महिला आरक्षण के मुद्दे पर जनता को गुमराह कर रही है भाजपा, नेता विपक्ष माता प्रसाद पांडे का तीखा हमला
सपा नेता माता प्रसाद पांडे ने आरोप लगाया कि केंद्रीय स्तर पर विधायी एजेंडा विफल होने के बाद भाजपा जनता और महिलाओं को भड़काने का प्रयास कर रही है। पांडे ने कहा कि इस तरह के प्रस्ताव के लिए संविधान या विधानसभा की नियमावली में कोई प्रावधान नहीं है।

UP Vidhansabha: यूपी विधानसभा में विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडे ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल महिला आरक्षण के मुद्दे पर संसद में कथित विधायी विफलता के बाद जनता को गुमराह करने के लिए राज्य विधानसभा में असंवैधानिक निंदा प्रस्ताव लाने की कोशिश कर रहा है। पांडे ने कहा कि समाजवादी पार्टी (सपा) विधानमंडल दल की बैठक में भाजपा के प्रस्तावित कदम के विरोध में अति निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। उन्होंने बताया कि 30 अप्रैल को बुलाए गए राज्य विधानसभा के विशेष सत्र में भाजपा निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी में है।
सपा नेता ने आरोप लगाया कि केंद्रीय स्तर पर विधायी एजेंडा विफल होने के बाद भाजपा जनता और महिलाओं को भड़काने का प्रयास कर रही है। पांडे ने कहा कि इस तरह के प्रस्ताव के लिए संविधान या विधानसभा की नियमावली में कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा, हम उस प्रस्ताव की कड़ी निंदा करते हैं जिसे वे लाना चाहते हैं। जब उनका विधेयक संसद में पारित नहीं हो सका, तो उन्होंने लोगों को गुमराह करने के लिए यह रणनीति अपनाई। पांडे ने कहा कि नियम व्यक्तियों के पक्ष या विपक्ष में प्रशंसा अथवा निंदा प्रस्ताव की अनुमति देते हैं, लेकिन उनका उपयोग किसी विधायी प्रक्रिया या विशिष्ट विधेयक को लक्षित करने के लिए नहीं किया जा सकता।
सपा की बैठक में अति निंदा प्रस्ताव पारित
सपा के वरिष्ठ नेता ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण के नाम पर भाजपा का रुख वास्तविक सशक्तीकरण के बजाय चुनावी इंजीनियरिंग का प्रयास है। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल का उद्देश्य निष्पक्ष प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि मनमाने परिसीमन के जरिए राजनीतिक लाभ हासिल करना है। पांडे ने बताया कि उनकी पार्टी ने ध्वनिमत से एक अति निंदा प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें भाजपा के प्रस्तावित कदम को कानूनी और प्रक्रियात्मक रूप से निराधार बताया गया है।
महिला आरक्षण पर बुलाया गया विशेष सत्र
माता प्रसाद पांडे ने भाजपा के दावों को झूठ का प्रसार करार देते हुए कहा कि महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक की विफलता ने सरकार के वास्तविक इरादों को उजागर कर दिया है। महिला आरक्षण पर केंद्रित उत्तर प्रदेश विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र बृहस्पतिवार को बुलाया गया है। विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 18वीं विधानसभा के 2026 के दूसरे सत्र को 30 अप्रैल को सुबह 11 बजे आहूत किया है। विधानसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, सत्र में महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) पर विशेष चर्चा होगी, जो 17 अप्रैल को लोकसभा में पारित नहीं हो सका।
विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाना चाहती है भाजपा
सपा का आरोप है कि भाजपा इस दौरान विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाना चाहती है। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, जिसमें 2029 तक आरक्षण लागू करने का प्रावधान प्रस्तावित था, आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका। वहीं, भाजपा ने दावा किया है कि वह विधानसभा में विपक्षी दलों के रुख को बेनकाब करेगी। इस बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले सप्ताह उनके आधिकारिक आवास से विधान भवन तक एक विरोध मार्च भी निकाला गया था। समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि यदि भाजपा चाहती, तो महिला आरक्षण को अगले चुनाव से ही लागू किया जा सकता था, क्योंकि इसके लिए आवश्यक प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी थी।




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