नए साल पर पहली बार आसमान में दिखेगा अद्भुत नजारा, तीसरी रात चमकेगा 'वुल्फ मून'
आगामी 3 जनवरी को पूर्णिमा पर आकाश में 'वुल्फ मून' नजर आएगा। चांद बड़ा और चमकीला दिखेगा। इसी दिन पृथ्वी, सूर्य के सबसे निकट बिंदु पर भी पहुंचेगी, जिसे खगोल विज्ञान में उपसौर (पेरीहेलियन) कहा जाता है।

नए साल की शुरुआत आसमान में एक दुर्लभ खगोलीय संयोग के साथ होने जा रही है। आगामी 3 जनवरी को पूर्णिमा पर आकाश में 'वुल्फ मून' नजर आएगा। चांद बड़ा और चमकीला दिखेगा। इसी दिन पृथ्वी, सूर्य के सबसे निकट बिंदु पर भी पहुंचेगी, जिसे खगोल विज्ञान में उपसौर (पेरीहेलियन) कहा जाता है। वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि जनवरी माह की पूर्णिमा को 'वुल्फ मून' कहा जाता है।
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार सर्दियों के मौसम में भेड़ियों की आवाजें अधिक सुनाई देने के कारण इस पूर्णिमा का यह नाम पड़ा। चंद्रमा, पृथ्वी के अपेक्षाकृत निकट होने के कारण सामान्य से कुछ बड़ा और अधिक चमकीला नजर आएगा। मौसम साफ रहने पर इसे बिना दूरबीन या किसी विशेष उपकरण के आसानी से देखा जा सकेगा। उन्होंने बताया कि पूर्णिमा उस अवस्था को कहते हैं, जब चंद्रमा पृथ्वी के दूसरी ओर सूर्य के सामने होता है और उसका पूरा भाग प्रकाशित दिखाई देता है।
धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण
धार्मिक दृष्टि से पौष पूर्णिमा के रूप में यह दिन विशेष महत्व रखता है। देशभर में श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान कर दान-पुण्य करते हैं। शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। तीर्थ क्षेत्रों में इसी दिन से माघ स्नान की शुरुआत भी मानी जाती है।
सूर्य के सबसे निकट होगी पृथ्वी
खगोलविद् अमर पाल सिंह ने बताया कि इसी दिन पृथ्वी, सूर्य के सबसे निकट होगी। यह भारतीय समयानुसार रात लगभग 10:45 बजे घटित होगा। इस दौरान पृथ्वी, सूर्य से लगभग 14 करोड़ 70 लाख 99 हजार 894 किलोमीटर की दूरी पर होगी। बताया कि उपसौर के समय पृथ्वी अपनी कक्षा में सबसे तेज गति से चलती है, जो लगभग 30.27 किलोमीटर प्रति सेकंड होती है। इसके विपरीत जब पृथ्वी, सूर्य से सबसे दूर होती है, उसे अपसौर कहा जाता है, जो वर्ष 2026 में 6 जुलाई को पड़ेगा। सूर्य के सबसे नजदीक होने के बावजूद इस समय उत्तरी गोलार्ध, विशेषकर भारत में कड़ाके की ठंड रहती है। इसका कारण सूर्य से दूरी नहीं, बल्कि पृथ्वी का 23.5 डिग्री का अक्षीय झुकाव है। जनवरी में उत्तरी गोलार्द्ध सूर्य से दूर की ओर झुका होता है, जिससे सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती हैं और ठंड का मौसम बना रहता है।




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