नीट यूजी में एनसीसी बी सर्टिफिकेट वालों को आरक्षण की मांग पर यूपी सरकार से हाईकोर्ट का जवाब तलब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नीट यूजी 2026 काउंसिलिंग में एनसीसी ‘बी’ सर्टिफिकेट धारकों को आरक्षण देने की मांग में दाखिल याचिका पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।

Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नीट यूजी 2026 काउंसिलिंग में एनसीसी ‘बी’ सर्टिफिकेट धारकों को आरक्षण देने की मांग में दाखिल याचिका पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। जौनपुर के सक्षम श्रीवास्तव की याचिका पर न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्या वीर सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई की।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रणब कुमार गांगुली ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल ने अब निरस्त हो चुकी नीट यूजी 2026 परीक्षा दी थी और वह एनसीसी ‘बी’ सर्टिफिकेट धारक हैं। उन्होंने अदालत के समक्ष कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण द्वारा जारी यूजीसीईटी-2026 की अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि वहां अनारक्षित वर्ग में एनसीसी प्रमाणपत्र धारकों के लिए एक प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया गया है। इसके अलावा तेलंगाना राज्य के एमबीबीएस पाठ्यक्रम के प्रॉस्पेक्टस में भी एनसीसी अभ्यर्थियों को तीन प्रतिशत ग्रेस मार्क्स का प्रावधान है। याचिका में मांग की गई है कि नीट-2026 काउंसिलिंग ब्रोशर में संशोधन कर एनसीसी ‘बी’ सर्टिफिकेट धारकों को एक प्रतिशत आरक्षण दिया जाए।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश स्थायी अधिवक्ता शरद चंद्र उपाध्याय ने अदालत को बताया कि उत्तर प्रदेश चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण निदेशालय द्वारा जारी आरक्षण नीति में केवल एनसीसी ‘सी’ सर्टिफिकेट धारकों को आरक्षण का लाभ दिया गया है। इस पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि एनसीसी ‘सी’ सर्टिफिकेट केवल स्नातक स्तर पर जारी किया जाता है, जबकि नीट यूजी परीक्षा स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए होती है। ऐसे में ‘बी’ सर्टिफिकेट धारकों को आरक्षण से वंचित करना उचित नहीं है। खंडपीठ ने मामले की तात्कालिकता को देखते हुए कहा कि नीट यूजी 2026 परीक्षा अब 21 जून 2026 को पुनर्निर्धारित की गई है, इसलिए मामले में शीघ्र निर्णय आवश्यक है। अदालत ने संबंधित शैक्षिक प्राधिकरण को निर्देश जारी कर मामले की अगली सुनवाई 26 मई 2026 को तय की है।




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