अध्ययनः कोविड के बाद तीन गुना बढ़ा 'वैस्कुलर नेक्रोसिस'
कूल्हे की हड्डी तक खून की सप्लाई बंद होना, चोट लगना, ऊतकों का धीरे-धीरे मरना। ऐसा होने पर हड्डी कमजोर होकर ढह जाती है। कूल्हा खराब हो जाता है। इसे वैस्कुलर नेक्रोसिस (एवीएन) कहा जाता है। कोविड संक्रमण के बाद यह दिक्कत तीन गुना बढ़ गई है।

कूल्हे की हड्डी तक खून की सप्लाई बंद होना, चोट लगना, ऊतकों का धीरे-धीरे मरना। ऐसा होने पर हड्डी कमजोर होकर ढह जाती है। कूल्हा खराब हो जाता है। इसे वैस्कुलर नेक्रोसिस (एवीएन) कहा जाता है। कोविड संक्रमण के बाद यह दिक्कत तीन गुना बढ़ गई है।
फतेहाबाद रोड स्थित होटल में यूपी आर्थोपेडिक एसोसिएशन और आगरा आर्थोपेडिक सोसायटी की 50वीं गोल्डन जुबली कांफ्रेंस यूपीकान-26 के दौरान 'एम्स रायपुर' के प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डा. आलोक अग्रवाल ने हिन्दुस्तान से खास बातचीत में इसे साझा किया। उन्होंने बताया कि कोविड संक्रमण के बाद कूल्हे की ओर रक्त का संचार कम होने लगा है। खून के थक्के खुद ही बनने लगे हैं। इससे खून आगे नहीं बढ़ पाता। शराब, तंबाकू या किसी भी तरह के नशे की लत है तो थक्के तेजी से बनते हैं। इस तरह के कुछ मामलों में मरीजों के हाथ और पैर भी काटने पड़े हैं। सभी तरह की हिप सर्जरी में इस तरह के 10 फीसदी मामले हैं। करीब 60 फीसदी पुरुष और 40 फीसदी महिलाएं इस बीमारी का शिकार हो रही हैं। सबसे बड़ी बात यह कि युवाओं में यह दिक्कत सर्वाधिक है। सबसे ज्यादा 25 से 35 साल तक के लोग इससे प्रभावित हैं। पहली, दूसरी स्टेज पर स्टेम सेल से इलाज होता है। इसके बाद प्रत्यारोपण ही एकमात्र विकल्प रह जाता है।
पीक बोन मास की लगातार क्षति
लोगों में पीक बोन मास की लगातार क्षति हो रही है। ये 25-30 साल की उम्र के दौरान बनती है। तब शरीर की हड्डियां सबसे ज्यादा मजबूत और घनी होती हैं। विटामिन-डी की कमी, फास्ट फूड, दूध न पीने से कई तरह के नुकसान होने लगते हैं। इनमें नाक-नी, बो-लेग, साइड स्वीप और बाद में आस्टियोपोरोसिस हो जाता है। सभी जोड़ों में दर्द होने लगता है।
जीना चढ़ने, भागने से घुटने खराब
वजन कम करने के लिए हैवी एक्सरसाइज जैसे तेज रफ्तार में जीना चढ़ना-उतरना, साइकिल चलाना, रफ्तार से भागने का सबसे ज्यादा लोड घुटनों पर पड़ता है। देशी टायलेट पर बैठने पर भी यही होता है। घुटने मुड़ते रहने पर कटोरे जल्द घिस जाते हैं। तरल तत्व खत्म होते जाते हैं। ऐसा न करें, राहत के लिए 45 मिनट सुबह की धूप और सप्लीमेंट लेना जरूरी है।
10 बार उठक-बैठक से बड़ी राहत
किसी को अगर घुटनों में दिक्कत होने लगी है तो वह सुबह हाथ आगे करके बैठे और उठे। ऐसा 10 बार करने पर हड्डियों को मांसपेशियों से मिलने वाले खून की सप्लाई में तेजी आती है। मांसपेशियों की मरम्मत हो जाती है। हड्डियों को उनकी जरूरत के मुताबिक सही समय पर पर्याप्त खून मिल जाता है। इस करसत को आराम से करें, बाद में स्पीड बढ़ा सकते हैं।
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