अयोध्या राम मंदिर का परिसर और बड़ा होगा, खरीदी जाएगी बाहरी दीवार के पास की जमीन, क्यों फैसला?
अयोध्या में राम मंदिर का परिसर और बड़ा होगा। करीब साढ़े तीन किलोमीटर लंबी बाहरी दीवार के पास की और जमीन खरीदी जाएगी। अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरणों से लैस बाउंड्री के टेण्डर के पहले सभी सुरक्षा एजेंसियों के विशेषज्ञों की से सलाह के बाद यह फैसला दीवार को एक सीध में करने के लिए होने जा रहा है।

अयोध्या में राम मंदिर परिसर और बड़ा होगा। बाह्य सुरक्षा दीवार के पास की और जमीन खरीदने का फैसला लिया गया है। ऐसा दीवार को एक सीध में बनाने के लिए किया जा रहा है। अत्याधुनिक उपकरणों से लैस दीवार की जो डिजाइन बनाई गई थी, वह जिग-जैग की तरह थी। यही कारण है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अतिरिक्त जमीन क्रय करेगी। यद्यपि कि तीर्थ क्षेत्र ने पहले भी कई प्राचीन भवनों व उससे जमीनों को कहीं विनिमय तो कहीं रजिस्टर्ड बैनामे के आधार पर ली है। इसके कारण श्रीराम जन्मभूमि परिसर 70 एकड़ से बढ़कर 108 एकड़ से अधिक हो चुका है। फिर भी करीब चार किमी लंबी बाउंड्री के लिए कई स्थानों पर जमीन खरीदने की आवश्यकता है।
भवन-निर्माण समिति चेयरमैन नृपेन्द्र मिश्र ने इसकी पुष्टि भी कर दी है। तीर्थ क्षेत्र ने परकोटे के निर्माण के अवरोध को दूर करने के लिए राम मंदिर के उत्तर-पूर्व में पहले फकीरे राम मंदिर, कौशल्या भवन, रंगनाथ जी का मंदिर, कैकेई भवन, श्रीराम निवास व आनंद भवन के अलावा अन्य भवनों को विनिमय के आधार पर हस्तगत कर लिया।
इसी तरह से राम मंदिर के पश्चिम में नजूल भूमि को भी प्रदेश सरकार के माध्यम से प्राप्त कर लिया है। वहीं राम मंदिर के दक्षिण में आद्य गुरु शंकराचार्य प्रवेश द्वार के अगल-बगल दोनों तरफ भी कई रिहायशी मकानों का बैनामा कराया है। बाकी भवनों को लेकर भी बातचीत चल रही है। इसके पहले राम मंदिर के पूरब में अंगद टीला की 42 बिस्वा जमीन को भी हनुमानगढ़ी के हरिद्वारी पट्टी से बैनामे के आधार पर लिया गया है। इसके अलावा अंगद टीला के आसपास की जमीनों को भी हनुमानगढ़ी के ही नागा साधुओं से खरीदी गई है।
सुप्रीम कोर्ट से श्रीरामजन्मभूमि के दस्तावेजी साक्ष्यों को हासिल करेगा तीर्थ क्षेत्र
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के पदेन सदस्य व भवन-निर्माण समिति चेयरमैन नृपेन्द्र मिश्र का कहना है कि ट्रस्ट सुप्रीम कोर्ट से राम मंदिर के ऐतिहासिक साक्ष्यों व आवश्यक दस्तावेज़ को हासिल करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सही पक्षों ने स्वीकार कर लिया है। अब इस मामले को कहीं चुनौती नहीं दी जानी है। इसके कारण सुप्रीम कोर्ट के पास मौजूद पुरातात्विक साक्ष्य को तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने संरक्षित करने का फैसला किया है।
उन्होंने बताया कि राम मंदिर के दूसरे तल पर राम नाम मंदिर निर्माण के साथ रामकथा की गैलरी का भी निर्माण कराया गया है। इस गैलरी में देश के सभी राज्यों की प्राचीन तय रामायण व उसकी पांडुलिपियों को संरक्षित किया जाना है। इस दिशा में प्रयास जारी हैं। सभी राज्यों को इन पांडुलिपियों व प्राचीन रामायण की मूल प्रतियां प्राप्त करने के लिए पत्र भेजा जा चुका है। इसी कड़ी में बीएचयू के सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में वाल्मीकि रामायण की प्राचीन पांडुलिपि प्राप्त होने की जानकारी मिली है। इसके आधार पर यह पांडुलिपि राम मंदिर में लाने की प्रक्रिया पर चर्चा की जा रही है।
तीर्थ क्षेत्र वर्ष प्रतिपदा पर आयोजित करेगा सम्मान समारोह
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने बताया कि नवसंवत्सर यानी वर्ष प्रतिपदा 19 मार्च 2026 को सम्मान समारोह के आयोजन का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि इस समारोह में राम मंदिर निर्माण में लगी सैकड़ों एजेंसियों के कर्मचारियों को सम्मानित किया जाएगा। तीर्थ क्षेत्र की ओर से पहला सम्मान समारोह का आयोजन राम मंदिर निर्माण के पहले किया गया था। इस समारोह में राम मंदिर के अदालती विवाद में मुकदमे की पैरवी करने वाले हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ताओं को सम्मानित किया गया था। इस समारोह में हिस्सा लेने आए श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के न्यासी व वयोवृद्ध अधिवक्ता केशव पारासरन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रति रामलला को समर्पित की थी।




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