सूर्य की स्वर्णिम किरणों ने किया रामलला का दिव्य तिलक, जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजा मंदिर परिसर
Ayodhya News - अयोध्या में रामनवमी के अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। दोपहर 12 बजे रामलला का प्राकट्य हुआ, जब सूर्य की किरणों ने उनके मस्तक पर दिव्य तिलक अंकित किया। भक्तों ने घंटों कतार में खड़े रहकर दर्शन किए। रामलला को नए डिज़ाइनर परिधान और स्वर्णाभूषण अर्पित किए गए, जिससे माहौल भक्ति और श्रद्धा से भर गया।
अयोध्या, संवाददाता। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव रामनवमी पर अयोध्या ने एक बार फिर आस्था, श्रद्धा और दिव्यता का अविस्मरणीय दृश्य प्रस्तुत किया। मध्याह्न ठीक 12 बजे, जब सम्पूर्ण सृष्टि मानो उस पावन क्षण की प्रतीक्षा में थम सी गई, अखिल ब्रह्माण्ड नायक के अवतरण की भावना के अनुरूप रामलला का प्राकट्य हुआ और उसी क्षण सूर्य की स्वर्णिम किरणों ने उनके मस्तक पर दिव्य सूर्य तिलक अंकित कर दिया। यह अलौकिक दृश्य उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर गया। सूर्य तिलक की यह अद्भुत व्यवस्था परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय का अनूठा उदाहरण है। विशेष तकनीकी संयोजन के माध्यम से सूर्य की किरणों को इस प्रकार निर्देशित किया गया कि ठीक दोपहर के समय वे भगवान राम के मस्तक पर तिलक के रूप में प्रकट हों।
जैसे ही यह पावन क्षण आया, मंदिर परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।सुबह से ही राम मंदिर में देश-विदेश से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी थी। अपने आराध्य की एक झलक पाने के लिए भक्त घंटों कतारों में खड़े रहे। मंदिर प्रशासन ने प्रातः पांच बजे से ही दर्शन-पूजन की सुव्यवस्थित व्यवस्था की थी, जिससे अधिकाधिक श्रद्धालु इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बन सकें। पूर्वाह्न लगभग साढ़े दस बजे से भगवान श्रीराम के अभिषेक का सजीव प्रसारण विभिन्न माध्यमों से आरंभ हुआ, जिसे देशभर के श्रद्धालुओं ने भावपूर्वक देखा। वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य बालक राम के श्रीविग्रह का पंचामृत से अभिषेक किया गया, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण कर दिया।इस विशेष अवसर पर रामलला को नवीन डिजाइनर परिधान धारण कराए गए, जिनकी भव्यता और सौम्यता श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर रही थी। साथ ही उनके लिए विशेष स्वर्णाभूषण भी अर्पित किए गए, जो मुंबई के एक श्रद्धालु द्वारा भेंट स्वरूप भेजे गए थे। इसी श्रद्धालु द्वारा राम मंदिर के शिखर को भी स्वर्णमंडित कराया गया है। मध्याह्न के उस पावन क्षण में जब महाआरती संपन्न हुई, तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो संपूर्ण अयोध्या एक साथ प्रभु श्रीराम के चरणों में नतमस्तक हो गई हो। भक्ति और भावनाओं के इस पावन समागम ने हर हृदय को आंदोलित कर दिया।
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