RPSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, रद्द किया हाईकोर्ट का आदेश
इससे पहले HC की एकल न्यायाधीश और डिवीजन बेंच दोनों ने उम्मीदवारों के पक्ष में फैसला सुनाया था। कोर्ट का तर्क था कि चूंकि छात्रों ने जनवरी 2025 में होने वाली प्रारंभिक परीक्षा से काफी पहले यानी अगस्त 2024 तक अपनी डिग्री हासिल कर ली थी, इसलिए उन्हें परीक्षा में बैठने दिया जाना चाहिए।

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। इस दौरान उच्चतम अदालत ने स्पष्ट किया कि आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली किसी भी भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि तक आवश्यक शैक्षणिक योग्यता (डिग्री) होना अनिवार्य है।
इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने राजस्थान हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें कानून (लॉ) के अंतिम वर्ष के छात्रों को सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) की भर्ती परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी गई थी।
भर्ती प्रक्रिया में अनिश्चितता बर्दाश्त नहीं
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की अपील को स्वीकार करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि यदि उम्मीदवारों को इंटरव्यू तक योग्यता हासिल करने की छूट दी गई, तो इससे चयन प्रक्रिया में अनिश्चितता पैदा होगी। उन्होंने कहा, 'अगर उम्मीदवारों की इस दलील को मान लिया जाए कि साक्षात्कार से पहले किसी भी स्तर पर योग्यता प्राप्त करने वालों को पात्र माना जाए, तो इससे चयन प्रक्रिया जटिल हो जाएगी। यह RPSC पर एक अनावश्यक प्रशासनिक बोझ डालेगा कि वह बार-बार यह ट्रैक करे कि किसने कब डिग्री हासिल की।'
हाईकोर्ट के एक अन्य तर्क से भी जताई असहमति
फैसला सुनाते हुए बेंच ने कहा कि वह हाई कोर्ट के इस तर्क से भी सहमत नहीं है कि जहां दिशानिर्देशों की दो व्याख्याएं संभव हों, वहां उम्मीदवारों के पक्ष में वाली व्याख्या को अपनाया जाना चाहिए। बेंच ने कहा, 'उम्मीदवारों के समूह को बढ़ाने या प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के विचारों पर आधारित ऐसा दृष्टिकोण तब नहीं अपनाया जा सकता, जब विज्ञापन की भाषा केवल एक स्पष्ट और असंदिग्ध व्याख्या की अनुमति देती हो।' साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि निर्धारित पात्रता शर्त स्पष्ट रूप से प्रासंगिक समय पर डिग्री होने की मांग करती है।
APO के 181 पदों के लिए जारी विज्ञापन से जुड़ा है मामला
यह विवाद 7 मार्च, 2024 को RPSC द्वारा APO के 181 पदों के लिए जारी विज्ञापन से जुड़ा है। इसके लिए आवश्यक योग्यता एक पेशेवर लॉ डिग्री (LL.B) तय की गई थी। हालांकि लॉ के कई ऐसे छात्रों ने भी इन पदों के लिए आवेदन कर दिया, जो कि अपने कोर्स के अंतिम वर्ष में थे और जिन्हें अभी तक अपनी डिग्री नहीं मिली थी। इसी बीच नवंबर 2024 में, RPSC ने प्रेस नोट जारी कर स्पष्ट किया कि केवल उन्हीं आवेदकों को इसके योग्य माना जाएगा, जिनके पास आवेदन की अवधि की आखिरी तारीख तक डिग्री थी।
कोर्ट ने पलट दिया हाईकोर्ट का दिया फैसला
इससे पहले राजस्थान हाई कोर्ट की एकल न्यायाधीश और डिवीजन बेंच दोनों ने APO परीक्षा के उम्मीदवारों के पक्ष में फैसला सुनाया था। हाई कोर्ट का तर्क था कि चूंकि छात्रों ने जनवरी 2025 में होने वाली प्रारंभिक परीक्षा से काफी पहले यानी 22 अगस्त 2024 तक अपनी डिग्री हासिल कर ली थी, इसलिए उन्हें परीक्षा में बैठने दिया जाना चाहिए। हालांकि अब इस बारे में फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की इस व्याख्या से असहमति जताई।




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