बिना कारण वाहन जब्त किया तो दारोगा के वेतन से कटेगा जुर्माना, पुलिस की कार्यप्रणाली पर हाईकोर्ट सख्त
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाहन जब्त करने के मामले में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और मनमानी पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा है कि मनमानी तरीके से वाहनों की जब्ती की गई तो संबंधित दरोगा के वेतन से जुर्माना काटा जाएगा।

Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाहन जब्त करने के मामले में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और मनमानी पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा है कि मनमानी तरीके से वाहनों की जब्ती की गई तो संबंधित दरोगा के वेतन से जुर्माना काटा जाएगा। मामला जौनपुर के केराकत थाने से जुड़ा है, जहां पुलिस ने बिना किसी अपराध या कानूनी आधार के एक वाहन को महीनों तक अपनी कस्टडी में रखा। इस पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति हरवीर सिंह ने न केवल वाहन को तत्काल छोड़ने का आदेश दिया, बल्कि तत्कालीन उपनिरीक्षक सुनील कुमार पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जुर्माने की यह राशि संबंधित दरोगा के वेतन से काटी जाएगी।
याची सुधांशु के वाहन को पुलिस ने 16 जुलाई 2025 को कस्टडी में लिया था। सुधांशु ने अदालत को बताया कि उन्होंने अपने स्वामित्व के सभी दस्तावेजों के साथ पुलिस से संपर्क किया था, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने यह कहते हुए वाहन छोड़ने से मना कर दिया कि बिना अदालती आदेश के इसे रिलीज नहीं किया जा सकता। दूसरी ओर, पुलिस ने कोर्ट में प्रस्तुत रिपोर्ट में यह अजीबोगरीब तर्क दिया गया कि कोई भी वाहन का मालिक बनकर इसे लेने नहीं आया, जबकि रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया कि उक्त वाहन किसी भी आपराधिक मामले में शामिल नहीं पाया गया था।
कोर्ट ने पुलिस के तर्क को किया खारिज
कोर्ट ने पुलिस के इन तर्कों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यदि कोई वाहन किसी अपराध से जुड़ा नहीं है, तो पुलिस उसे बिना किसी ठोस वजह के अपनी अभिरक्षा में रखने का अधिकार नहीं रखती। कोर्ट ने कहा कि जब मालिक दस्तावेज दिखा रहा था, तो पुलिस को अपनी संतुष्टि के बाद वाहन छोड़ देना चाहिए था। न्यायमूर्ति हरवीर सिंह ने इस कृत्य को शक्तियों का दुरुपयोग मानते हुए याचिकाकर्ता को यह छूट भी दी है कि वह वाहन को अनावश्यक रूप से पुलिस कस्टडी में रखने के कारण हुए नुकसान की भरपाई के लिए संबंधित पुलिस अधिकारियों से हर्जाने का दावा कर सकता है। यह हर्जाना भी दोषी पुलिसकर्मियों के वेतन से वसूला जाएगा।




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