पिछड़ों-दलितों के केस पेंडिंग, UGC पर…, सांसद चंद्रशेखर भड़के, आज रणनीति बनाएंगे
सांसद चंद्रशेखर ने कहा कि जिस सुप्रीम कोर्ट की जिम्मेदारी है संविधान की व्याख्या करने और न्याय सुनिश्चित करने की, वहां कमजोर वर्गों के जो मामले जाते हैं वो पेंडिंग पड़े रहते हैं या उन पे नेगेटिव ऑर्डर आते हैं।

यूपी की नगीना सीट से सांसद और आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद यूजीसी नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। चंद्रशेखर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में पिछड़ों-दलितों के कितने मामले पेंडिंग पड़े हैं। 69000 शिक्षक भर्ती में 20,000 पदों पर घोटाला हुआ था। एक साल से पेंडिंग पड़ा हुआ है। मध्य प्रदेश का 27% पिछड़े वर्ग को आरक्षण मिले वह भी पेंडिंग पड़ा हुआ है। लेकिन यहां कल केस दाखिल हुआ और आज सुनवाई हुई और आदेश भी हो गया। चंद्रशेखर ने इसे लेकर आज बैठक भी बुलाई है। कहा कि हम चुप नहीं बैठेंगे। इसे लेकर आगे के आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। यूजीसी की नई नियमावली आने के बाद राजनेताओं में चंद्रशेखर ही खुलकर इसके पक्ष में बोल रहे थे
टीवी चैनलों से बातचीत में चंद्रशेखर ने कहा कि जिस सुप्रीम कोर्ट की जिम्मेदारी है संविधान की व्याख्या करने और न्याय सुनिश्चित करने की, वहां कमजोर वर्गों के जो मामले जाते हैं वो पेंडिंग पड़े रहते हैं या उन पे नेगेटिव ऑर्डर आते हैं। दूसरी तरफ इस तरह का मामला जाता है, जहां अभी तक कोई मामला ही नहीं आया है, उस पर आदेश दे दिया जाता है। जबकि यूजीसी गाइडलाइन के बाद कोई एक मामला किसी के खिलाफ नहीं दर्ज हुआ है। अभी तो एक कमेटी ही नहीं बनी है।
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि एक अधिवक्ता हूं और माननीय सर्वोच्च न्यायपालिका का सम्मान करता हूं। यह फैसला सरकार के कमजोर पक्ष की वजह से हुआ है। अगर सरकार मजबूती से अपना पक्ष रखती और सरकार के कथनी और करने में फर्क नहीं होता तो फिर वहां स्टे नहीं होता। अगर हम फैक्ट रख पाते कि एससी-एसटी और ओबीसी छात्रों के साथ भेदभाव में 118% की वृद्धि हुई है। यह बताने का प्रयास करते कि आप ही के द्वारा कहा गया था रोहित वेमूला, डॉक्टर पायल के केस के बाद सख्त कानून बनाने की बात कही गई थी। चंद्रशेखर ने कहा कि अभी तो गाइडलाइन ही बनी है।
कहा कि कोई कानून ऐसा नहीं जिसका दुरुपयोग नहीं हो सकता। जब उसका प्रयोग होगा तो उसका दुरुपयोग भी होगा। अभी तक तो इस मामले में कुछ हुआ ही नहीं था, फिर किस आधार पर स्टे हुआ। कहा ऐसा लगता है कि इस आदेश से जातीय भेदभाव को लीगलाइज कर दिया गया। कब तक इस देश में पायल तड़वी या रोहित वेमूला, डेल्टा मेघवाल जैसे हमारे बच्चे मरते रहेंगे। इसका जवाब सरकार को देना पड़ेगा।
सरकार पर मिलीभगत का आरोप
चंद्रशेखर आजाद ने आरोप लगाया कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से नहीं रखा, जिसकी वजह से इन नियमों पर रोक लगी है। उन्होंने कहा कि सरकार दोनों पक्षों (SC/ST/OBC और सामान्य वर्ग) को खुश रखना चाहती थी। पहले सरकार ने आरक्षण और भेदभाव रोकने के लिए नियम बनाए, लेकिन जब उनकी ही पार्टी के भीतर से विरोध शुरू हुआ, तो उन्होंने कोर्ट में पैरवी ढीली कर दी ताकि कोर्ट खुद ही रोक लगा दे।
'जाति खत्म क्यों नहीं करते?'
सांसद ने जातिविहीन समाज बनाने पर जोर देते हुए कहा कि अगर जाति के नाम पर भेदभाव और विवाद हो रहे हैं, तो सरकार को जातियां ही खत्म कर देनी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि सुप्रीम कोर्ट के पास पावर है कि वह सरकार को निर्देश दे कि जातिविहीन समाज बनाया जाए, फिर सरकार इस पर कदम क्यों नहीं उठाती?
छात्रों पर 'मानसिक प्रताड़ना' के आरोपों पर आपत्ति
चंद्रशेखर ने उन दलीलों का विरोध किया जिनमें कहा जा रहा है कि SC/ST/OBC वर्ग के छात्र उच्च शिक्षण संस्थानों में केवल दूसरों पर आरोप लगाने या बदला लेने के लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि क्या आप भेदभाव का वैधीकरण (Legalization) करना चाहते हैं? उन्होंने तर्क दिया कि किसी कानून का दुरुपयोग होने की आशंका के कारण उस कानून को न बनाना गलत है।
कानून के क्रियान्वयन पर सवाल
उन्होंने कहा कि देश में कानून तो बहुत बन जाते हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन (Implementation) नहीं हो पाता। उन्होंने आर्म्स एक्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि लाइसेंस सुरक्षा के लिए मिलता है, हत्या के लिए नहीं; उसी तरह भेदभाव रोकने वाले नियम सुरक्षा के लिए हैं, अपराध के लिए नहीं।




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