शिक्षकों-शिक्षामित्रों, रसोइयों को कैशलेस मेडिकल समेत 30 प्रस्तावों पर योगी कैबिनेट की मुहर
यूपी की योगी सरकार ने शिक्षकों, शिक्षामित्रों के साथ ही शिक्षा विभाग के कर्मचारियों, रसोइयों को गुरुवार को बड़ी सौगात दी। योगी कैबिनेट ने शिक्षा विभाग के टीचरों कर्मचारियों के लिए कैशलेस मेडिकल बीमा सुविधा पर मुहर लगा दी है।

यूपी की योगी सरकार ने शिक्षा जगत से जुड़े लाखों शिक्षकों और कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह तय किया गया कि अब प्रदेश के माध्यमिक व बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मी और उनके आश्रित परिवार सरकारी के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी कैशलेस इलाज करा सकेंगे। मुख्यमंत्री ने बीते वर्ष पांच सितम्बर को शिक्षक दिवस पर इसकी घोषणा की थी। अब योगी कैबिनेट ने इस फैसले पर मुहर लगा दी है। शिक्षा विभाग के साथ ही अलग अलग विभागों से जुड़े 30 प्रस्तावों को योगी कैबिनेट ने मंजूरी दी है।
कैबिनेट के फैसले से बेसिक व माध्यमिक शिक्षा से जुड़े लगभग 15 लाख शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मी लाभान्वित होंगे। इस पर समग्र रूप से लगभग 448 करोड़ रुपये का व्यय होगा। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कैबिनेट के बाद प्रेसवार्ता कर पत्रकारों को शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मियों के लिए शुरू होने वाले कैशलेस सुविधा के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कैबिनेट के इस निर्णय के तहत माध्यमिक शिक्षा विभाग से संबद्ध अनुदानित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों (व्यावसायिक शिक्षा के विषय विशेषज्ञों एवं मानदेय शिक्षकों सहित), संस्कृत शिक्षा परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त अनुदानित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों (मानदेय शिक्षकों सहित) को यह सुविधा मिलेगी।
इसके अलावा माध्यमिक शिक्षा परिषद व संस्कृत शिक्षा परिषद के मान्यता प्राप्त स्ववित्तपोषित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों और माध्यमिक शिक्षा विभाग के राजकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों में मानदेय पर कार्यरत व्यावसायिक शिक्षा के विषय विशेषज्ञों को आईपीडी (अंत:रोगी विभाग) इलाज की कैशलेस सुविधा मिलेगी। इस सुविधा का लाभ उनके आश्रित भी उठा सकेंगे। माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने बताया कि सरकार की इस पहल का लाभ 2.97 लाख से अधिक लोगों को मिल सकेगा, जबकि इस पर 89.25 करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित है।
बेसिक शिक्षा के 11.95 कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
इसी तरह, बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों एवं बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त विद्यालयों (अनुदानित एवं स्ववित्त पोषित) में कार्यरत शिक्षकों, शिक्षामित्रों, विशेष शिक्षकों, अनुदेशकों, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में कार्यरत वार्डेन, पूर्णकालिक / अंशकालिक शिक्षकों / शिक्षिकाओं एवं प्रधानमंत्री पोषण योजना के रसोइयों और उनके आश्रितों को भी इसका लाभ मिलेगा। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने बताया कि इस योजना से बेसिक शिक्षा परिषद के 11.95 लाख से अधिक शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मी लाभान्वित होंगे। सरकार की इस पहल से प्रति कर्मी करीब 3000 रुपये सालाना प्रीमियम के हिसाब से कुल 358.61 करोड़ रुपये का वार्षिक खर्च अनुमानित है।
कैशलेस इलाज की सुविधा सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ साचीज से जुड़े निजी अस्पतालों में भी उपलब्ध होगी। इलाज की दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा तय मानकों के अनुसार होंगी। स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों को वेरिफिकेशन के बाद योजना का लाभ मिलेगा। वेरिफिकेशन के लिए जनपदों में जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया जाएगा। इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया गया है कि पहले से जो लोग केंद्र या राज्य द्वारा संचालित किसी अन्य स्वास्थ्य योजना, प्रधानमंत्री आयुष्मान जन आरोग्य योजना या मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान से आच्छादित हैं, उन्हें इसका लाभ नहीं मिलेगा।
अन्य फैसले
11 फरवरी को पेश होगा यूपी का बजट, 9 से शुरू होगा विधानमंडल का बजट सत्र
उत्तर प्रदेश का वर्ष 2026-27 का बजट 11 फरवरी को पेश किया जाएगा। यह निर्णय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में गुरुवार को कैबिनेट बैठक में लिया गया। इसके साथ ही यह भी तय हुआ कि विधानमंडल का बजट सत्र 9 फरवरी से प्रारंभ होगा।
प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि सत्र के पहले दिन 9 फरवरी को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का अभिभाषण होगा। इसके बाद 10 फरवरी को सदन में दिवंगत सदस्यों के निधन पर शोक व्यक्त किया जाएगा। वित्त मंत्री ने बताया कि 11 फरवरी को पूर्वाह्न 11 बजे वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार का फोकस विकास, जनकल्याण, बुनियादी ढांचे और आर्थिक मजबूती पर रहेगा।
शहरों में 25 साल पुराने भवन तोड़कर बना सकेंगे अपार्टमेंट
राज्य सरकार ने यूपी में 25 साल पुराने भवनों और तीन साल से बंद पड़े उद्योगों को तोड़ कर उसके स्थान पर हाउसिंग सोसायटी बसाने या फिर अपार्टमेंट बनाने की अनुमति देने का फैसला किया है। इसके लिए न्यूनतम 2000 वर्ग मीटर भूमि चाहिए। ऐसी भूमि पर नक्शा पास कराने के लिए विकास शुल्क में 50 और प्रभाव शुल्क में 25 प्रतिशत तक छूट मिलेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट की बैठक में यह फैसला हुआ। इसके लिए उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026 को मंजूरी दी गई। इससे शहरी क्षेत्रों में रियल स्टेट क्षेत्र में निर्माण कार्य बढ़ेंगे और रोजगार के द्वार भी खुलेंगे। एकल आवासीय या एकल भवन इस नीति के दायरे में नहीं आएंगे। लीज पर आवंटित भूमि जैसे नजूल भूमि, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट और अन्य शासकीय भूमि जिसके फ्री-होल्ड में परिवर्तन नहीं हुआ है, वे भी इसके दायरे में नहीं आएंगे।
तीन साल से बंद पड़े उद्योग और सक्षम प्राधिकारी द्वारा घोषित रुग्ण इकाइयों को तोड़कर बनाने की अनुमति दी जाएगी। नॉन कंफार्मिंग उद्योग, जिन्हें विस्तार की जरूरत होने या शहर के अंदर चालू रखने में व्यवहारिक कठिनाइयां होने से अन्य क्षेत्रों में पुनस्र्थापना की इच्छुक होने, शासकीय, निगमों की खाली, कारागार, बस टर्मिनल, डिपो (बस स्टाप को छोड़कर) तथा इसी प्रकार के अन्य उपयोग जो शहर के घने बसे भीड़ वाले क्षेत्रों में स्थित हो उसे तोड़कर बनाने की अनुमति दी जाएगी।
विकास प्राधिकरणों द्वारा पुनर्विकास योजना का काम स्वयं किया जाएगा। वे चाहेंगे तो पीपीपी, निजी बिल्डरों के माध्यम से तोड़ कर बनवा सकेंगे। हाउसिंग सोसायटी या रेजीडेंट वेलफेयर सोसायटी द्वारा भी इस योजना में काम कर सकेंगे। इनके द्वारा संबंधित विकास प्राधिकरणों को आवेदन देना होगा। इसके लिए दो तिहाई सदस्यों की सहमति जरूरी होगी। इस नीति में निर्माण कार्य तीन साल में पूरा करना होगा अधिकतम दो वर्ष का विस्तार दिया जाएगा। ईडब्ल्यूएस व एलआईजी के 10-10 फीसदी मकान बनाने पर शेल्टर फीस में छूट दी जाएगी।
भवन विकास उपविधि के अनुसार अनुमन्य बेसिक एफएआर के ऊपर एक प्रतिशत अतिरिक्त दिया जाएगा। किसी भी पुराने भवन को तोड़कर उसके स्थान पर नया बनाने के दौरान वहां रहने वालों को दूसरे स्थानों पर रहने की व्यवस्था की जाएगी या उसको किराए दिया जाएगा। मकानों का आवंटन उसी प्रकार से किया जाएगा, जो जैसे रह रहा था। ऐसा न होने पर लाटरी से मकानों या फ्लैटों का आवंटन किया जाएगा।
यूपी में औद्योगिक और कृषि भूमि पर नक्शा पास कराने के लिए देना होगा कम शुल्क
राज्य सरकार ने यूपी में उद्योगों का नक्शा पास कराने के लिए बाह्य विकास शुल्क की दरों में कमी कर दी है। कृषि व औद्योगिक भूमि पर नक्शा पास कराने के लिए एक समान शुल्क और आवासीय व व्यावसायिक भूमि की दरें-अलग-अलग की गई हैं। पहले नक्शा पास कराने के लिए सभी भू-उपयोग पर एक समान दरें थी।
कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास (विकास शुल्क का निर्धारण, उद्हण एवं संग्रहण) संशोधित नियमावली को मंजूरी दी गई। नई दरें नियमावली जारी होने की तिथि से प्रभावी होंगी। इससे जरूरी सुविधाओं जैसे महायोजना मार्ग, खुले स्थल, एसटीपी व अन्य जनसुविधाओं के लिए विकास प्राधिकरणों के पास विकास शुल्क के रूप में पैसा उपलब्ध रहेगा।
निकाय सीमा से बाहर कम दरें
पहले बाह्य विकास शुल्क की गणना में भू-उपयोग पर विचार नहीं किया जाता था। आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक व कृषि भू-उपयोग के लिए सामान दरें थीं। अब कृषि व औद्योगिक भूमि पर आवासीय और व्यावसायिक से कम बाह्य विकास शुल्क लगेगा। नगर निकाय सीमा के बाहर नक्शा पास करने की दरें कम कर दी गई हैं। पहले सीमा के अंदर और बाहर एक समान दरें थीं। इसी तरह बेस एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) की तुलना में अतिरिक्त क्रय किए गए एफएआर पर अधिक विकास शुल्क लिया जाएगा।
120 प्रतिशत तक देना होगा विकास शुल्क
अपार्टमेंट या ग्रुप हाउसिंग के लिए विकास शुल्क की दरें अलग-अलग की गई हैं। 100 आवास तक 100%, 100 से 125 तक 105%, 125 से 150 तक 110% बाह्य विकास शुल्क लगेगा। इससे अधिक यानी 150 से 175 तक 115% और 175 से 200 आवास या फ्लैट होने पर 120% विकास शुल्क लिया जाएगा। प्रत्येक अतिरिक्त 25 आवासीय इकाइयों के लिए 5% अधिक दरें की गई हैं।
विकास शुल्क की दरें क्या होंगी
औद्योगिक/वेयरहाउसिंग अनिर्मित निकाय सीमा में 2000 वर्ग मीटर तक 2708200 रुपये व निकाय सीमा से बाहर 1969600 रुपये, कृषि अनिर्मित 1000 वर्ग मीटर निकाय सीमा में 1624920 रुपये व सीमा से बाहर 1181760 रुपये और नव अधिसूचित क्षेत्र में अनिर्मित 1000 वर्ग मीटर निकाय सीमा में 1354100 व सीमा से बाहर 984800 रुपये विकास शुल्क लगेगा। आवासीय में प्लॉटेड निर्मित 100 वर्ग मीटर निकाय सीमा में 12310, अनिर्मित 100 वर्ग मीटर निकाय सीमा में 121869 व निकाय सीमा से बाहर 88632 रुपये लगेगा। 200 वर्ग मीटर निर्मित 49240 रुपये व अनिर्मित भूखंड के लिए 487476 व निकाय सीमा के बाहर भूखंडों का नक्शा पास कराने पर 354528 रुपये वर्ग मीटर शुल्क रखा गया है।
मेला, जादू शो व संगीत कार्यक्रम के विज्ञापन के लिए लेनी होगी अनुमति
राज्य सरकार ने प्रतिबंधित प्लास्टिक पर विज्ञापन होर्डिंग लगाने पर रोक लगा दी है। भवन या परिसर में विज्ञापन लगाने से पहले संरचरात्मक इंजीनियर से प्रमाणित करवाना होगा। मेला, जादू शो, संगीत समारोह जैसे अयोजनों का विज्ञापन लगाने के लिए अस्थाई लाइसेंस नगर निगमों से लेना होगा। कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश नगर निगम (आकाश चिह्न और विज्ञापनों का विनियमन) नियमावली 2026 को मंजूरी दी गई। इसके मुताबिक अब नगर निगमों द्वारा अधिकतम 12 साल के लिए विज्ञापन का लगाने का ठेका एजेंसियों को दिया जाएगा। शहरों में सार्वजनिक स्थानों पर विज्ञापन सीमित संख्या में लगाए जाएंगे। विज्ञापन का ठेका देने के लिए नगर निगमों में नगर आयुक्त की अध्यक्षता में एक तकनीकी समिति बनाई जाएगी।
नई नियमावली में नगर निगम क्षेत्रों में विज्ञापन एवं होर्डिंग की अनुमति, शुल्क निर्धारण और निगरानी की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है। अवैध, असुरक्षित और अनियमित होर्डिंग पर सख्त नियंत्रण किया जाएगा, जिससे आम जनता की सुरक्षा के साथ यातायात व्यवस्था भी सुचारु हो सके। नियमावली लागू होने से विज्ञापनों से होने वाली आय से नगर निगमों के राजस्व में वृद्धि होगी और लोगों पर अतिरिक्त टैक्स लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे शहरी विकास कार्यों को गति मिलेगी।
इसके साथ ही विज्ञापन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और डिजिटल माध्यमों व डिजिटल डिस्प्ले को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इससे संबंधित नगर निगम क्षेत्रों की सुंदरता में भी सुधार होगा। नई नीति को प्रदेश के वन ट्रिलियन डालर इकोनामी के लक्ष्य से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि विज्ञापन क्षेत्र में पारदर्शिता और निवेश बढ़ने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
पीसीएस जे भर्ती के लिए तीन साल का अनुभव हुआ अनिवार्य
राज्य सरकार ने पीसीएस-जे पदों पर भर्ती के लिए विधि व्यवसाय में तीन साल का अनुभव अनिवार्य कर दिया है। कैबिनेट ने इसके लिए उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा (सप्तम संशोधन) नियमावली 2026 को मंजूरी दी। यह संशोधन हाईकोर्ट की संस्तुति के आधार पर किया गया है। संशोधन के मुताबिक पीसीएस (न्यायिक) सेवा की सीधी भर्ती में अभ्यर्थी के लिए विज्ञापन की तिथि तक कम से कम तीन साल का विधि व्यवसाय/वकालत अनुभव (प्रैक्टिस) होना चाहिए। यह प्रावधान शैक्षिक योग्यता से संबंधित नियम 11 के अंतर्गत जोड़ा गया है।
पीसीएस-जे के पदों पर भर्ती के लिए पहले केवल विधि स्नातक (एलएलबी) होना पर्याप्त था। विधि स्नातक युवा सीधे परीक्षा में आवेदन करते थे। सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की परीक्षाओं में तीन वर्ष की प्रैक्टिस अनिवार्य किया था। इसे सभी हाईकोर्ट और राज्य सरकारों से अपने यहां लागू करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में राज्य सरकार ने यह संशोधन किया है।
इसके अलावा प्रशिक्षण तथा पदोन्नति से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। साथ ही प्रक्रिया को और स्पष्ट करने के लिए नए नियम भी जोड़े गए हैं। सरकार के अनुसार, इन संशोधनों से न्यायिक सेवा की भर्ती, प्रशिक्षण और पदोन्नति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और मजबूत होगी, जिसका सकारात्मक असर न्यायिक व्यवस्था की गुणवत्ता पर पड़ेगा।
वाराणसी में 266 करोड़ से बनेगी सीवर लाइन
प्रदेश कैबिनेट ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई बैठक में वाराणसी के 18 अत्यधिक प्रभावित वार्डों में सीवर लाइन के निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस पर 266.49 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कैबिनेट ने वाराणसी के दुर्गाकुण्ड, नरिया सरायनंदर, जोल्हापुर उत्तरी एवं भेलूपुर वार्ड में सीवर लाइन के निर्माण को मंजूरी दी है। इसके लिए भारत सरकार 63.93 करोड़ रुपये खर्च करेगी। वहीं राज्य सरकार को 171.35 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। वहीं निकाय द्वारा 20.45 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। सेंटेज के रूप में 10.74 करोड़ रुपये का खर्च राज्य सरकार को उठाना होगा।
वाराणसी के मोहनसराय उपाध्याय नगर चकिया मार्ग का होगा चौड़ीकरण
वाराणसी व चंदौली में मोहनसराय उपाध्याय नगर चकिया मार्ग के चार व छह लेन में चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण का रास्ता साफ हो गया। इस काम की पुनरीक्षित प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति संबंधी लोक निर्माण विभाग के प्रस्ताव को गुरुवार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। 11 किलोमीटर से अधिक लंबाई वाला यह मार्ग स्टेट हाइवे श्रेणी का है। जो एनएच-19 से निकलकर पड़ाव चौराहे से प्रारंभ होकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर होते हुए गोधना मोड़ एनएच-2 तक जाती है। यह मार्ग वाराणसी को सोनभद्र, मिर्जापुर, गाजीपुर, बलिया, प्रयागराज के साथ ही बिहार एवं पश्चिम बंगाल से जोड़ता है। इसकी लागत पहले 328 करोड़ से अधिक थी। मगर व्यय वित्त समिति ने 325 करोड़ 93 लाख 8 हजार रुपये की स्वीकृति दी। परियोजना में शामिल की गई गैरजरूरी व मानकों से इतर कई चीजों को हटा दिया गया है।
एआरटीओ के 36 नए पदों का नाम बदला
परिवहन विभाग में कुछ समय पहले गठित सहायक संभागीय परिवहन (साधारण वेतनमान) के 36 पदों का पदनाम बदल दिया गया है। इसके लिए नियमावली में संशोधन का प्रस्ताव गुरुवार को कैबिनेट में पास हो गया। अब इन्हें सहायक संभागीय परिवहन सड़क सुरक्षा के नाम से जाना जाएगा।
इसी तरह उप परिवहन आयुक्त के तीन नए सृजित पदों को उप परिवहन आयुक्त परिक्षेत्र नाम से जाना जाएगा। गोरखपुर, बुंदेलखंड (झांसी) और अयोध्या में इन तीनों पदों पर तैनाती की जा चुकी है। इन अफसरों के साथ ही एक-एक पद प्रधान सहायक और क्लर्क का भी स़ृजित किया गया था। अफसरों के मुताबिक जल्दी ही सभी 75 जिलों में एआरटी सड़क सुरक्षा पद पर तैनाती होगी। वर्तमान में 36 जिलों में एआरटीओ सड़क सुरक्षा पद पर भी तैनाती हो चुकी है।
292 करोड़ से बनेगा देवरिया कसया मार्ग
जनपद देवरिया के देवरिया कसया मार्ग के चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण का काम जल्द शुरू हो सकेगा। इस कार्य की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति संबंधी लोक निर्माण विभाग के प्रस्ताव को गुरुवार को योगी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। करीब 31.500 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को फोर लेन में चौड़ीकरण व सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। इसके निर्माण पर 292 करोड़ 6 लाख 66 हजार रुपये लागत आएगी। इस मार्ग के निर्माण से स्थानीय निवासियों के साथ ही देश-विदेश से देवरिया शहर व भगवान बुद्ध की महापरिर्वाण स्थली कुशीनगर, अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा कुशीनगर व नेपाल आने-जाने में सुविधा होगी।
गोरखपुर के 17 वार्डों के लिए 721 करोड़ से बनेगी सीवर लाइन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट की बैठक में गोरखपुर के 17 वार्डों के लिए सीवरेज योजना को मंजूरी दी गई है। इस पर 721.40 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
अटल नवीनीकरण और शहरी रूपांतरण मिशन-2.0 के तहत गोरखपुर के नगर निगम जोन-ए-3 में सीवरेज परियोजना को मंजूरी दी गई है। परियोजना की लागत 721 करोड़ 40 लाख 41 हजार रुपये है। इसमें से 231.34 करोड़ रुपये केंद्र सरकार द्वारा खर्च किया जाएगा जबकि 435 करोड़ रुपये राज्य सरकार खर्च करेगी। साथ ही इसमें से 27.28 करोड़ रुपये सेंटेज भी राज्य सरकार को खर्च करना होगा।
इस परियोजना से गोरखपुर के 17 वार्डों के 43604 घरों से निकलने वाले सीवेज का ट्रीटमें किया जाएगा। इससे लगभग एक लाख 95 हजार 947 लोग लाभांवित होंगे।
बरेली-मुरादाबाद में विज्ञान पार्क व नक्षत्रशाला बनाने को कार्यदायी संस्था नामित
बरेली व मुरादाबाद में विज्ञान पार्क और नक्षत्रशाला का निर्माण किए जाने के लिए कार्यदायी संस्था नामित कर दी गई है। कैबिनेट ने कार्यदायी संस्था नामित किए जाने पर अपनी मुहर लगा दी है। बरेली में बरेली विकास प्राधिकरण और मुरादाबाद में मुरादाबाद विकास प्राधिकरण को यह जिम्मेदारी दी गई है।
बरेली में विज्ञान पार्क व नक्षत्रशाला का निर्माण रामगंगा नगर आवासीय योजना के सेक्टर-8 में उपलब्ध 5.33 एकड़ भूमि में से 3000 वर्ग मीटर भूमि पर किया जाएगा। बरेली विकास प्राधिकरण के पास भूमि की उपलब्धता एवं निर्माण परियोजनाओं को लागू किए जाने के लिए पर्याप्त तकनीकी स्टाफ व अन्य आवश्यक संसाधन होने के दृष्टिगत उसे कार्यदायी संस्था नामित किया गया है।
बरेली मंडल के जिलों के विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रूचि बढ़ेगी। वहीं मुरादाबाद में विज्ञान पार्क एवं नक्षत्रशाला की स्थापना के लिए मुरादाबाद विकास प्राधिकरण को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। दिल्ली-बरेली मार्ग पर विकसित की जाने वाली गोविन्दपुरम आवासीय योजना के तहत 4.6 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित सेंट्रल पार्क में विज्ञान पार्क व नक्षत्रशाला भी बनाई जाएगी। यह दोनों विज्ञान पार्क व नक्षत्रशालाएं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन संचालित स्वायत्तशासी संस्था विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के अधीन होंगी।
परिवहन विभाग में सहायक मोटरयान निरीक्षक के 351 पदों पर होगी भर्ती
परिवहन विभाग में अब सहायक मोटरयान निरीक्षक के 351 पदों पर भर्ती की जाएगी। इन पदों को सृजित करने की मंजूरी गुरुवार को कैबिनेट में दे दी गई। उत्तर प्रदेश परिवहन (अधीनस्थ) प्राविधिक सेवा नियमावली (षष्टम संशोधन) नियमावली, 2026 के तहत इन पदों पर चयन होगा।
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि इन नए पदों पर तैनाती के लिए चयन प्रक्रिया जल्दी ही शुरू की जाएगी। इन पदों से सड़क हादसों में कमी आएगी और सड़क सुरक्षा के अन्य बिन्दुओं पर तहसील व ग्राम सभा स्तर पर काम हो सकेगा। अपर मुख्य सचिव परिवहन अर्चना अग्रवाल के मुताबिक इन 351 पदों के सृजित होने से वेतन व अन्य भत्तों के रूप में परिवहन विभाग पर हर वर्ष 25 करोड़ से अधिक व्यय भार आएगा। इस प्रस्ताव के पास होने से सरकारी सेवाओं में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे
यूपी के 4000 बंद ईंट भट्ठे फिर खुलेंगे
यूपी में करीब चार हजार अवैध ईंट भट्ठे अब वैध हो जाएंगे। इससे न सिर्फ प्रदेश में लाल ईंटों की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि इनकी कीमत पर भी असर पड़ेगा। इसके साथ ही हजारों लोगों को रोजगार भी मिल सकेगा। यह वे भट्ठे हैं जो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनापत्ति न लेने के कारण अवैध हो गए थे। योगी सरकार ने इसके लिए नियमावली में संशोधन किया है। अब वे जिला पंचायत, खनन विभाग, वाणिज्य कर या किसी अन्य विभाग की 2012 से पहले की अनापत्ति दिखाने पर वैध माने जाएंगे।
यूपी के 2012 से पहले स्थापित ईंट भट्ठा संचालकों के लिए अच्छी खबर है। इनमें से तमाम बंद पड़े हैं और कुछ अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। अब ऐसे हजारों भट्ठे नियमानुसार संचालित हो सकेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश ईंट भट्ठा (स्थापना हेतु स्थल मापदंड) (प्रथम संशोधन) नियमावली-2026 को मंजूरी मिल गई।
दरअसल, प्रदेश में वर्ष 2012 में पहली बार भट्ठों के संबंध में पर्यावरण विभाग की नियमावली आयी, जिसमें भट्ठों की स्थापना के संबंध में स्थल के मानक तय किये गये। केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2022 में ईंट भट्ठों के संबंध में नियमावली लागू की गई। नये संशोधन के बाद वर्ष 2022 की नियमावली के अनुसार भट्ठे से आबादी की दूरी घट जाएगी। यह एक किलोमीटर के बजाय 800 मीटर होगी, जिससे और नये भट्ठे स्थापित हो सकेंगे और ईंट उत्पादन में तेजी आएगी। वहीं, भट्ठों के बीच दूरी 2022 की केंद्रीय नियमावली के अनुसार 800 मीटर के बजाय 1 किलोमीटर की जाएगी।
40 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष रवींद्र प्रताप सिंह ने बताया कि विशेष रूप से वर्ष 2012 से पहले स्थापित लगभग 4,000 ईंट भट्ठों को जो उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्राप्त नहीं कर पाए थे, अब उन्हें वैध माना जा सकेगा। इसके लिए भट्ठा संचालकों को जिला पंचायत, वाणिज्य कर विभाग, खनन विभाग या अन्य प्राधिकृत विभाग से यह प्रमाणित करना होगा कि उनका भट्ठा 2012 से पहले स्थापित है। इस संशोधन से लगभग 30 से 40 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। साथ ही निर्माण कार्यों में सस्ती लाल ईंटों की उपलब्धता बढ़ने से आम जनमानस को लाभ होगा।
बहराइच के आपदा प्रभावित 136 परिवारों का होगा सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास
बहराइच जिले के राजस्व ग्राम भरथापुर के आपदा प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बसाने के लिए योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा की गई घोषणा के मद्देनज़र गुरुवार को कैबिनेट ने ग्राम को विस्थापित कर 136 परिवारों के पुनर्वास की योजना को मंजूरी दे दी है। पुनर्वास के बाद बसाई जाने वाली नई बस्ती का नामकरण मुख्यमंत्री की अनुमति से किया जाएगा।
यह गांव एक ओर गेरुआ नदी और दूसरी ओर कौड़ियाल नदी से घिरा हुआ है, जबकि उत्तर दिशा में वन्य जीव क्षेत्र और नेपाल सीमा है। गांव तक सड़क मार्ग न होने के कारण लोगों को केवल नाव के सहारे आवागमन करना पड़ता है, जिससे हर समय जान का खतरा बना रहता है।
नाव दुर्घटना में गई थी 9 व्यक्तियों की जान
29 अक्तूबर 2025 को कौड़ियाल नदी में नाव पलटने से 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2 नवंबर 2025 को गांव का हवाई सर्वेक्षण किया और पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद उन्हें सुरक्षित स्थान पर बसाने की घोषणा की थी। अब कैबिनेट ने उस घोषणा पर औपचारिक मुहर लगा दी है।
सेमरहना गांव में मिलेगा नया ठिकाना
आपदा प्रभावित परिवारों को ग्राम पंचायत सेमरहना, तहसील मिहींपुरवा (मोतीपुर) में पुनर्वासित किया जाएगा। इसके लिए करीब 1.70 हेक्टेयर भूमि राजस्व विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित की जाएगी। भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया जिलाधिकारी बहराइच द्वारा पूरी की जाएगी।
हर परिवार को आवासीय प्लॉट और पक्का घर
पुनर्वास के तहत विस्थापित 136 परिवारों को अलग-अलग प्लॉट आवंटित किए जाएंगे। इन परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना / प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिल सके। नई बसाई जा रही बस्ती में सड़क, नाली, सीसी रोड, इंटरलॉकिंग टाइल्स, ग्रीन बेल्ट, एलईडी स्ट्रीट लाइट और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन कार्यों को लोक निर्माण विभाग, ग्राम्य विकास विभाग और जल जीवन मिशन के माध्यम से कराया जाएगा। प्रत्येक परिवार को भूमि आवंटन की जिम्मेदारी उपजिलाधिकारी मिहींपुरवा (मोतीपुर) को दी गई है। सभी अवसंरचनात्मक सुविधाएं विकसित होने के बाद यह बस्ती ग्राम पंचायत को हस्तांतरित कर दी जाएगी।
वन विभाग के पैकेज के अतिरिक्त मिलेगा लाभ
जो परिवार पहले से अपने पुराने स्थान को खाली कर वन विभाग या अन्य विभागों को भूमि सौंप चुके हैं, उन्हें वन विभाग से मिलने वाले पैकेज के अतिरिक्त यह पुनर्वास सुविधा भी प्रदान की जाएगी।
गंगा किसान सहकारी चीनी मिल का होगा आधुनिकीकरण, पेराई क्षमता बढ़ेगी
कैबिनेट ने मुजफ्फरनगर के मोरना में गंगा किसान सहकारी चीनी मिल की पेराई क्षमता बढ़ाने और नई तकनीक से मिल का आधुनिकीकरण किए जाने संबंधी प्रस्ताव को हरी झंडी प्रदान कर दी है। इससे मिल की जो वर्तमान क्षमता 2500 टीसीडी है, वह बढ़कर पहले 3500 टीसीडी होगी और उसके बाद 5000 टीसीडी तक की जाएगी।
दरअसल, गंगा किसान सहकारी चीनी मिल की जर्जर प्लांट व पुरानी तकनीक की वजह से किसानों को बहुत लाभ नहीं हो रहा था। कैबिनेट के निर्णय के बाद अब उसमें नई आधुनिक मशीनरी लगाई जाएगी, जिससे मिल में न सिर्फ उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि इसके संचालन में दक्षता भी आएगी। सबसे बड़ा लाभ सीधे गन्ना उगाने वाले किसानों को मिलेगा। नई तकनीक के कारण पेराई क्षमता बढ़ने से गन्ना किसानों की आय भी दोगुनी किए जाने और समय से गन्ना मूल्य भुगतान सुनिश्चित किए जाने में सहायता मिलेगी।
इस पहल से किसानों की आय बढ़ेगी और वे आर्थिक रूप से मजबूत होंगे। यह कदम गन्ना किसानों को उनका हक दिलाने और सहकारी मिल के जरिए कृषि को मजबूत करने की दिशा में अहम है। नई आधुनिक मिल की स्थापना से क्षेत्र के किसानों का भरोसा बढ़ेगा और उत्पादन के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित 99 हिंदू बंगाली परिवारों का होगा स्थायी पुनर्वासन
प्रदेश सरकार ने पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) से विस्थापित होकर उत्तर प्रदेश में रह रहे हिंदू बंगाली परिवारों के पुनर्वासन को लेकर बड़ा एवं मानवीय फैसला लिया है। यह मामला जनपद मेरठ की तहसील मवाना के ग्राम नंगला गोसाई का है, जहां पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित 99 हिंदू बंगाली परिवार झील की भूमि पर लंबे समय से अवैध रूप से निवास कर रहे हैं। कैबिनेट के फैसले के अनुसार इन सभी 99 परिवारों का पुनर्वासन कानपुर देहात की रसूलाबाद तहसील में किया जाएगा। ग्राम भैंसाया में पुनर्वास विभाग के नाम दर्ज 11.1375 हेक्टेयर (27.5097 एकड़) भूमि पर 50 परिवारों को तथा ग्राम ताजपुर तरसौली में पुनर्वास विभाग के नाम अंकित 10.530 हेक्टेयर (26.009 एकड़) भूमि पर शेष 49 परिवारों को बसाया जाएगा।
प्रत्येक परिवार को 0.50 एकड़ भूमि आवंटित की जाएगी। यह भूमि प्रीमियम अथवा लीज रेंट पर 30 वर्ष के पट्टे पर दी जाएगी, जिसे आगे 30-30 वर्ष के लिए नवीनीकृत किया जा सकेगा।
इस प्रकार पट्टे की अधिकतम अवधि 90 वर्ष होगी। यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ विस्थापित परिवारों के सम्मानजनक और सुरक्षित पुनर्वासन को सुनिश्चित करेगा। लंबे समय से अस्थायी हालात में रह रहे इन परिवारों को अब स्थायी ठिकाना और भविष्य की सुरक्षा मिल सकेगी।
पुरानी रजिस्ट्रियों के डिजिटाइजेशन के लिए छह माह का समय बढ़ा
उप निबंधक कार्यालयों में पंजीकृत पुरानी रजिस्ट्रिों का डिजिटाइजेशन छह माह में पूरा कराया जाएगा। कैबिनेट की बैठक में वर्ष 2002 से 2017 तक पंजीकृत विलेखों की स्कैनिंग व इंडेक्सिंग की परियोजना अवधि को अगले छह माह तक बढ़ाने को मंजूरी दी गई। यह परियोजना पहले ही अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और इसके लिए सरकार ने किसी अतिरिक्त बजट की जरूरत नहीं बताई है।
इस योजना को पहले वर्ष 2022 में 95 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई थी। बाद में व्यावहारिक कारणों से इसमें देरी होने पर जुलाई 2024 में परियोजना की अवधि बढ़ाते हुए कुल लागत 123.62 करोड़ रुपये कर दी गई। वित्तीय वर्ष 2024-25 के अंत तक इस योजना पर 109.05 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं और शेष काम उपलब्ध बजट में ही पूरा किया जाएगा।
99% से अधिक इंडेक्सिंग, 98% स्कैनिंग पूरी
प्रदेशभर में इस परियोजना के तहत इंडेक्सिंग का 99.11 प्रतिशत और स्कैनिंग का 98.37 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। अधिकांश जिलों में शत-प्रतिशत काम हो चुका है। एटा, वाराणसी, मुरादाबाद, मैनपुरी, लखनऊ, अलीगढ़, हाथरस, आगरा, सहारनपुर व प्रयागराज में कुछ काम बचे है, जिसे अगले छह माह में पूरा किया जाएगा।
दो स्तर पर हो रही जांच व सत्यापन
डिजिटाइजेशन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए हर दस्तावेज का दो स्तर पर सत्यापन किया जा रहा है। पहले स्तर पर सहायक महानिरीक्षक निबंधन द्वारा जांच की जा रही है, जबकि दूसरे स्तर पर मंडलों और वृत्तों के उप महानिरीक्षक निबंधन द्वारा पुनः परीक्षण किया जा रहा है। यह प्रक्रिया शत-प्रतिशत सत्यापन तक जारी रहेगी। पुराने दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन से कूटरचना व फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और जमीन-जायदाद से जुड़े रिकॉर्ड पूरी तरह सुरक्षित हो सकेंगे।




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