उदयपुर के कलड़वास में रहस्यमयी बीमारी का कहर, रिटायर्ड कर्मचारी की मौत, दो बेटे ICU में; गांव में दहशत
झीलों की नगरी उदयपुर से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित कलड़वास गांव इन दिनों एक रहस्यमयी बीमारी की चपेट में है। पिछले दो महीनों में लगातार बिगड़ती सेहत के बाद पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट (PHED) से रिटायर्ड पंपमैन सोहनलाल डांगी (61) ने 18 फरवरी को दम तोड़ दिया।

झीलों की नगरी उदयपुर से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित कलड़वास गांव इन दिनों एक रहस्यमयी बीमारी की चपेट में है। पिछले दो महीनों में लगातार बिगड़ती सेहत के बाद पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट (PHED) से रिटायर्ड पंपमैन सोहनलाल डांगी (61) ने 18 फरवरी को दम तोड़ दिया। दुखद यह कि उनके दोनों बेटे—लीलाशंकर और प्रकाश—इसी बीमारी से जूझते हुए ICU में भर्ती हैं और पिता के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो सके।
नवंबर से शुरू हुई अजीब बीमारी
परिजनों के मुताबिक, 30 जून को सेवानिवृत्त हुए सोहनलाल की तबीयत नवंबर में अचानक बिगड़नी शुरू हुई। सबसे पहले त्वचा का रंग काला पड़ने लगा। आयुर्वेद पर भरोसा होने के कारण करीब डेढ़ महीने तक वैकल्पिक उपचार चलता रहा, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। बाद में उन्हें MB Hospital सहित शहर के निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। कई तरह की जांचों में अलग-अलग संक्रमण सामने आए, पर बीमारी की असली वजह स्पष्ट नहीं हो सकी।
अहमदाबाद तक इलाज, फिर भी नतीजा शून्य
परिजन बताते हैं कि हालत बिगड़ने पर सोहनलाल को अहमदाबाद के Zydus Hospital ले जाया गया। चेस्ट और किडनी इंफेक्शन के साथ त्वचा संबंधी जटिलताओं के इलाज के लिए महंगे इंजेक्शन और दवाइयां विदेशों से मंगवाई गईं। लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ और 18 फरवरी को उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
हीमोग्लोबिन 5.5, परिवार की महिलाओं में भी लक्षण
सोहनलाल के बेटों के अलावा पत्नी प्रेमी बाई, बहू कौशल्या और भारती में भी समान लक्षण दिख रहे हैं। परिजनों के अनुसार, तीनों के शरीर का रंग काला पड़ रहा है और रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन स्तर 5.5 ग्राम/डीएल पाया गया—जो सामान्य से काफी कम है। फिलहाल उनका हीमोग्लोबिन बढ़ाने का इलाज चल रहा है, लेकिन स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। सांस लेने में तकलीफ के चलते मरीजों को समय-समय पर वेंटिलेटर सपोर्ट देना पड़ रहा है।
15 लाख से ज्यादा खर्च, कारण अब भी अज्ञात
परिवार के सदस्य पृथ्वीराज डांगी का कहना है कि अब तक 15 लाख रुपए से अधिक खर्च हो चुके हैं, लेकिन बीमारी की जड़ का पता नहीं चला। “हम उसी मोहल्ले में रहते हैं, वही पानी पीते हैं, वही गेहूं खाते हैं। अगर पानी या भोजन में समस्या होती, तो अन्य घरों में भी असर दिखता,” वे सवाल उठाते हैं।
दूषित पानी की आशंका
ग्रामीणों को शक है कि कलड़वास औद्योगिक क्षेत्र के पास होने के कारण फैक्ट्रियों का रासायनिक कचरा भूजल में मिल गया हो। हैंडपंप और नलकूप के पानी में केमिकल की आशंका जताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने पानी और तेल के सैंपल तो लिए, लेकिन एक महीने तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई, जिससे गांव में असमंजस और डर का माहौल है। कई परिवारों ने एहतियातन नलकूप का पानी पीना बंद कर दिया है।
प्रशासन का पक्ष
उदयपुर के CMHO डॉ. अशोक आदित्य ने बताया कि पानी और तेल की जांच रिपोर्ट सामान्य आई है। उन्होंने कहा कि दो संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है और उच्च अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है। आगे के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञ पैनल और AIIMS रेफर की मांग
रिश्तेदार दिनेश डांगी और ग्रामीणों ने मांग की है कि विशेष डॉक्टर्स का पैनल गठित कर मरीजों को दिल्ली AIIMS भेजा जाए, ताकि विस्तृत जांच के जरिए बीमारी की असली वजह सामने आ सके। उनका कहना है कि यदि उदयपुर और अहमदाबाद जैसे बड़े केंद्रों में कारण स्पष्ट नहीं हो पा रहा, तो राज्य और केंद्र स्तर पर विशेषज्ञ हस्तक्षेप जरूरी है।
गांव में खौफ, जवाब की प्रतीक्षा
एक जान जाने और दो युवाओं के ICU में होने के बावजूद बीमारी का नाम तक तय नहीं हो सका है। प्रशासनिक कार्रवाई और जांच रिपोर्ट को लेकर पारदर्शिता की मांग तेज हो रही है। फिलहाल कलड़वास में हर घर की जुबान पर एक ही सवाल है—आखिर यह बीमारी क्या है और कब रुकेगा इसका कहर?
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