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राजस्थान में बच्चों के शेरू, शैतान जैसे नाम नहीं चलेंगे; स्कूलों में चलेगा अभियान

राजस्थान सरकार ने एक अभियान के जरिए स्कूलों में दर्ज अपमानजनक और अजीबोगरीब नाम बदलने की पहल की है। इसका उद्देश्य छात्रों को शर्मिंदगी से बचाकर उनका आत्मविश्वास बढ़ाना है। विभाग ने हजारों अच्छे नामों की सूची तैयार की है।

Tue, 14 April 2026 09:24 PMKrishna Bihari Singh भाषा, जयपुर
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राजस्थान में बच्चों के शेरू, शैतान जैसे नाम नहीं चलेंगे; स्कूलों में चलेगा अभियान

राजस्थान सरकार ने एक अभियान शुरू किया है। इसके तहत स्कूलों में बच्चों के अपमानजनक नामों को बदला जाएगा। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के अनुसार, ऐसे नामों से बच्चों में हीनभावना पैदा होती है। यही नहीं शेरू, शैतान जैसे नामों से बच्चों आत्मविश्वास कम होता है। इस पहल के तहत करीब 3,000 सार्थक नामों की सूची तैयार की गई है। इन नामों को अभिभावकों के साथ साझा किया जाएगा। स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि वे पीटीएम के माध्यम से माता-पिता को सकारात्मक और सुंदर नाम चुनने के लिए प्रेरित करें।

सरकार ने शुरू किया सार्थक नाम का अभियान

सूबे शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बताया कि राजस्थान सरकार ने स्कूल रजिस्टरों से शेरू और शैतान जैसे अजीब या अपमानजनक नामों को हटाने के लिए सार्थक नाम अभियान शुरू किया है ताकि छात्रों को मजाक और कम आत्मसम्मान जैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।

अशोभनीय नाम से बच्चों में आती है हीन भावना

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि नाम बच्चे की पहचान और व्यक्तित्व बनाने में बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। अक्सर भविष्य के असर को सोचे बिना ही ऐसे अशोभनीय नाम रख दिए जाते हैं। कई बार ये नाम अनजाने में या सामाजिक वजहों से रखे जाते हैं लेकिन बाद में इन नाम के कारण बच्चों के मन में हीनभावना आने लगती है।

अच्छे नाम के लिए प्रोत्साहित करने के आदेश

मदन दिलावर ने आगे कहा कि बच्चे जब बड़े होते हैं तो ऐसे नाम कभी-कभी उन्हें शर्मिंदा कर सकते हैं। उनके आत्मसम्मान को चोट पहुंचा सकते हैं। शिक्षा विभाग और उच्चाधिकारियों की ओर से स्कूलों को यह निर्देश दिया गया है कि वे ऐसे छात्रों को पहचानें और अभिभावक-शिक्षक बैठक व स्कूल मैनेजमेंट कमेटियों के जरिए बातचीत करके माता पिता को बच्चों के अच्छे नाम रखने के लिए प्रोत्साहित करें।

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अपमानजनक शब्दों को हटाना बहुत जरूरी

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी रिकॉर्ड से जाति-आधारित या अपमानजनक शब्दों को हटाना बहुत जरूरी है। ऐसे शब्दों को दर्ज नहीं किया जाना चाहिए जिन्हें इतिहास में अपमान के तौर पर इस्तेमाल किया गया है और उनकी जगह हमेशा सम्मानजनक शब्दों का ही प्रयोग होना चाहिए।

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नए एडमिशन के समय भी रखा जाएगा ध्यान

वहीं अधिकारियों ने बताया कि छात्रों के माता-पिता नए एडमिशन के समय दी गई लिस्ट से नाम चुन सकेंगे। वहीं पुराने छात्र तय नियम के अनुसार नाम बदलने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रखी जाएगी। सूबे के बड़े अधिकारी इस काम पर नजर रखेंगे। यही नहीं अधिकारियों की ओर से समय-समय पर इस पूरे अभियान और प्रक्रिया की समीक्षा और जांच भी की जाएगी।

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