लखीमपुर खीरी में आंबेडकर जयंती बवाल मामले में 400 पर केस; प्रधान समेत 82 उपद्रवी नामजद
लखीमपुर खीरी में आंबेडकर जयंती पर बवाल मामले में दो मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जिनमें 400 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसमें 82 लोग नामजद हैं। अब तक 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस वीडियो फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान कर रही है।

लखीमपुर खीरी के बांकेगंज क्षेत्र के मोतीपुर गांव में आंबेडकर जयंती के दौरान भड़के बवाल के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए मंगलवार को पूरी रात इलाके में कैंप किया। देर रात तक सड़क पर बिखरे ईंट-पत्थर, जले और क्षतिग्रस्त वाहनों के अवशेष हटाकर मार्ग को साफ कराया गया। हालात सामान्य करने के लिए एसडीएम, सीओ समेत चार थानों की पुलिस और पीएसी को घटना स्थल पर तैनात किया गया है। आईजी किरण एस ने भी घटना स्थल पर पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया।
आंबेडकर जयंती बवाल में 400 पर केस
वहीं, मामले में दो मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जिनमें 400 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसमें 82 लोग नामजद हैं। अब तक 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस वीडियो फुटेज और सीसीटीवी के आधार पर उपद्रवियों की पहचान कर रही है। मंगलवार को मैलानी थाने के बांकेगंज के करीब मोतीपुर गांव में आंबेडकर जयंती पर कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसी दौरान एक विवादित जमीन पर डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित कर दी गई, जिसका गांव की चंदा देवी के पक्ष ने विरोध किया।
4 घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस ने पाया काबू
तनाव बढ़ने पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस पर चंदा देवी के पक्ष के कहने पर प्रतिमा हटाने का आरोप लगाकर दूसरे पक्ष ने बवाल शुरू कर दिया। भीड़ पुलिस पर हमलावर हो गई। सीओ रमेश तिवारी और तहसीलदार भीम चंद समेत कई अधिकारियों की गाड़ियां तोड़ दी गई। नायब तहसीलदार भानु प्रताप और संसारपुर पुलिस चौकी के वाहन फूंक दिए गए। एक दर्जन पुलिसकर्मी जख्मी हुए। करीब चार घंटे चली मशक्कत के बाद पुलिस ने किसी तरह हालात पर काबू पाया गया। घटना के बाद रात करीब साढ़े 12 बजे तक मोतीपुर मार्ग पर टूटे शीशे और पत्थर फैले रहे। इसके बाद नगर पालिका की क्रेन से हटवाया।
बवाल में शामिल आरोपी घर छोड़कर फरार
बांकेगंज क्षेत्र से सटे मोतीपुर गांव में हुए करीब चार घंटे के बवाल के बाद हालात पूरी तरह बदल गए। दिन में जहां अफरा-तफरी और हंगामा रहा, वहीं रात होते-होते पूरा इलाका सन्नाटे में डूब गया। कार्यक्रम स्थल पर लगा शामियाना खाली रह गया और चारों ओर सिर्फ पुलिस की गाड़ियों की सायरन सुनाई देती रही। बवाल में शामिल आरोपी घर छोड़कर फरार हैं। जिनकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।
गांव में दहशत का माहौल
बताया जाता है कि विवाद इतना बढ़ गया था कि हालात काबू से बाहर हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद मोर्चा संभाला और स्थिति को नियंत्रण में लिया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में देर रात तक इलाके में गश्त जारी रही, जिससे किसी तरह शांति बहाल हो सकी। बवाल के बाद कई लोग अपने घर छोड़कर इधर-उधर चले गए, जिससे गांव में डर और दहशत का माहौल बना है।




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