टीजीटी परीक्षा में भी फर्जीवाड़े की कोशिश, बायोमेट्रिक में कोचिंग संचालक समेत 11 पकड़ाए
यूपी में प्रशिक्षित स्नातक भर्ती परीक्षा यानी टीजीटी के दौरान फर्जीवाड़े की कोशिश पर एआई निगरानी से नकल माफिया पर बड़ा प्रहार हुआ है। लखनऊ, बरेली, चित्रकूट, जौनपुर, मिर्जापुर और हाथरस में 11 को पकड़ा गया है। इनमें 9 गिरफ्तार किए गए हैं। दो फरार हो गए हैं।

उत्तर प्रदेश में प्रशिक्षित स्नातक (टीजीटी) भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा की कोशिश करते 11 लोगों को पकड़ा गया है। यह लोग दूसरे अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा दे रहे थे। इनमें से 9 को पुलिस ने तत्काल गिरफ्तार कर लिया, जबकि 2 आरोपी परीक्षा केंद्रों से फरार हो गए। लखनऊ में सबसे ज्यादा चार लोगों को पकड़ा गया है। इसके अलावा बरेली, चित्रकूट, जौनपुर, मिर्जापुर और हाथरस में कोचिंग संचालक और साल्वर पकड़ाए हैं।
टीजीटी परीक्षा के 15 विषयों में से बुधवार को आठ विषयों की लिखित परीक्षा दो पालियों में हुई। परीक्षा की निगरानी आयोग मुख्यालय में स्थापित एआई इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम से की गई। आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार, सदस्यगण, सचिव, परीक्षा नियंत्रक और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में सभी परीक्षा केंद्रों पर लगे एआई कैमरों के माध्यम से अभ्यर्थियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी गई। जांच के दौरान पहली पाली में लखनऊ, बरेली और चित्रकूट में दो-दो तथा जौनपुर और मिर्जापुर में एक-एक फर्जी अभ्यर्थी पकड़ा गया। दूसरी पाली में लखनऊ में दो और हाथरस में एक का मामला सामने आया।
बायोमेट्रिक सत्यापन में फंसे
लखनऊ में अमीनाबाद इलाके में विद्यांत हिंदू इंटर कॉलेज केंद्र पर पहली पाली की परीक्षा में अभ्यर्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जा रहा था। इस दौरान जितेंद्र सिंह यादव का बायोमेट्रिक मिलान मिसमैच पाया गया। नाका इलाके में डीएवी डिग्री कॉलेज में साल्वर रंग बहादुर को पकड़ा गया। चारबाग स्थित बप्पा श्रीनरायण वोकेशनल गर्ल्स इंटर कॉलेज में राजेश को पकड़ा गया। महानगर के बादशाहनगर स्थित आर्य कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज में मनतेश सिंह के पकड़ा गया।
हाथरस में दूसरी पाली में सरस्वती इंटर कॉलेज में एक परीक्षार्थी की आधार कार्ड बायोमेट्रिक न मिलने पर पकड़ा गया है। बरेली में दो सॉल्वर पकड़े गए। दोनों आरोपी दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देने पहुंचे थे। एक सॉल्वर इस्लामियां गर्ल्स इंटर कॉलेज में बायोमैट्रिक जांच के दौरान पकड़ा गया, जबकि दूसरा बरेली कॉलेज में डेटा मिसमैच होने पर गिरफ्तार किया गया। इस्लामियां गर्ल्स इंटर कॉलेज में पहली पाली की परीक्षा के दौरान फर्रुखाबाद निवासी अभ्यर्थी विजय प्रताप सिंह की जगह आजमगढ़ निवासी प्रमोद यादव परीक्षा देने पहुंचा था। बरेली कॉलेज परीक्षा केंद्र पर 33 वर्षीय परीक्षार्थी रविंद्र की जगह 46 वर्षीय राम मनोहर प्रजापति परीक्षा देते पकड़ा गया। जांच में सामने आया कि आरोपी एक कोचिंग संचालक है।
डेढ़ लाख रुपये में हुआ था सौदा
बरेली। टीजीटी भर्ती परीक्षा में इस्लामियां गर्ल्स इंटर कॉलेज केंद्र पर पहली पाली में सामाजिक विज्ञान विषय की परीक्षा के दौरान कक्ष संख्या 18 में एक अभ्यर्थी संदिग्ध मिला। बायोमैट्रिक जांच के दौरान उसका डेटा मेल नहीं खाया। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम प्रमोद कुमार निवासी बरवा सागर, मेहनगर, आजमगढ़ बताया। उसने कबूल किया कि वह फर्रुखाबाद निवासी अभ्यर्थी विमल कुमार की जगह परीक्षा देने आया था। इसके लिए डेढ़ लाख रुपये में सौदा तय हुआ था। आरोपी ने बताया कि उसे कुछ धनराशि एडवांस में मिल चुकी थी, जबकि बाकी रकम परीक्षा पास होने के बाद दी जानी थी।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि प्रमोद ने अभ्यर्थी विमल कुमार के आधार कार्ड पर अपनी फोटो लगाकर परीक्षा केंद्र में प्रवेश किया था। हालांकि बायोमैट्रिक सत्यापन के दौरान उसका फर्जीवाड़ा पकड़ लिया गया। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि आजमगढ़ के जीयनपुर क्षेत्र के ग्राम मालताड़ी निवासी पंकज ने आधार कार्ड पर फोटो बदलकर उसे उपलब्ध कराया था। आरोपी का मोबाइल फोन भी पंकज के पास ही बताया जा रहा है।
विद्यालय की प्रधानाचार्य चमन जहां की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और परीक्षा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इस पूरे मामले में सक्रिय सॉल्वर गैंग और उससे जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुट गई है।
परीक्षा देने के बाद डाटा सत्यापन में पकड़ा गया कोचिंग संचालक
बरेली। टीजीटी भर्ती परीक्षा में बरेली कॉलेज केंद्र पर अमेठी जिले के ग्राम कव्का निवासी 46 वर्षीय राम मनोहर, 33 वर्षीय अभ्यर्थी रविंद्र के स्थान पर परीक्षा देने पहुंचा था। उसने परीक्षा कक्ष में प्रवेश के दौरान रविंद्र के नाम से बनाए गए फर्जी पैन कार्ड के जरिए बायोमैट्रिक प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद वह परीक्षा कक्ष में बैठा और पूरी परीक्षा भी दे डाली। उत्तर पुस्तिका जमा होने के बाद बायोमैट्रिक सत्यापन करने वाली एजेंसी ने उसके डेटा में गड़बड़ी पकड़ी। शक होने पर उससे पूछताछ की गई। कॉलेज प्रशासन के सामने आरोपी लगातार खुद को रविंद्र बताता रहा, लेकिन पुलिस के पहुंचने पर उसने अपनी वास्तविक पहचान उजागर कर दी।
आरोपी ने अपना नाम राम मनोहर निवासी ग्राम कव्का, थाना कोतवाली, अमेठी बताया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह प्रयागराज के मंफोडगंज इलाके में रहकर कोचिंग संचालित करता है। उसने स्वीकार किया कि पांच हजार रुपये की जरूरत के चलते वह दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने आया था। आरोपी के अनुसार एक युवक ने उसे परीक्षा से संबंधित सभी दस्तावेज उपलब्ध कराए थे और वह युवक परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद था। हालांकि पुलिस जब आरोपी को लेकर बाहर पहुंची तो वहां कोई नहीं मिला। थाना प्रभारी बिजेंद्र सिंह ने बताया कि आरोपी के पास मिला एंट्री कार्ड भी संदिग्ध है, जिस पर स्पष्ट विवरण दर्ज नहीं है। आरोपी भी पूछताछ में सही जानकारी नहीं दे रहा है। पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और पूरे सॉल्वर नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।
पूरी परीक्षा देने के बाद पकड़ा गया राम मनोहर
सुबह 9.30 से 11.30 की पाली में हुई टीजीटी सामाजिक विज्ञान की परीक्षा देने रविंद्र की जगह पहुंचे 46 वर्षीय राम मनोहर को एजेंसी ने परीक्षा समाप्त होने के बाद पकड़ा। एजेंसी ने जब उसे पकड़ा तब तक उत्तर पुस्तिका जमा करके बंडल सील पैक हो चुका था। आधारकार्ड न देने के कारण उसे पकड़ने में काफी परेशानी हुई। दरअसल आधार कार्ड होने पर बायोमैट्रिक के साथ ही आइरिस स्कैन होती है। साल्वर द्वारा केवल पैनकार्ड जो कि रविंद्र नाम से था उपलब्ध कराया गया, जिसे ऑनलाइन चेक करने पर सही पाया गया और परीक्षा दी। लखनऊ में एजेंसी को शक होने पर विस्तृत जांच में साल्वर को पकड़ा गया।




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