Investigation into Illegal Map Approvals by Khair Municipality Former MLA Complains to DM नगर पालिका खैर के ईओ पर गिर सकती है गाज, शासन को जाएगी जांच रिपोर्ट, Aligarh Hindi News - Hindustan
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नगर पालिका खैर के ईओ पर गिर सकती है गाज, शासन को जाएगी जांच रिपोर्ट

Aligarh News - नगर पालिका खैर के ईओ पर गिर सकती है गाज, शासन को जाएगी जांच रिपोर्ट

Tue, 28 April 2026 01:22 AMNewswrap हिन्दुस्तान, अलीगढ़
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नगर पालिका खैर के ईओ पर गिर सकती है गाज, शासन को जाएगी जांच रिपोर्ट

एडीए के अधिकार क्षेत्र में ‌अवैध रूप से मानचित्रों को स्वीकृत करने का है मामलाजांच समिति अधिशासी अधिकारी दोषी सिद्ध किया, पूर्व विधायक ने डीएम से की शिकायतफोटो-अलीगढ़। वरिष्ठ संवाददात। खैर नगर पालिका परिषद ने अधिकार नहीं होने के बाद भी 41 भवनों के अवैध रूप से मानचित्र स्वीकृत करने के मामले में ईओ नपा पर गाज गिर सकती है। एडीए व प्रशासन की संयुक्त जांच रिपोर्ट अब शासन को भेजी जाएगी। सोमवार को मामले के शिकायतकर्ता पूर्व विधायक प्रमोद गौड़ ने डीएम अविनाश कुमार को मामले की पूरी पत्रावली सौंपी।पूर्व विधायक ने पिछले दिनों शासन में शिकायत की थी कि एडीए के अधिकार क्षेत्र में होने के बावजूद भी खैर नगर पालिका ने नियमों का उल्लंघन करते हुए अवैध रूप मानचित्र स्वीकृत किए थे।

जिसके बाद जांच के लिए प्रशासन व एडीए की संयुक्त जांच समिति गठित हुई। जांच रिपोर्ट के अनुसार नगरपालिका ने क्षेत्राधिकार समाप्त होने के बावजूद 41 भवन मानचित्र अवैध रूप से पास कर दिए। न केवल यह स्वीकृतियां तकनीकी रूप से त्रुटिपूर्ण थीं, बल्कि इससे सरकारी ख़ज़ाने को क्षति पहुंचाई गई। जांच अधिकारी ने इस सभी मानचित्रों को गंभीर कदाचार की श्रेणी में बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार खैर नगर पालिका के अवर अभियंता व तत्कालीन अधिशासी अधिकारी की भूमिका संदेह के घेरे में है। एडीए की जांच में काफी संवेदनशील तथ्य सामने आए हैं। सोमवार को डीएम से मामले में शिकायत करते हुए पूर्व विधायक ने कहाकि खैर नगर पालिका द्वारा पूर्व में नक्शा स्वीकृति के लिए तहसील स्तर पर कई अधिकारियों-कर्मचारियों की रिपोर्ट लगाई जाती थी, लेकिन इन नक्शों में कुछ अधिकारियों की ही रिपोर्ट लगाकर स्वीकृति दे दी गई है। ऐसे में इस खेल में भ्रष्टाचार से भी इन्कार नहीं किया जा सकता है। मानचित्र की स्वीकृति बिना क्षेत्राधिकार नियम विरुद्ध जो तकनीकी रूप से भी त्रुटिपूर्ण थे, मानवित्र स्वीकृति की गयी। जिससे अत्यधिक राजस्व क्षति हुई। ऐसे में जांच रिपोर्ट के आधार पर विभागीय कार्यवाही के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी जाए।

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