allahabad high court s decision regarding pension arrears and gratuity scam investigation across state पेंशन एरियर और ग्रेच्युटी को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला, पूरे प्रदेश में होगी जांच, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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पेंशन एरियर और ग्रेच्युटी को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला, पूरे प्रदेश में होगी जांच

कोर्ट ने कहा कि प्राथमिकी से यह पता चलता है की कुल 42,04,22,093 करोड़ रुपये की पब्लिक मनी का घोटाला हुआ है। यह रकम 57 पेंशनरों के खाते में भेजी गई है। कोर्ट का मानना है कि इस तरह के मामले अन्य जिलों में भी हो सकते हैं जहां पब्लिक फंड का पेंशन एरिया भुगतान के नाम पर दुरुपयोग किया गया है।

Sat, 10 Jan 2026 08:35 PMAjay Singh विधि संवाददाता, प्रयागराज
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पेंशन एरियर और ग्रेच्युटी को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला, पूरे प्रदेश में होगी जांच

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को प्रदेश के सभी जिलों में पेंशन एरियर और ग्रेच्युटी भुगतान में हो रहे घोटाले की जांच कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि खासकर उन मामलों की जांच की जाए जहां पेंशनर की मृत्यु हो चुकी है और अपात्र लोग फर्जी लाइफ सर्टिफिकेट लगा कर उनके नाम पर पेंशन ले रहे हैं। चित्रकूट की 84 वर्षीय महिला जगुआ उर्फ जोगवा की अंतरिम जमानत मंजूर करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने दिया है।

याची के खिलाफ 28,6,506 लाख रुपये पेंशन एरियर के नाम पर फर्जी तरीके से चित्रकूट ट्रेजरी से अपने खाते में भुगतान कराने और फिर रकम निकाल लेने का आरोप है। यह रकम 7 फरवरी 2024 से 30 मई 2025 के दौरान उसके खाते में पेंशन एरियर के तौर पर जमा की गई। याची के अधिवक्ता का कहना था की याची एक 84 साल की अनपढ़ महिला है। उसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। किसी बिचौलिए और ट्रेजरी कर्मचारियों की मिली भगत से उसके खाते में रकम ट्रांसफर की गई। याची ने किसी भी पेंशन एरियर भुगतान के लिए कोई प्रार्थना पत्र नहीं दिया था। उसके गांव के एक व्यक्ति अमित मिश्रा ने याची को बताया कि उसके खाते में गलती से पैसे ट्रांसफर हो गए हैं उसकी बेटी की शादी के लिए आवश्यकता है, इसलिए याची ने अमित मिश्रा को पैसे निकाल कर के दे दिए। याची ने कोई धोखाधड़ी नहीं की है और ना ही उसने ट्रेजरी से अपने खाते में पैसे भेजने के लिए कोई पैरवी की थी।

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राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि याची के खाते में पैसे गए हैं। जिसे उसने स्वयं निकाले हैं। वह इसकी लाभार्थी है। इसलिए या नहीं कहा जा सकता कि उसे इस मामले की जानकारी नहीं थी। राज्य सरकार की ओर से यह बताने के लिए कि याची ने एरिया भुगतान के लिए कोई आवेदन किया था या नहीं समय की मांग की। जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। कोर्ट ने कहा कि याची को अंतरिम जमानत देते हुए कहा कि उसकी उम्र और महिला होने के नाते उसे यह अंतरिम जमानत दी जा रही है।

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कोर्ट ने कहा कि प्राथमिकी से यह पता चलता है की कुल 42,04,22,093 करोड़ रुपये की पब्लिक मनी का घोटाला हुआ है। यह रकम 57 पेंशनरों के खाते में भेजी गई है। इसलिए कोर्ट का मानना है कि इस तरह के मामले अन्य जिलों में भी हो सकते हैं जहां पब्लिक फंड का पेंशन एरिया भुगतान के नाम पर दुरुपयोग किया गया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह पेंशन एरियर, ग्रेच्युटी और रिटायरमेंट बेनिफिट से संबंधित हुए भुगतान की सभी जिलों में जांच कराए। विशेष कर वहां जहां पेंशनर की मृत्यु हो गई है और आश्रित अहर्ता ना होने के बावजूद फर्जी लाइफ सर्टिफिकेट जमा करके पेंशन ले रहे हैं। कोर्ट ने इस आदेश की एक प्रति प्रदेश के मुख्य सचिव को भी भेजने का निर्देश दिया है।

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