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राजस्थान के रोजगार दफ्तरों में 22 लाख युवा दर्ज, 5 साल में किसी की नहीं लगी सरकारी नौकरी

राजस्थान में बेरोजगारी को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी के मुताबिक, राज्य में बीते 5 सालों में रोजगार दफ्तरों के जरिए एक भी सरकारी नौकरी नहीं मिली।

Tue, 17 March 2026 03:45 PMRatan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, जयपुर
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राजस्थान के रोजगार दफ्तरों में 22 लाख युवा दर्ज, 5 साल में किसी की नहीं लगी सरकारी नौकरी

राजस्थान में बेरोजगारी को लेकर एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी के मुताबिक, राज्य में बीते 5 सालों में रोजगार दफ्तरों के जरिए एक भी सरकारी नौकरी नहीं मिली। जबकि इस दौरान इन रोजगार दफ्तरों में 22 लाख से ज्यादा युवाओं ने रजिस्ट्रेशन किया।

रोजगार कार्यालयों में 22,21,317 बेरोजगार रजिस्टर

रोजगार निदेशालय द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 14 जनवरी तक राज्य के विभिन्न जिला रोजगार कार्यालयों में कुल 22,21,317 बेरोजगार रजिस्टर हैं। इनमें 13.08 लाख पुरुष, 9.12 लाख महिलाएं और 989 अन्य श्रेणी के उम्मीदवार शामिल हैं। यह आंकड़ा राज्य में बढ़ती बेरोजगारी की गंभीर स्थिति को दर्शाता है।

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जानिए कहां-कितने बेरोजगार रजिस्टर हैं

जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो जयपुर में सबसे अधिक 2.51 लाख बेरोजगार रजिस्टर हैं। इसके बाद अलवर (1.53 लाख), नागौर (1.34 लाख), झुंझुनूं (1.22 लाख) और जोधपुर (86,320) का स्थान है। वहीं जैसलमेर (12,031) और प्रतापगढ़ (14,047) में सबसे कम पंजीकरण दर्ज किया गया है।

सबसे ज्यादा बेरोजगार OBC वर्ग के

श्रेणी के अनुसार देखें तो अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के उम्मीदवारों की संख्या सबसे ज्यादा है। इसके बाद सामान्य, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य श्रेणियों के उम्मीदवार शामिल हैं।

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कभी 3, कभी 23, कभी 71 लोगों को मिली नौकरी

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि प्राइवेट सेक्टर में भी रोजगार के मौके कम होते जा रहे हैं। रोजगार कार्यालयों की पहल, जैसे जॉब फेयर और कंपनियों के साथ मेल-जोल के जरिए 2021 में 86, 2022 में 825, 2023 में केवल 3, 2024 में 23 और 2025 में 71 उम्मीदवारों को ही नौकरी मिल सकी।

लगातार बिगड़ रहे हैं हालात

RTI आवेदक चंद्रशेखर गौर ने कहा कि पिछले दो दशकों में प्राइवेट सेक्टर में भारी निवेश हुआ है, लेकिन रोजगार निदेशालय के माध्यम से मिलने वाली नौकरियां बेहद कम हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी क्षेत्र में स्थायी और अस्थायी नौकरियों की प्रक्रिया लगभग ठप हो गई है और रोजगार कार्यालयों को सक्रिय करने की जरूरत है।

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