यूपी के 17 वर्षीय छात्र ने कोटा में की आत्महत्या, इंजीनियरिंग की कर रहा था तैयारी
देशभर के लाखों छात्रों के सपनों को उड़ान देने वाली शिक्षा नगरी कोटा में एक बार फिर एक युवा जिंदगी की दुखद समाप्ति ने सभी को झकझोर दिया है। इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे 17 वर्षीय छात्र का शव उसके कमरे में फंदे से लटका मिला।

देशभर के लाखों छात्रों के सपनों को उड़ान देने वाली शिक्षा नगरी कोटा में एक बार फिर एक युवा जिंदगी की दुखद समाप्ति ने सभी को झकझोर दिया है। इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे 17 वर्षीय छात्र का शव उसके कमरे में फंदे से लटका मिला। घटना जवाहर नगर थाना क्षेत्र की है, जहां छात्र किराए के कमरे में रहकर पढ़ाई कर रहा था।
मृतक की पहचान उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले के निवासी आर्यन ओझा के रूप में हुई है। आर्यन पिछले दो वर्षों से कोटा में रहकर इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था। गुरुवार को जब कमरे का दरवाजा काफी देर तक नहीं खुला तो आसपास के लोगों को संदेह हुआ। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और कमरे का दरवाजा खुलवाया। अंदर का दृश्य देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया। छात्र का शव फंदे से लटका हुआ मिला।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस, जांच शुरू
जवाहर नगर थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर एमबीएस अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है। मामले की जांच कर रहे एएसआई जवाहरलाल ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आत्महत्या का मामला सामने आया है। हालांकि छात्र ने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया, इसका कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है।
पुलिस को छात्र के कमरे से कोई सुसाइड नोट भी बरामद नहीं हुआ है। ऐसे में जांच का फोकस छात्र के मोबाइल फोन, उसकी दिनचर्या और करीबी दोस्तों से बातचीत पर है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि घटना से पहले छात्र किसी प्रकार के मानसिक तनाव या अन्य व्यक्तिगत परेशानी से गुजर रहा था या नहीं।
परिजनों को दी गई सूचना, पोस्टमार्टम का इंतजार
घटना की जानकारी मिलते ही छात्र के परिजनों को सूचित कर दिया गया है। पुलिस के अनुसार परिजनों के कोटा पहुंचने के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। छात्र की असमय मौत की खबर से परिवार में शोक का माहौल है। वहीं कोटा में पढ़ाई कर रहे अन्य छात्रों और कोचिंग संस्थानों के बीच भी इस घटना को लेकर चर्चा बनी हुई है।
शिक्षा नगरी पर फिर उठे सवाल
देश-विदेश में शिक्षा नगरी के रूप में पहचान बना चुका कोटा हर साल लाखों छात्रों को मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए आकर्षित करता है। यहां छात्र अपने सपनों को साकार करने की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव, बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद, घर-परिवार से दूर रहने की चुनौती और भविष्य को लेकर बढ़ती चिंता कई बार छात्रों पर मानसिक रूप से भारी पड़ती है। परिणामों और रैंकिंग की दौड़ में कुछ छात्र खुद को अकेला और असफल महसूस करने लगते हैं।
प्रशासन के प्रयासों के बावजूद चुनौती बरकरार
छात्र आत्महत्याओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन, कोचिंग संस्थान और विभिन्न सामाजिक संगठन लगातार प्रयास कर रहे हैं। छात्रों के लिए काउंसलिंग सत्र, हेल्पलाइन, मनोरंजन गतिविधियां और मोटिवेशनल कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। इसके बावजूद आत्महत्या की घटनाएं पूरी तरह थम नहीं पाई हैं।
आर्यन ओझा की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को कम करने के लिए और क्या कदम उठाए जाने चाहिए। फिलहाल पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है और छात्र की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुटी हुई है।
इनपुट - योगेंद्र महावर,कोटा
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