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प्रतिमाओं के संग विकास की भी बात हो

संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के सम्मान और उनकी प्रतिमाओं की सुरक्षा को लेकर प्रदेश सरकार ने बड़ा और दूरगामी फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश भर में स्थापित डॉ. आंबेडकर की सभी मूर्तियों की सुरक्षा के लिए व्यापक और स्थायी इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

Wed, 31 Dec 2025 05:00 PMSunil Kumar हिन्दुस्तान
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प्रतिमाओं के संग विकास की भी बात हो

अलीगढ़ में भी इस फैसले के तहत कार्रवाई शुरू हो चुकी है। लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया है। वहीं उनका कहना है कि मूर्तियों के साथ मलिन बस्तियों के विकास की बात भी होनी चाहिए थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश सरकार डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाओं की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने जा रही है। इसके तहत प्रदेश के सभी जिलों में जहां-जहां बाबा साहेब की मूर्तियां स्थापित हैं, वहां बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया जाएगा। साथ ही प्रत्येक प्रतिमा के ऊपर छत्र लगाए जाएंगे, जिससे मूर्तियां मौसम के प्रभाव और संभावित क्षति से सुरक्षित रह सकें। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी जिलों में प्रतिमाओं की सूची तैयार कर उनका तत्काल सर्वे कराया जाए। जिससे निर्माण कार्य बिना किसी देरी के शुरू किया जा सके। इस संबंध में शासनादेश भी जारी कर दिया गया है, जिसके अनुपालन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सरकार का मानना है कि संविधान निर्माता की प्रतिमाओं की सुरक्षा केवल प्रतीकात्मक कदम नहीं है, यह उस सोच का हिस्सा है जिसके तहत संविधान के आदर्शों और मूल्यों को व्यवहार में उतारने का प्रयास किया जा रहा है।

अलीगढ़ में भी इस शासनादेश के तहत नगर निगम सीमा में स्थापित डॉ. भीमराव आंबेडकर की मूर्तियों का सर्वे शुरू कर दिया गया है। सर्वे के बाद प्रतिमाओं के ऊपर छत्र और आसपास सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक निर्माण कार्य कराया जाएगा। प्रशासनिक स्तर पर इसे लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं, जिससे शासन की मंशा के अनुरूप कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा हो सके।

हिन्दुस्तान समाचार पत्र के अभियान बोले अलीगढ़ के तहत मंगलवार को टीम ने सराय लवरिया में लोगों से संवाद किया। लोगों ने कहा कि प्रदेश सरकार का यह कदम सामाजिक समरसता को मजबूत करने और दलित समाज के सम्मान की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लोगों ने कहा कि बीते वर्षों में कई बार शरारती तत्वों द्वारा प्रतिमाओं को क्षति पहुंचाने की घटनाएं सामने आई हैं। जिससे सामाजिक सौहार्द पर असर पड़ा है। ऐसे में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था से न केवल इन घटनाओं पर अंकुश लगेगा, संविधान निर्माता के प्रति सम्मान को शासकीय स्तर पर और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा। लोगों ने कहा कि यह मुद्दा शहर और देहात दोनों क्षेत्रों में चर्चा का विषय बना हुआ है। सरकार की यह पहल न सिर्फ सुरक्षा के लिहाज से अहम है, यह संदेश भी देती है कि प्रदेश सरकार संविधान, सामाजिक न्याय और कमजोर वर्गों के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

बोले लोग

यह फैसला केवल मूर्तियों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। यह बाबा साहब के विचारों और संविधान के सम्मान की भी रक्षा है। पहले कई बार मूर्तियों को नुकसान पहुंचाकर समाज में तनाव फैलाया गया, ऐसे में स्थायी सुरक्षा जरूरी थी।

ललित कांत

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सरकार का यह कदम समाज के लिए आत्मसम्मान से जुड़ा है। जब संविधान निर्माता की प्रतिमा सुरक्षित होगी, तभी समाज को यह संदेश जाएगा कि सरकार संविधान और उसके रचयिता को सर्वोच्च मानती है।

रजत लहरी

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मूर्तियों के चारों ओर बाउंड्री वॉल और छत्र लगने से असामाजिक तत्वों पर रोक लगेगी। इससे शांति बनी रहेगी और बार-बार होने वाले विवाद भी खत्म होंगे। इसी प्रकार मलिन बस्तियों का भी उद्धार होना चाहिए।

शशिपाल सोनी

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डॉ. आंबेडकर सिर्फ किसी एक वर्ग के नहीं, पूरे देश के मार्गदर्शक हैं। उनकी प्रतिमाओं की सुरक्षा करना सरकार का दायित्व है। यह फैसला देर से आया, लेकिन सही दिशा में आया है।

मनीष कुमार

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मूर्तियों के साथ-साथ अगर बस्तियों की दुर्दशा भी सुधार दी जाए तो और अच्छा होगा। अगर यह योजना सही ढंग से लागू हो गई तो आने वाली पीढ़ियों में भी सम्मान की भावना बनी रहेगी।

विवेक

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कई बार देखा गया है कि मूर्तियों को नुकसान पहुंचाकर माहौल खराब किया जाता है। अब स्थायी इंतजाम होने से ऐसी घटनाओं पर लगाम लगेगी और प्रशासन को भी राहत मिलेगी।

लोकेश

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बाबा साहब के नाम पर राजनीति बहुत होती है। लेकिन उनके सम्मान की रक्षा के लिए ठोस काम कम हुए हैं। इस फैसले से पहली बार सरकार की गंभीरता नजर आ रही है।

विश्वनाथ

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मूर्तियों पर छत्र लगाने से मौसम का असर भी नहीं पड़ेगा। बारिश, धूप और समय के साथ होने वाली क्षति से प्रतिमाएं सुरक्षित रहेंगी, जो पहले अक्सर उपेक्षित रहती थीं। हमारी बस्तियों की भी हालत सुधारी जाएं।

धर्मेंद्र

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यह केवल सुरक्षा का मुद्दा नहीं है। यह सामाजिक सौहार्द से भी जुड़ा है। जब ऐसी घटनाएं रुकेंगी तो समाज में आपसी विश्वास और भाईचारा मजबूत होगा। कई स्थानों पर लोग आपसी सहयोग से मूर्तियां लगवा रहे हैं।

चीकू

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सरकार को चाहिए कि सर्वे के बाद काम में कोई ढिलाई न हो। कई योजनाएं सर्वे तक ही सीमित रह जाती हैं, लेकिन यह मामला भावनाओं और सम्मान से जुड़ा है।

कृष्ण गोपाल

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डॉ. आंबेडकर ने संविधान के जरिए सभी को समान अधिकार दिए। उनकी प्रतिमा की सुरक्षा करना उसी संविधान की रक्षा जैसा है। यह संदेश हर जिले तक जाना चाहिए।

शेखर

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पहले जब मूर्तियों के साथ छेड़छाड़ होती थी, तो आम लोग खुद को असहाय महसूस करते थे। अब सरकारी सुरक्षा से लोगों का भरोसा सिस्टम पर बढ़ेगा।

शांति

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यह फैसला ग्रामीण इलाकों के लिए ज्यादा जरूरी है, जहां अक्सर मूर्तियां खुले में होती हैं। वहां सुरक्षा व्यवस्था कमजोर रहती है, ऐसे में बाउंड्री वॉल बहुत कारगर साबित होगी।

बिरमा देवी

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सरकार अगर इस योजना को पूरी ईमानदारी से लागू करती है तो यह आने वाले समय में मिसाल बनेगी। इससे यह भी तय होगा कि सामाजिक प्रतीकों का सम्मान कैसे किया जाए।

कांति

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बाबा साहब की मूर्तियां सिर्फ पत्थर की नहीं हैं, ये सामाजिक चेतना की प्रतीक हैं। इनकी सुरक्षा का मतलब है उस चेतना की रक्षा करना, जिसे संविधान ने जन्म दिया।

मीना कुमारी

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कई बार छोटी-सी घटना बड़े विवाद का कारण बन जाती है। अगर मूर्तियां सुरक्षित रहेंगी तो ऐसे विवाद अपने आप खत्म हो जाएंगे और प्रशासनिक ऊर्जा भी बचेगी।

विमलेश

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यह कदम केवल दलित समाज के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए सकारात्मक है। संविधान सबका है और उसके निर्माता का सम्मान भी सबकी जिम्मेदारी है।

मीना

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पहले स्थानीय स्तर पर संसाधनों की कमी बताकर सुरक्षा टाल दी जाती थी। अब जब सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। इसके अलावा बस्तियों का भी विकास होना चाहिए।

सोनू

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अगर इसके साथ जागरूकता अभियान भी चलाया जाए, तो लोग खुद भी मूर्तियों की रक्षा को अपनी जिम्मेदारी समझेंगे। केवल दीवार बनाना ही काफी नहीं है। सुरक्षा की भी जिम्मेदारी ली जाए।

निरोत्तम

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यह फैसला राजनीतिक नहीं, संवैधानिक सोच का प्रतीक है। इससे यह संदेश जाता है कि सरकार संविधान को केवल किताब में नहीं, व्यवहार में भी मानती है। लोगों को भी थोड़ा जागरूक होना चाहिए।

टाइगर

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डॉ. आंबेडकर के अपमान से समाज में जो पीड़ा होती थी, अब उसमें कमी आएगी। सुरक्षा व्यवस्था से लोगों को मानसिक संतोष भी मिलेगा। लेकिन, हमारी बस्तियों में आज भी गंदगी, टूटी सड़कें परेशानी बनी हुई हैं।

प्यारेलाल

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सरकार ने सही दिशा में कदम बढ़ाया है। अब जरूरत है कि इसे केवल घोषणा न रहने दिया जाए। हर जिले में धरातल पर दिखाई दे, तभी इसका वास्तविक लाभ मिलेगा।

राकेश

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