Residents of Rathi Nagar and Pala Phatak Road Endure the Hell of Waterlogging जलभराव का नरक झेल रहे राठी नगर, पला फाटक रोड के निवासी, Aligarh Hindi News - Hindustan
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जलभराव का नरक झेल रहे राठी नगर, पला फाटक रोड के निवासी

जलभराव का नरक झेल रहे राठी नगर, पला फाटक रोड के निवासी पिछले एक साल से जलभराव और खराब सड़क की है समस्या, बारिश में हालात हो जाते हैं बेहाल, दो-दो फुट भरता है पानी। पांच हजार वाहना रोज इस रोड से निकलते हैं। 

Mon, 25 May 2026 05:36 PMSunil Kumar हिन्दुस्तान
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जलभराव का नरक झेल रहे राठी नगर, पला फाटक रोड के निवासी

शहर का नौरंगाबाद छावनी, पला फाटक रोड स्थित राठी नगर के लोग नारकीय हालात में रहने को मजबूर हैं। स्मार्ट सिटी और विकास के दावों के बीच यह इलाका पिछले एक साल से प्रशासनिक उपेक्षा और ड्रेनेज सिस्टम की नाकामी का सबसे बड़ा गवाह बना हुआ है। जलभराव, टूटी सड़कें, कूड़े के ढेर और आवारा पशुओं के आतंक से पूरा क्षेत्र त्रस्त है। ये हालात ऐसे ही नहीं बने। यहां पर नाला बना ही नहीं है। पहले नालियों का पानी रेलवे लाइन की तरफ गड्ढों में जाता था, अब रेलवे की दीवार बनने के बाद पानी की निकासी बंद हो गई है। इसके चलते सड़क पर पानी जमा हुआ है। पला रोड की इस समस्या से जूझते हुए लोगों ने बोले अलीगढ़ अभियान के तहत अपनी परेशानी साझा की।

पला रोड के वार्ड-6 में रहने वाले लोगों ने बताया कि उन्हें रेलवे लाइन की दीवार बनने की कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन पानी की निकासी को कोई इंतजाम तो होना चाहिए था। करीब एक साल पहले तक इस इलाके में जलभराव की ऐसी स्थायी समस्या नहीं थी। रेलवे लाइन के किनारे और खाली जमीन थी। जब भी बारिश होती थी या घरों का अतिरिक्त पानी निकलता था, तो वह प्राकृतिक रूप से रेलवे लाइन की तरफ ढलान होने के कारण उन गड्ढों में समा जाता था। लेकिन एक साल पहले रेलवे विभाग ने सुरक्षा कारणों से अपनी जमीन की घेराबंदी करते हुए एक ऊंची बाउंड्री वॉल खड़ी कर दी। इस दीवार के बनते ही पानी जाने का रास्ता पूरी तरह ब्लॉक हो गया। रेलवे ने अपनी जमीन तो सुरक्षित कर ली, लेकिन नगर निगम और स्थानीय प्रशासन ने यह सोचने की जहमत नहीं उठाई कि अब इस पानी की निकासी कहां होगी। नतीजा यह हुआ कि सड़क का पानी सड़क पर ही ठहर गया और देखते ही देखते यह मुख्य मार्ग एक स्थायी नासूर बन गया।

बारिश में बेहाल हालात

लोगों के मुताबिक सामान्य दिनों में तो जैसे-तैसे यहां से निकलते हैं, लेकिन मानसून या हल्की सी भी बारिश के दौरान यहां के हालात पूरी तरह बेहाल हो जाते हैं। बारिश होते ही पूरी सड़क तालाब बन जाती है। सड़क पर दो-दो फुट तक गंदा और बदबूदार पानी जमा हो जाता है। इस जलभराव के चलते स्थिति इतनी भयावह हो जाती है कि पैदल चलना तो दूर, दुपहिया वाहनों का निकलना भी मौत को दावत देने जैसा होता है। पानी के नीचे सड़क है या गहरा गड्ढा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। आए दिन बाइक सवार और ई-रिक्शा पलटते रहते हैं, जिससे लोग चोटिल हो रहे हैं। पानी लोगों की दुकानों और घरों के मुहाने तक पहुंच जाता है, जिससे स्थानीय व्यापार पूरी तरह ठप हो चुका है।

वाहन और पैदल निकलना भी मुश्किल

इस रोड से रोज करीब छोटे-बडे पांच हजार वाहन निकलते हैं। कामकाजी लोग, स्कूली बच्चे, व्यापारिक वाहन हर दिन इसी रास्ते का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं। पिछले एक साल से लगातार पानी भरे रहने के कारण सड़क की गिट्टियां पूरी तरह उखड़ चुकी हैं। सड़क पर अब सिर्फ गड्ढे या ऊंची-नीची सड़क स्थिति बचे हैं। निकली हुई गिट्टियों पर वाहन फिसल रहे हैं।

गंदगी का लगा अंबार, सफाई कर्मचारी लापता

इस इलाके की परेशानी सिर्फ जलभराव और टूटी सड़क तक सीमित नहीं है। यहां कदम-कदम पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। जलभराव के कारण सड़कों के किनारे की मिट्टी दलदल में बदल चुकी है, जहां स्थानीय लोग और आसपास के दुकानदार कचरा फेंकने को मजबूर हैं। क्योंकि कचरा निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम के सफाई कर्मी कभी भी इस इलाके में सफाई करने नहीं आते। सफाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप है। महीनों से कचरा जस का तस बना हुआ है। कचरे के ढेरों से उठने वाली सड़न और बदबू ने यहां के वातावरण को जहरीला बना दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बदबू के कारण घरों के खिड़की-दरवाजे बंद रखने पड़ते हैं।

आवारा पशुओं का डेरा और संक्रामक बीमारियों का खतरा

कचरे के इन ढेरों पर चौबीसों घंटे आवारा पशुओं का विचरण लगा रहता है। आवारा गाय, सांड और श्वान इस कचरे में मुंह मारते रहते हैं और भोजन की तलाश में पूरे रास्ते पर गंदगी फैलाते हैं। कई बार ये आवारा सांड आपस में भिड़ जाते हैं, जिससे सड़क पर अफरा-तफरी मच जाती है और राहगीरों की जान पर बन आती है। सड़ते हुए कचरे, ठहरे हुए गंदे पानी और आवारा पशुओं की मौजूदगी ने इस पूरे क्षेत्र को संक्रामक बीमारियों का हॉटस्पॉट बना दिया है। इलाके में मच्छरों का भयंकर प्रकोप है। इस वीभत्स माहौल के चले क्षेत्र में डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, डायरिया और त्वचा से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं। विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर इसका बेहद बुरा असर पड़ सकता है।

स्थानीय लोगों में है गुस्सा

इस बदहाली को लेकर स्थानीय लोगों ने नगर निगम और जिला प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि उन्हें बुनियादी सुविधाएं जैसे साफ सड़क, जल निकासी और सफाई तक मयस्सर नहीं है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि दीवार बनने के बाद से हमारी दुकानदारी चौपट हो गई हैं। ग्राहक इस कीचड़ और पानी को देखकर हमारी तरफ रुख नहीं करते। यहां धरातल पर कोई काम नहीं हुआ है।

समाधान की दरकार

यह स्थिति प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। जब रेलवे लाइन की दीवार बन रही थी, तब नगर निगम के इंजीनियरों ने पानी के वैकल्पिक निकास का प्लान क्यों नहीं तैयार किया? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? इस समस्या का त्वरित और स्थायी समाधान बेहद जरूरी है। रेलवे की दीवार के समानांतर एक बड़ा नाला बनाकर पानी को मुख्य सीवर लाइन से जोड़ा जाए। जलभराव की समस्या दूर होते ही सड़क को ऊंचा किया जाए। आरसीसी रोड बनाई जाए। इस वार्ड में सफाई कर्मचारियों की तैनाती की जाए। डंपिंग ग्राउंड तक कचरा पहुंचाने की व्यवस्था हो। यदि समय रहते अलीगढ़ प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले मानसून में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो सकती है।

बोले लोग

एक साल से नरक झेल रहे हैं। रेलवे दीवार बनने के बाद पानी निकासी ठप है। बारिश के दौरान दो-दो फुट पानी में से होकर रोज गुजरना पड़ता है, कोई सुनवाई नहीं है।

लोकेश उपाध्याय

सड़क पर गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क, पता नहीं चलता। वाहन रोज यहां से जान जोखिम में डालकर निकलते हैं। प्रशासन पूरी तरह सोया हुआ है।

आशीष शर्मा

सफाई कर्मी कभी शक्ल नहीं दिखाते। पूरी सड़क पर गंदगी का अंबार लगा है। बदबू के कारण घर के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखनी पड़ती हैं।

वंदना गुप्ता

बारिश आते ही दिल दहल जाता है। दुकानों के अंदर तक पानी भर जाता है। व्यापार चौपट हो गया है और कोई सुध लेने वाला नहीं है। जीना मुहाल है।

मनोज कुमार

पहले पानी रेलवे लाइन के गड्ढों में चला जाता था। दीवार बनने के बाद यहां कृत्रिम झील बन गई है। जलभराव ने हमारा चलना-फिरना बंद कर दिया है।

पवन सिंह

सड़क पर आवारा पशुओं का आतंक है। कचरे के ढेर में वे दिनभर मुंह मारते हैं। आए दिन वाहन चालक इनसे टकराकर चोटिल हो रहे हैं।

दीप सिंह

बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और बुजुर्ग घर में कैद हैं। दो फुट गंदे पानी के बीच से गुजरने पर त्वचा की बीमारियां हो सकती हैं। इसका निस्तारण होना चाहिए।

रिंकू सिंह

नगर निगम के अधिकारियों को यहां पर आकर देखना चाहिए कि किस तरह लोग यहां पर नरक झेलने को मजबूर हैं। टैक्स हम पूरा देते हैं, पर सुविधाएं नरक जैसी मिल रही हैं।

छोटे लाल

पला रोड की हालत इतनी बदतर हो चुकी है कि रात में ऑटो वाले यहां आने से मना कर देते हैं। आपातकाल में एम्बुलेंस का आना भी मुश्किल है।

वीरेंद्र गुप्ता

गंदगी और ठहरे हुए पानी के कारण मच्छरों का भयंकर प्रकोप है। कॉलोनी में मलेरिया और डेंगू फैलने का खतरा चौबीसों घंटे बना रहता है।

सत्येंद्र गुप्ता

हजारों वाहनों का दबाव होने के बावजूद इस सड़क की मरम्मत नहीं कराई जा रही। रेलवे और प्रशासन के बीच आम जनता पिस रही है।

दीपक

जलभराव से सड़क के पत्थर उखड़ गए हैं। दुपहिया वाहन चालक रोज गिरकर चोटिल हो रहे हैं। यह प्रशासन की घोर लापरवाही का नतीजा है।

ओम प्रकाश

सफाई व्यवस्था शून्य है। कूड़ा उठाने कोई नहीं आता, जिससे चारों तरफ कचरा बिखरा रहता है। आवारा मवेशी इसे और फैला देते हैं।

रामू

रेलवे की दीवार हमारे लिए मुसीबत बन गई। पानी का पुराना रास्ता बंद हो गया और नया ड्रेनेज सिस्टम नगर निगम ने बनाया ही नहीं। बहुत दिक्कत है।

महाशंकर

कीचड़ और बदबू के बीच रहने को मजबूर हैं। रिश्तेदार हमारे घर आने से कतराते हैं। राठी नगर के लोग बेहद दयनीय स्थिति में जी रहे हैं।

राधे श्याम

रोजाना पांच हजार गाड़ियां निकलती हैं, पर सड़क का कोई माई-बाप नहीं है। जलभराव के स्थाई समाधान के लिए तुरंत ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

काली चरन

पूरी सड़क पर जलभराव के कारण पैदल चलना असंभव है। गंदगी से संक्रामक बीमारियां फैल रही हैं। हमारे सब्र का बांध अब टूट रहा है।

रामेश्वर

नगर निगम के अधिकारी सिर्फ कागजों पर काम करते हैं। जमीन पर राठी नगर की हालत देखकर कोई भी इसे वीरान इलाका कहेगा, शहर नहीं।

संतोष

जलभराव के कारण गाड़ियां खराब हो जाती हैं। आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ रही है। इस समस्या का अंत कब होगा?

राकेश

आवारा पशु कचरे के ढेर पर लड़ते रहते हैं, जिससे राहगीरों को चोट लगती है। गंदगी और पानी ने हमारा जीवन नर्क बना दिया है।

रवि

जब से रेलवे ने बाउंड्री बनाई है, जलभराव का संकट गहरा गया है। निकासी का कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं बनाया गया, जो बड़ी भूल है।

एक साल से हम इस नरक को झेल रहे हैं। अधिकारियों को हमारी सुध लेनी चाहिए। सड़क निर्माण और ड्रेनेज सिस्टम तुरंत ठीक किया जाए।

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