ambulance carrying mother s dead body stopped on the bridge mla s car passed sons walked with dead body ये कैसा नियम? लाश वाली एंबुलेंस रोक गुजार दी MLA की कार, मां का शव लेकर पैदल चले बेटे, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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ये कैसा नियम? लाश वाली एंबुलेंस रोक गुजार दी MLA की कार, मां का शव लेकर पैदल चले बेटे

कानपुर से मां का शव लेकर लौट रहे बेटों की एंबुलेंस रोक दी गई। दोनों बेटों ने स्ट्रेचर पर शव उठाकर पैदल पुल पार किया। दूसरे छोर पर दूसरा वाहन बुलाकर रोते-बिलखते घर पहुंचे। इससे महज दो-ढाई घंटे पहले ही विधायक की कार इसी पुल से निकली। उसे नहीं रोका गया।

Sun, 29 June 2025 06:43 AMAjay Singh संवाददाता, हमीरपुर
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ये कैसा नियम? लाश वाली एंबुलेंस रोक गुजार दी MLA की कार, मां का शव लेकर पैदल चले बेटे

आमजन के लिए जो नियम-कायदे बेहद जरूरी हैं, माननीयों को उनकी धज्जियां उड़ाने की छूट दे दी गई। शनिवार को यमुना पुल पर हादसे में मौत के बाद कानपुर से मां का शव लेकर लौट रहे बेटों की एंबुलेंस रोक दी गई। दोनों बेटों ने स्ट्रेचर पर शव उठाकर पैदल पुल पार किया और दूसरे छोर पर दूसरा वाहन बुलाकर रोते-बिलखते घर पहुंचे। बेटे शव लेकर करीब एक किलोमीटर पैदल चले। इससे महज दो-ढाई घंटे पहले ही एक विधायक इसी पुल पर कार से फर्राटा भरते हुए निकले थे। जिम्मेदारों ने उन्हें पुल से गुजारने के लिए बैरीकेड किनारे कर दिए। पिछले सप्ताह प्रमुख सचिव डॉ. शन्मुगा सुन्दरम् एमके का काफिला भी नो एंट्री के बावजूद पुल से गुजार दिया गया था, जबकि आम लोग कई किमी चक्कर लगाने को मजबूर थे।

यमुना पुल की वेयरिंग बदलने का काम चल रहा है। तीन सप्ताह से हर शनिवार सुबह छह बजे से 48 घंटे के लिए पुल पर यातायात बंद कर दिया जाता है। थाना सुमेरपुर के टेढ़ा गांव निवासी मानसिंह उर्फ बिंदा यादव ने बताया कि मां शिवदेवी का हादसे में पैर टूटने के बाद कानपुर में इलाज चल रहा था। शनिवार तड़के मां की मौत हो गई। भाई जयसिंह के साथ मैं मां का शव लेकर गांव आ रहा था। करीब 9:30 बजे यमुना पुल पर पहुंचे तो एंबुलेंस रोक दी गई। हमने एंबुलेंस वहीं छोड़ी और ड्राइवर की मदद से शव को स्ट्रेचर पर लादकर 900 मीटर लंबा पुल पार किया। सांस फूल गई। हमें चार जगह शव रखकर सुस्ताना पड़ा। दूसरे छोर पर खड़े ऑटो से शव ले गए।

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मां का शव लेकर एक किमी पैदल चले बेटे,चार बार रुके

यमुना नदी के 900 मीटर लंबे पुल को जब मान सिंह उर्फ बिंदा और उसका भाई जय सिंह मां के शव को स्ट्रेचर में रखकर पार कर रहे थे, तब चार बार इन्हें शव को बीच पुल में रखकर सुस्ताना पड़ा। शव को ले जाने में दोनों भाइयों की सांसें फूल गई। किसी तरह हमीरपुर की तरफ शव लेकर आए भाई उसे ऑटो में रखकर अपने गांव को रवाना हो गए।

बीते मंगलवार को ई-रिक्शा पलटने से टेढ़ा गांव की 65 वर्षीय शिवदेवी गंभीर रूप से घायल हो गई। उनके पैर में फ्रैक्चर हुआ था और भी शरीर में चोटे आई थी। घटना के वक्त शिवदेवी के दोनों बेटे मान सिंह उर्फ बिंदा और जय सिंह सूरत में थे। मां के घायल होने की जानकारी मिलने पर सबसे पहले जय सिंह गांव आया था और मां को इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया। यहां से शिवदेवी को कानपुर रेफर कर दिया गया था। जहां शिवदेवी का इलाज चल रहा था। दो दिन पूर्व ही मान सिंह सूरत से गांव आया और मां की देखभाल में लग गया। शनिवार को शिवदेवी की इलाज के दौरान कानपुर में मौत हो गई। दोनों भाई सुबह सात बजे के आसपास शव एंबुलेंस से लेकर हमीरपुर को चले थे। यमुना नदी के पुल पर बैरीकेडिंग के पास ही एंबुलेंस को रोक दिया गया। दोनों भाई मिन्नतें करते रहे, लेकिन किसी ने नहीं सुनी।

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बाद में मजबूरी में उन्होंने एंबुलेंस की स्ट्रेचर में मां के शव को रखकर और 900 मीटर लंबे पुल को पार करने चल दिए। इस दौरान चार बार शव को रखकर दोनों भाई और एंबुलेंस ड्राइवर दम भरते और फिर आगे बढ़ते। इस पार आते-आते तीनों लोग पसीने से लथपथ हो गए।

क्या बोले अधिकारी

पीएनसी प्रोजेक्ट मैनेजर एमपी वर्मा ने कहा कि पुल से स्ट्रेचर पर शव ले जाने की जानकारी मीडिया से मिली है। सदर विधायक की कार पुल बंद होने से कुछ देर पहले ही निकली थी। आम लोगों की सहूलियत को देखते हुए उन्हें पैदल निकाला जा रहा है।

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