After Sambhal and Aligarh now a 50 year old temple has been found in Bulandshahr संभल और अलीगढ़ के बाद अब बुलंदशहर में मिला 50 साल पुराना मंदिर, 1990 के दंगों के बाद से यहां नहीं होती है पूजा, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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संभल और अलीगढ़ के बाद अब बुलंदशहर में मिला 50 साल पुराना मंदिर, 1990 के दंगों के बाद से यहां नहीं होती है पूजा

यूपी के बुलंदशहर जिले में भी अब 50 साल पुराना बंद पड़ा मंदिर मिला है। हिंदू संगठनों ने प्रशासन से मंदिर का जीर्णोद्धार करने का आग्रह किया है। विहिप और जाटव विकास मंच क पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन से मंदिर का जीर्णोद्धार कराने का अनुरोध किया ताकि धार्मिक गतिविधियों को फिर से शुरू किया जा सके।

Sun, 22 Dec 2024 05:40 PMPawan Kumar Sharma बुलंदशहर, भाषा
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संभल और अलीगढ़ के बाद अब बुलंदशहर में मिला 50 साल पुराना मंदिर, 1990 के दंगों के बाद से यहां नहीं होती है पूजा

संभल, काशी और अलीगढ़ के बाद अब यूपी के बुलंदशहर जिले में भी 50 साल पुराना बंद पड़ा मंदिर मिला है। हिंदू संगठनों ने प्रशासन से मंदिर का जीर्णोद्धार करने का आग्रह किया है। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और जाटव विकास मंच के पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन से मंदिर का जीर्णोद्धार कराने का अनुरोध किया ताकि धार्मिक गतिविधियों को फिर से शुरू किया जा सके।

विहिप के मेरठ प्रांत के पदाधिकारी सुनील सोलंकी ने बताया कि खुर्जा स्थित यह मंदिर साल 1990 से बंद है। क्योंकि इस क्षेत्र में रहने वाले हिंदू परिवार पलायन कर गए थे। सोलंकी ने जोर देकर कहा कि जिला प्रशासन को एक ज्ञापन दिया गया है। जिसमें पूजा कराने के लिए मंदिर की सफाई और सौंदर्यीकरण का अनुरोध किया गया है। जाटव विकास मंच के अध्यक्ष कैलाश भागमल गौतम ने बताया कि मंदिर लगभग 50 साल पुराना है, जिसे मूल रूप से जाटव समुदाय के सदस्यों द्वारा बनाया गया था।

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उन्होंने कहा कि वर्ष 1990 के दंगों के बाद समुदाय ने पलायन कर दिया और तब से मंदिर बंद है। मंच ने विहिप के साथ समन्वय में मंदिर की पूजा गतिविधियों के पुनरुद्धार का औपचारिक रूप से अनुरोध किया है। उधर, खुर्जा के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) दुर्गेश सिंह ने सलमा हाकन मोहल्ले में मंदिर के होने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि जाटव समुदाय ने मंदिर का निर्माण किया था और वहां पूज भी की थी हालांकि समुदाय के पलायन करने के बाद मूर्तियों को जाटव समुदाय के एक परिवार के सदस्य द्वारा कथित तौर पर ले जाया गया और पास की एक नदी में विसर्जित कर दिया गया। मंदिर की संरचना बरकरार है और स्थल को लेकर कोई विवाद नहीं है।

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