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राजस्थान में आखातीज पर बाल विवाह किया तो खैर नहीं; हलवाई-बैंड बाराती सब नपेंगे

आखातीज के मौके पर बाल विवाह जैसी कुरीति पर लगाम कसने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। इस बार प्रशासन ने साफ कर दिया है कि बाल विवाह में सिर्फ परिवार ही नहीं

Fri, 17 April 2026 11:29 AMSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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राजस्थान में आखातीज पर बाल विवाह किया तो खैर नहीं; हलवाई-बैंड बाराती सब नपेंगे

आखातीज के मौके पर बाल विवाह जैसी कुरीति पर लगाम कसने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। इस बार प्रशासन ने साफ कर दिया है कि बाल विवाह में सिर्फ परिवार ही नहीं, बल्कि हलवाई, बैंड-बाजा, पंडित, टेंट हाउस और ट्रांसपोर्टर तक को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। किसी भी स्तर पर सहयोग करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अक्षय तृतीया और पीपल पूर्णिमा पर सख्ती

जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने अक्षय तृतीया (19 अप्रैल) और पीपल पूर्णिमा (1 मई) को ध्यान में रखते हुए विशेष आदेश जारी किए हैं। इन दोनों अवसरों पर प्रदेश में बाल विवाह की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने कड़े प्रबंध लागू किए हैं।

एक कॉल पर होगी तुरंत कार्रवाई

बाल विवाह की सूचना देने के लिए जिला प्रशासन ने कंट्रोल रूम स्थापित किया है, जो 16 अप्रैल से 15 मई तक 24 घंटे सक्रिय रहेगा। आमजन 0291-2650349 और 0291-2650350 नंबरों पर कॉल कर गुप्त या खुलकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बाल विवाह की जानकारी छिपाने के बजाय तुरंत साझा करें, ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके।

गांव से तहसील तक निगरानी तंत्र तैयार

बाल विवाह रोकने के लिए प्रशासन ने जमीनी स्तर पर मजबूत नेटवर्क तैयार किया है। ग्राम स्तर पर सरपंच, ग्राम विकास अधिकारी, पटवारी और बीट कॉन्स्टेबल को शामिल करते हुए समितियां बनाई गई हैं। वहीं तहसील और पंचायत समिति स्तर पर तहसीलदार, प्रधान, विकास अधिकारी और संबंधित थानाधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

उम्र का प्रमाण जरूरी

इस बार प्रशासन ने एक नया और सख्त नियम लागू किया है। अब विवाह के निमंत्रण पत्र छापने से पहले वर-वधू की उम्र का प्रमाण प्रिंटिंग प्रेस के पास होना जरूरी होगा। साथ ही, निमंत्रण पत्र में दोनों की जन्मतिथि स्पष्ट रूप से छापना अनिवार्य किया गया है।

प्रिंटिंग प्रेस पर भी नजर

प्रिंटिंग प्रेस संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे बिना आयु प्रमाण के कोई भी विवाह कार्ड न छापें। पुलिस जांच के दौरान उन्हें यह रिकॉर्ड उपलब्ध कराना होगा, अन्यथा उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

हलवाई से बैंड तक सबकी जवाबदेही तय

प्रशासन ने साफ कर दिया है कि बाल विवाह में सहयोग करने वाला हर व्यक्ति कानून के दायरे में आएगा। हलवाई, बैंड-बाजा संचालक, पंडित, टेंट हाउस, ट्रांसपोर्टर और यहां तक कि बाराती भी जिम्मेदार माने जाएंगे। सभी से लिखित आश्वासन लिया जा रहा है कि वे बाल विवाह में किसी प्रकार का सहयोग नहीं करेंगे।

कलेक्टर की दो टूक

जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बाल विवाह करवाना बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम-2006 का गंभीर उल्लंघन है। कानून के अनुसार लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और लड़की की 18 वर्ष होना अनिवार्य है।

विभागों के बीच तालमेल बढ़ाया गया

उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग की उपनिदेशक को नोडल अधिकारी नियुक्त करते हुए सभी विभागों को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी सूचना पर तुरंत प्रभावी कार्रवाई हो सके।

परंपरा के नाम पर अपराध बर्दाश्त नहीं

प्रशासन का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है—परंपरा और सामाजिक दबाव के नाम पर बाल विवाह अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस बार आखातीज पर न सिर्फ निगरानी बढ़ाई गई है, बल्कि हर उस कड़ी को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, जो इस कुरीति को बढ़ावा देती है।

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