बलूचिस्तान से अमेठी आईं मां हिंगलाज! नवरात्र में उमड़ा भक्तों का सैलाब
अमेठी के दादरा गांव में स्थित प्राचीन मां हिंगलाज मंदिर इन दिनों नवरात्र के अवसर पर आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है। 600 साल पहले संत बाबा पुरुषोत्तम दास की ओर से स्थापित यह मंदिर बलूचिस्तान के हिंगलाज पर्वत से जुड़ा है।

यूपी के अमेठी में जिला मुख्यालय गौरीगंज से करीब पच्चीस किलोमीटर दूर मुसाफिरखाना ब्लॉक के दादरा गांव में स्थित प्राचीन मां हिंगलाज मंदिर नवरात्र के अवसर पर श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है। यहां इन दिनों सुबह से रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। भक्त मां के चरणों में मत्था टेक कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने की प्रार्थना कर रहे हैं। लोकमान्यता है कि नवरात्र में मां हिंगलाज किसी न किसी रूप में साक्षात मंदिर परिसर में उपस्थित रहती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं।
इस मंदिर का इतिहास बेहद प्राचीन और विशिष्ट है। बताया जाता है कि करीब 600 वर्ष पूर्व संत बाबा पुरुषोत्तम दास ने इसकी स्थापना की थी। बाबा तुलसीदास के समकालीन थे और कहा जाता है कि तुलसीदास अक्सर बाबा पुरुषोत्तम दास से मिलने दादरा स्थित उनकी कुटिया पर आते थे। बाबा पुरुषोत्तम दास ने बलूचिस्तान की हिंगलाज नदी के किनारे हींगल पर्वत पर 12 वर्षों तक कठोर तपस्या की और मां भवानी को प्रसन्न किया।
किंवदंती के अनुसार, संत ने मां से क्षेत्र की सुख-शांति और महामारी से मुक्ति के लिए दादरा चलने की प्रार्थना की। देवी ने उनकी बात मान ली, लेकिन एक शर्त रखी कि वे आगे-आगे चलें और उनकी पायल की आवाज सुनते रहें, पीछे मुड़कर न देखें। यात्रा के दौरान जब वे सिंहपुर ब्लॉक स्थित घने अहोरवा वन से गुजरे, तो मां वहीं रुक गईं। कुछ दूर जाने पर जब संत ने पायल की आवाज न सुनी और पीछे देखा, तो मां ने वहीं रुकने की घोषणा कर दी। हालांकि, संत के आग्रह पर मां ने उन्हें एक त्रिशूल प्रदान किया और कहा कि इसे दादरा गांव के पश्चिम में स्थापित कर मंदिर का निर्माण करें। आज भी वही त्रिशूल मंदिर में विराजमान है और श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक बना हुआ है।
मंदिर परिसर में हर सोमवार और शुक्रवार को विशाल मेला लगता है। नवरात्र के समय तो यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। शासन के निर्देश पर मंदिर में दुर्गा सप्तशती का पाठ भी आयोजित किया जाता है, जिससे वातावरण और भी भक्तिमय हो उठता है।
यह मंदिर न केवल स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है, बल्कि बड़े नेताओं ने भी यहां आकर पूजा-अर्चना की है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी यहां मां के दरबार में मत्था टेक चुके हैं।
साल के बारहों महीने यहां श्रद्धालु आते रहते हैं, लेकिन नवरात्र के दिनों में मंदिर का माहौल विशेष रूप से भव्य हो जाता है। भक्तों का मानना है कि मां हिंगलाज के दर्शन मात्र से ही सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख-शांति का आगमन होता है।




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