यूपी पंचायत चुनाव से पहले इस जिले में गांव वालों को सौंपी गई बड़ी जिम्मेदारी, 248 प्रधान बने योद्धा
आरटीओ विभाग के अधिकारियों ने ग्राम प्रधानों को शपथ दिलाई कि वे हादसों की स्थिति में घायलों की मदद से पीछे नहीं हटेंगे। प्रधानों को यह भी बताया गया कि दुर्घटना के बाद ‘गोल्डन आवर’ कितना अहम होता है। घायलों को समय पर प्राथमिक मदद मिलने से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

यूपी में पंचायत चुनाव की तैयारियां जोर-शोर से जारी हैं। इस बीच गोरखपुर में परिवहन विभाग ने गांववालों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। विभाग ने बढ़ते सड़क हादसों और उनसे होने वाली मौतों पर अंकुश लगाने के लिए जमीनी स्तर पर ठोस पहल शुरू की है। यूपी के गोरखपुर में अब सड़क दुर्घटना होने पर सबसे पहले मौके पर पहुंचे ग्रामीण घायलों का रेस्क्यू करेंगे। इसके लिए राष्ट्रीय और राज्य मार्गों से जुड़े 248 गांवों के ग्राम प्रधानों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षित प्रधान अपने-अपने गांवों में लोगों को सड़क सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक करेंगे, वहीं आरटीओ विभाग पूरे अभियान की मॉनिटरिंग करेगा।
प्रशिक्षण के दौरान आरटीओ विभाग के अधिकारियों ने ग्राम प्रधानों को शपथ दिलाई कि वे हादसों की स्थिति में घायलों की मदद से पीछे नहीं हटेंगे। प्रधानों को यह भी बताया गया कि दुर्घटना के बाद ‘गोल्डन आवर’ कितना अहम होता है और समय पर प्राथमिक मदद मिलने से कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। जरूरत पड़ने पर पुलिस और एंबुलेंस को सूचना देने के साथ घायलों को नजदीकी अस्पताल पहुंचाने की जिम्मेदारी भी गांव स्तर पर निभाई जाएगी।
आंकड़ों के मुताबिक सड़क दुर्घटनाओं के मामले में गोरखपुर देश के संवेदनशील जिलों में शामिल है। यहां हर साल करीब 1000 से 1200 सड़क हादसे होते हैं, जिनमें लगभग 500 लोगों की जान चली जाती है। आरटीओ विभाग का मानना है कि अधिकतर मौतें समय पर इलाज न मिलने और लोगों के डर या झिझक के कारण होती हैं।
नई कार्ययोजना के तहत गांव में स्थित स्कूलों में बच्चों को भी सड़क सुरक्षा के नियम बताए जाएंगे ताकि वे अपने परिवार को समझा सकें। सरकार घायलों को अस्पताल पहुंचाने वालों को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दे रही है। वहीं, जिन क्षेत्रों में हादसों में कमी आएगी, वहां के ग्राम प्रधानों को सम्मानित किया जाएगा।
क्या बोले एआरटीओ
एआरटीओ अरुण कुमार ने कहा कि पहले चरण में 248 ग्राम प्रधानों को प्रशिक्षित किया गया है। विभाग को पूरी उम्मीद है कि जनवरी में पिछले वर्षों की तुलना में सड़क हादसों में उल्लेखनीय कमी आई है।




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