After 10 years the police officer surrendered in court Kushinagar 10 साल बाद दारोगा ने कोर्ट में किया सरेंडर, बच्ची से छेड़छाड़ कर हुआ था फरार, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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10 साल बाद दारोगा ने कोर्ट में किया सरेंडर, बच्ची से छेड़छाड़ कर हुआ था फरार

कुशीनगर कोर्ट के प्रयासों से आखिरकार फरार दरोगा ने दस साल बाद मंगलवार को न्यायालय में सरेंडर कर दिया। उसकी गिरफ्तारी को लेकर अदालत ने डीजीपी तक कोई कई बार पत्र लिखा मगर पुलिस उदासीन बनी रही।

Wed, 17 Dec 2025 10:19 AMPawan Kumar Sharma लाइव हिन्दुस्तान, कुशीनगर
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10 साल बाद दारोगा ने कोर्ट में किया सरेंडर, बच्ची से छेड़छाड़ कर हुआ था फरार

यूपी के कुशीनगर में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट दिनेश कुमार की अदालत के प्रयासों से आखिरकार फरार दरोगा ने दस साल बाद मंगलवार को न्यायालय में सरेंडर कर दिया। उसकी गिरफ्तारी को लेकर अदालत ने डीजीपी तक कोई कई बार पत्र लिखा मगर पुलिस उदासीन बनी रही। अदालत ने कहा है कि इस गंभीर मामले में थानाध्यक्ष कसया को बीते 4 दिसंबर को तलब कर फरार आरोपी के बारे में प्रतिउत्तर देने का आदेश दिया गया था मगर वह न खुद उपस्थित हुए और न ही लिखित रूप से उपस्थित न होने की परिस्थितियों की जानकारी दी। यह कृत्य यह दर्शित करता है कि वह न्यायालय के आदेश की जानबूझकर के अवहेलना किये हैं।

मामला कसया थाने में 2016 में दर्ज मुकदमे से संबंधित है। पीड़ित ने कसया थाने के दरोगा तौफिक अहमद के विरुद्ध 2 नवंबर 2016 को इस आशय का अभियोग पंजीकृत कराया था कि उस दिन 5 बजे दरोगा उसके घर आया, उससे ठंडा पानी मांगा। घर के एक कमरे में उसकी 8 साल की बेटी बैठकर पढ़ रही थी। जब वह पानी लेने चला गया तो दरोगा ने बेटी को अकेला देखकर उससे छेड़खानी की। बेटी रोने लगी, जब वह कमरे में पहुंचा तो दरोगा दरवाजे से भागा, लेकिन फिसल कर गिर जाने के कारण उसको भी चोटें आयीं। उसके खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत ने अभियुक्त तौफिक अहमद की जमानत 17 फरवरी 2017 को स्वीकार की। लेकिन अभियुक्त इसके बाद से ही फरार हो गया। इस मामले में शासन की ओर से पैरवी विशेष शासकीय अधिवक्ता फूलबदन ने की।

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अदालत ने पुलिस पर की गंभीर टिप्पणी

कोर्ट ने अभियुक्त को हाजिर करने के लिए पिछले 14 नवंबर 2024 से लगातार समय समय पर पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजा। पुलिस अधीक्षक कुशीनगर को भी बार बार पत्र भेजा गया मगर कोई अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हुआ। इसके बाद 4 दिसंबर को कसया के थानेदार को अदालत ने कारण बताने के लिए तलब किया मगर न खुद आए और न ही इसके लिखित करण बताया गया। अदालत ने कहा है कि यह समस्त कृत्य कसया पुलिस की उदासनीता को परिलक्षित करने के लिए पर्याप्त है, कि किसी पत्रावली में न्यायालय के द्वारा बार बार आदेशिका जारी होने के बाद भी पुलिस के द्वारा कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जाता है।

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