमी होने लगी। इस पर एडीजी स्तर के एक अधिकारी ने जांच में जुड़े एसआई, एएसपी को पुलिस मुख्यालय बुलाया। यहां पर इन्हें फटकार लगाई गई कि आखिर एसटीएफ की जांच के बाद भी एफआईआर क्यों नहीं दर्ज हो रही। इस पर आनन-फानन 16 नवम्बर 2024 को एफआईआर दर्ज की गई। एटीएस ने एसटीएफ के इंस्पेक्टर संतोष सिंह की जांच को ही एफआईआर का आधार बनाया।

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