बीटेक-एमबीए की डिग्री, सिंगापुर में नौकरी के बाद साइबर ठगी, शौक पूरा करने को फ्राडगिरी
कानपुर पुलिस ने दो ऐसे साइबर ठगों को पकड़ा है जो बीटेक और एमबीए की डिग्री ले चुके हैं। सिंगापुर में नौकरी कर चुके हैं। एक तो क्रिकेट का खिलाड़ी भी है। केवल महंगे शौक पूरे करने के लिए दोनों साइबर ठगी कर रहे थे।

कानपुर पुलिस ने साइबर फ्राड कर लोगों को ठगने के आरोप में दो पेशेवर तकनीकी विशेषज्ञों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए साइबर ठग में एक बागपत निवासी अनुज तोमर एमबीए पास है और दूसरा विवेक शर्मा बीटेक डिग्री हासिल कर चुका है और क्रिकेट खिलाड़ी भी है। ठगी के पैसे से विवेक ने सवा लाख का बल्ला भी खरीदा है। एक कीमती कार भी खरीदी। दोनों पहले सिंगापुर में नौकरी करते थे। कोविड के नौकरी नौकरू छूटी तो अपने ज्ञान का इस्तेमाल साइबरफर्जीवाड़े में करने लगे। अनुज को चंडीगढ़ और विवेक को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस उपायुक्त (अपराध) अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि उनके पास से तीन लैपटॉप, 14 मोबाइल फोन, एक कीमती कार, क्रिकेट का महंगा बल्ला के साथ किट और कई लग्जरी वस्तुएं जब्त की हैं। उन्होंने बताया कि पकड़े गए आरोपी क्रेडिट कार्ड की खर्च की सीमा बढ़ाने का झांसा देकर लोगों को ठगते थे। उनकी गिरफ्तारी गोविंद नगर निवासी सुनील कुमार खन्ना द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर की गयी है।
पुलिस उपायुक्त ने बताया कि इसी साल जून में बैंक अधिकारी बनकर किसी व्यक्ति ने खन्ना को क्रेडिट कार्ड की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव देकर उनसे एक लाख 35 हजार रुपये की ठगी की थी। श्रीवास्तव ने कहा कि पीड़ित से एक फर्जी लिंक के जरिए एक फॉर्म भरवाया गया, जिससे आरोपी ने उनके खाते से एक लाख 35 हजार 669 रुपये निकाल लिये। उन्होंने बताया कि साइबर अपराध टीम ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी के तहत मामला दर्ज करने के बाद तकनीकी निगरानी, बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल फुटप्रिंट का इस्तेमाल करके ठगों का पता लगाया।
पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपी पहले सिंगापुर स्थित एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करते थे लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान उनकी नौकरी छूट जाने के बाद वे भारत लौट आये थे। यहां वे एक साइबर अपराधी के संपर्क में आए जिसने उन्हें ऑनलाइन धोखाधड़ी के तरीके सिखाये।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि तोमर और शर्मा ने कथित तौर पर दिल्ली, पंजाब और उत्तर प्रदेश में फर्जी क्रेडिट कार्ड अपग्रेड योजनाओं के जरिए लोगों को निशाना बनाया। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर इनसे जुड़ी कम से कम 35 शिकायतें मिली हैं, जिनमें लगभग 60 लाख रुपये की धोखाधड़ी की बात सामने आई है। पुलिस उपायुक्त श्रीवास्तव के अनुसार, विवेक शर्मा ने पूछताछ के दौरान बताया कि उसने इंडियन प्रीमियर क्रिकेट लीग (आईपीएल) के ट्रायल की तैयारी के लिये ठगी की रकम से 1.25 लाख रुपये का बल्ला और अन्य उपकरण खरीदे थे। श्रीवास्तव ने कहा कि आरोपियों ने ठगी के पैसों से एक महंगी कार भी खरीदी थी।




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