इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में गजब का अकादमिक प्रयोग, संस्कृत को अंग्रेजी में पढ़ा रहे शिक्षक
इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में भाषा की बाधा तोड़ने के लिए एक नए प्रयोग के तहत विद्यार्थियों को अंग्रेजी में संस्कृत पढ़ाई जा रही है। परास्नातक (मास्टर्स) के 123 छात्र-छात्रा शाम को विशेष समूह में यह अध्ययन कर रहे हैं।

परंपरा और तकनीक के संगम का एक अनूठा उदाहरण इन दिनों इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में देखने को मिल रहा है। सदियों पुरानी और समृद्ध भाषा संस्कृत को नई पीढ़ी के लिए सरल, सहज और उपयोगी बनाने के उद्देश्य से विभाग ने अभिनव पहल की है। विद्यार्थियों को अंग्रेजी माध्यम से संस्कृत पढ़ाई और समझाई जा रही है। यह प्रयोग खास तौर पर उन छात्रों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रहा है, जिन्हें संस्कृत की मूल अवधारणा समझने में भाषा संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।
विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में प्रथम और द्वितीय वर्ष के 250 विद्यार्थी हैं। इनमें परास्नातक प्रथम वर्ष के 123 छात्र विशेष रूप से शाम के समय एक अध्ययन समूह में नई पद्धति के तहत पढ़ाई कर रहे हैं। शिक्षक द्विभाषिक व्याख्या की मदद से जटिल व्याकरणिक सिद्धांतों, श्लोकों और साहित्य के अंशों को अंग्रेजी के जरिए सरल रूप में समझा रहे हैं। इससे विद्यार्थियों की विषय में रुचि गहरी हुई है और उनकी समझ भी पहले की अपेक्षा अधिक मजबूत हुई है।
संस्कृति विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संदीप कुमार ने बताया कि आज के समय में अधिकांश विद्यार्थी अंग्रेजी माध्यम की पृष्ठभूमि से आते हैं। ऐसे में यदि संस्कृत को केवल पारंपरिक शैली में पढ़ाया जाए तो कई बार भाषा की दीवार उनके सीखने की गति को प्रभावित करती है। इसी चुनौती को अवसर में बदलते हुए विभाग ने यह नया प्रयोग शुरू किया है, जिसका उद्देश्य संस्कृत जैसी प्राचीन भाषा को आधुनिक शैक्षणिक दृष्टिकोण से जोड़ना है।
विद्यार्थियों के अनुसार अंग्रेजी में व्याख्या मिलने से कठिन व्याकरण, धातु रूप, छंद और दर्शन के विषय अधिक स्पष्ट हो रहे हैं। इससे न केवल परीक्षा की तैयारी बेहतर हो रही है, बल्कि शोध के लिए भी नई संभावनाएं खुल रही हैं। विशेष समूह में संवादात्मक पद्धति अपनाई जा रही है, जहां विद्यार्थी खुलकर प्रश्न पूछते हैं और डिजिटल संसाधनों के माध्यम से तुरंत समाधान प्राप्त करते हैं। यह पहल इस बात का प्रमाण है कि यदि शिक्षण पद्धति को समय के अनुरूप बदला जाए तो पारंपरिक विषयों के अध्ययन-अध्यापन में भी नई ऊर्जा भरी जा सकती है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय का प्रयोग भविष्य में अन्य भाषाई और शास्त्रीय विषयों के लिए एक मॉडल के रूप में उभर सकता है।




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