उत्कृष्ट प्रदर्शन के बावजूद क्यों नहीं निकल पा रहे हॉकी के जादूगर
रानी रामपाल, वंदना कटारिया, सलीमा टेटे और नवनीत कौर जैसी खिलाड़ी आज भारतीय महिला हॉकी की पहचान बन चुकी हैं। इन खिलाड़ियों ने यह साबित किया है कि संसाधन सीमित हों, तब भी हौसला मजबूत हो तो मुकाम हासिल किया जा सकता है।
अलीगढ़ की महिला हॉकी खिलाड़ी आज बुनियादी सुविधाओं के अभाव में अपने खेल को आगे बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रही हैं। प्रतिभा और मेहनत के बावजूद सुविधाओं की कमी उनके आत्मविश्वास की सबसे बड़ी परीक्षा बनती जा रही है।
हिन्दुस्तान समाचार पत्र के अभियान बोले अलीगढ़ के तहत रविवार को टीम ने जिले की महिला हॉकी खिलाड़ियों से संवाद किया। बातचीत के दौरान सामने आया कि जिले में महिला हॉकी खिलाड़ियों के लिए अभ्यास के सीमित विकल्प उपलब्ध हैं। अहिल्याबाई होल्कर स्टेडियम ही एकमात्र ऐसा स्थान है, जहां नियमित रूप से हॉकी का अभ्यास किया जाता है। स्टेडियम में हॉकी खेल के लिए कुल 44 खिलाड़ियों का पंजीयन है, जिनमें 26 पुरुष और केवल 18 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। इनमें से भी कई महिला खिलाड़ी नियमित अभ्यास नहीं कर पातीं। इसका प्रमुख कारण सुविधाओं की कमी और दूरदराज क्षेत्रों से स्टेडियम तक पहुंचने में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयां हैं।
ग्रामीण और देहात क्षेत्रों से आने वाली महिला खिलाड़ियों के लिए रोजाना स्टेडियम पहुंचना आसान नहीं है। पढ़ाई के साथ खेल को संतुलित करना उनके लिए चुनौती बना हुआ है। कई खिलाड़ी समय और संसाधनों के अभाव में अभ्यास छोड़ने को मजबूर हो जाती हैं, जबकि उनमें बेहतर प्रदर्शन की पूरी क्षमता मौजूद है। अभ्यास के दौरान मैदान की स्थिति भी खिलाड़ियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। स्टेडियम का हॉकी मैदान काफी हार्ड है, जिससे चोट लगने की आशंका बनी रहती है। अगर मैदान में मिट्टी डालकर उसे सुधारा जाए, तो खिलाड़ियों को सुरक्षित माहौल मिल सकता है और अभ्यास की गुणवत्ता भी बेहतर हो सकती है। महिला खिलाड़ियों के लिए स्वच्छ शौचालय और पीने के पानी की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है। शौचालय की स्थिति खराब होने के कारण महिला खिलाड़ी उसका उपयोग करने में असहज महसूस करती हैं। वहीं स्टेडियम परिसर में लगा वाटर कूलर लंबे समय से खराब पड़ा है, जिससे खिलाड़ियों को अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ती है।
इसके अलावा स्टेडियम की बाउंड्री वॉल भी कई स्थानों से क्षतिग्रस्त है। इससे सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है और असामाजिक तत्वों की आवाजाही की आशंका भी रहती है। ऐसे माहौल में महिला खिलाड़ियों का लंबे समय तक अभ्यास करना कठिन हो जाता है। इसके बावजूद महिला खिलाड़ी पूरे समर्पण और अनुशासन के साथ अभ्यास जारी रखने का प्रयास कर रही हैं। वे चाहती हैं कि अगर बुनियादी सुविधाओं में सुधार किया जाए, तो अलीगढ़ की बेटियां भी जिला, मंडल और राज्य स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं और भविष्य में राष्ट्रीय पहचान बना सकती हैं।
शिकायत
-अहिल्याबाई होल्कर स्टेडियम का मैदान बेहद सख्त है, जिससे अभ्यास के दौरान चोट लगने की आशंका बनी रहती है।
-स्टेडियम में महिला खिलाड़ियों के लिए शौचालय की स्थिति खराब है, जिससे अभ्यास के समय उन्हें असुविधा होती है।
-स्टेडियम परिसर में पीने के पानी की व्यवस्था ठीक नहीं है और वाटर कूलर लंबे समय से खराब पड़ा है।
-स्टेडियम की बाउंड्री वॉल कई स्थानों से टूटी हुई है, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।
-दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली महिला खिलाड़ियों के लिए स्टेडियम तक पहुंचना कठिन होता है, जिससे वे नियमित अभ्यास नहीं कर पातीं।
सुझाव
-मैदान में मिट्टी डालकर समतलीकरण कराया जाए, जिससे अभ्यास सुरक्षित और बेहतर हो सके।
-महिला शौचालय की नियमित सफाई कराई जाए और उनकी स्थिति सुधारी जाए।
-खराब पड़े वाटर कूलर को जल्द ठीक कराया जाए या स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की जाए।
-स्टेडियम की बाउंड्री वॉल की मरम्मत कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए।
-परिवहन सुविधा या वैकल्पिक अभ्यास केंद्र उपलब्ध कराए जाएं, जिससे अधिक लड़कियां हॉकी से जुड़ सकें।
बोले लोग
अहिल्याबाई होल्कर स्टेडियम ही हमारे अभ्यास का एकमात्र केंद्र है। सुविधाएं सीमित जरूर हैं, लेकिन हम फिर भी मेहनत कर रहे हैं। अगर मैदान और बुनियादी सुविधाएं बेहतर हो जाएं, तो प्रदर्शन में निश्चित रूप से सुधार देखने को मिलेगा।
प्रिया
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पढ़ाई के साथ रोज अभ्यास करना आसान नहीं होता। दूर से आने में समय और खर्च दोनों लगते हैं। इसके बावजूद हम खेल छोड़ना नहीं चाहते। थोड़ी सहूलियत मिले तो हम बेहतर तरीके से हॉकी पर फोकस कर सकेंगे।
कंचन
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स्टेडियम का मैदान काफी हार्ड है, जिससे चोट लगने का डर बना रहता है। अगर मैदान में सुधार किया जाए तो अभ्यास ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी हो सकता है, जिससे खिलाड़ियों का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।
वर्षा
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सुविधाओं की कमी जरूर है, लेकिन कोच और साथी खिलाड़ियों का सहयोग हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। हम चाहते हैं कि प्रशासन भी थोड़ा ध्यान दे, जिससे जिले से अच्छी महिला हॉकी खिलाड़ी निकल सकें।
प्रियंका रानी
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शौचालय और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं हर खिलाड़ी की जरूरत होती हैं। इनका बेहतर होना जरूरी है। अगर यह व्यवस्थाएं सुधर जाएं, तो महिला खिलाड़ियों को अभ्यास के दौरान ज्यादा परेशानी नहीं होगी।
इरम
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ग्रामीण क्षेत्र से आने वाली लड़कियों के लिए रोजाना स्टेडियम पहुंचना कठिन होता है। इसके बावजूद वे नियमित आने की कोशिश करती हैं। सुविधाएं बेहतर हों तो और ज्यादा लड़कियां हॉकी से जुड़ सकती हैं।
निकिता वर्मा
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जिले में प्रतिभा की कमी नहीं है। जरूरत है तो सिर्फ बेहतर माहौल और संसाधनों की। अगर सही मार्गदर्शन और सुविधाएं मिलें, तो अलीगढ़ की खिलाड़ी भी ऊंचे स्तर पर पहचान बना सकती हैं।
ज्योति बघेल
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कई बार अभ्यास के बाद थकान ज्यादा हो जाती है, लेकिन खेलने का जुनून हमें रुकने नहीं देता। हम उम्मीद करते हैं कि आने वाले समय में स्टेडियम की व्यवस्थाओं में सुधार होगा।
विपाशा सिंह
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सुरक्षा भी एक अहम मुद्दा है। बाउंड्री वॉल सही हो जाए तो माहौल ज्यादा सुरक्षित लगेगा। इससे अभिभावकों का भरोसा भी बढ़ेगा और लड़कियां निडर होकर अभ्यास कर सकेंगी।
प्रिया जादौन
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स्टेडियम में पंजीकृत महिला खिलाड़ियों की संख्या कम है, लेकिन जो भी खिलाड़ी आती हैं, वे पूरे मन से अभ्यास करती हैं। थोड़ी सुविधाएं बढ़ें तो संख्या भी बढ़ सकती है।
स्वाति सिंह
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हम सिर्फ शिकायत नहीं कर रहे, बल्कि समाधान की उम्मीद कर रहे हैं। अगर प्रशासन सहयोग करे तो हम जिले का नाम रोशन करने के लिए पूरी मेहनत करने को तैयार हैं।
वंदना सिंह
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हॉकी हमारे लिए सिर्फ खेल नहीं, भविष्य है। हम चाहते हैं कि सुविधाओं की कमी हमारे सपनों के बीच बाधा न बने और हमें आगे बढ़ने का बराबर मौका मिले। इस पर ध्यान देना चाहिए।
सुप्रिया शर्मा
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अभ्यास के दौरान कई बार असुविधा होती है, लेकिन हम खुद को मजबूत बनाए रखते हैं। हमें भरोसा है कि धीरे-धीरे हालात बेहतर होंगे और महिला हॉकी को भी पहचान मिलेगी। हमारा हौसला अभी जिंदा है।
शीतल
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अगर मैदान की हालत सुधर जाए तो तकनीक पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकता है। इससे खिलाड़ियों का प्रदर्शन और फिटनेस दोनों बेहतर हो सकते हैं। शौचालय की नियमित सफाई होनी चाहिए।
कुसुम चौधरी
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स्टेडियम में नियमित रूप से अभ्यास करने की आदत बनी है। बस सुविधाएं थोड़ी और मिल जाएं तो मनोबल और बढ़ेगा और खिलाड़ी लंबे समय तक जुड़े रहेंगे। जरूरत है थोड़े बदलाव की।
अंजु
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कई बार परिवार की जिम्मेदारियों के बीच समय निकालना मुश्किल होता है। फिर भी हम अभ्यास जारी रखते हैं, क्योंकि खेल ने हमें आत्मविश्वास देना सिखाया है।
वंशिका शर्मा
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हॉकी खेलने से अनुशासन और टीम भावना सीखने को मिलती है। अगर सुविधाएं बेहतर हों तो और ज्यादा लड़कियां खेल की ओर आकर्षित होंगी। लड़कियां भी जिले का नाम रोशन करेंगी।
देवकी
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छोटी-छोटी सुविधाएं भी खिलाड़ियों के लिए बहुत मायने रखती हैं। अगर पानी, शौचालय और मैदान की व्यवस्था सुधर जाए, तो अभ्यास का माहौल काफी सकारात्मक हो सकता है।
नंदनी
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हम उम्मीद करते हैं कि जिले में महिला खेलों को भी बराबर महत्व मिलेगा। इससे नई पीढ़ी की खिलाड़ी आगे आने के लिए प्रेरित होंगी। काफी लड़कियां हॉकी खेलना चाहती हैं, लेकिन जागरूकता की कमी है।
शिखा
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संघर्ष जरूर है, लेकिन हम हार मानने वाले नहीं हैं। सही अवसर मिला तो हम अपनी प्रतिभा से जिले और प्रदेश का नाम रोशन कर सकते हैं। जिला प्रशासन को खेल के लिए जागरूक करना चाहिए।
रांची
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स्टेडियम में नियमित अभ्यास करने से फिटनेस और खेल दोनों में सुधार होता है। सुविधाएं बेहतर हों तो परिणाम भी बेहतर देखने को मिलेंगे। अगर हॉकी की लीग शुरु हो जाए, तो स्थानीय स्तर पर खिलाड़ी मजबूत होंगे।
शिल्पी पाल
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हम प्रशासन से ज्यादा नहीं, सिर्फ जरूरी सुविधाओं की उम्मीद रखते हैं। अगर यह मिल जाएं, तो अलीगढ़ की महिला हॉकी खिलाड़ी भी बड़े मंच पर अपनी पहचान बना सकती हैं।
शैलेश यादव
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