खेल,खर्च और CET, कांग्रेस MLA चांदना ने राजस्थान विधानसभा में सरकार की नीति पर उठाए सवाल
राजस्थान विधानसभा में खेल और युवा मामलात विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सियासी तापमान बढ़ गया। कांग्रेस विधायक और पूर्व खेल मंत्री अशोक चांदना ने राज्य सरकार के खेल आयोजनों में हुए खर्च, खिलाड़ियों की नौकरियों में नियमों और युवाओं में बढ़ती ऑनलाइन सट्टेबाजी को लेकर तीखे सवाल उठाए।

राजस्थान विधानसभा में खेल और युवा मामलात विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सियासी तापमान बढ़ गया। कांग्रेस विधायक और पूर्व खेल मंत्री अशोक चांदना ने राज्य सरकार के खेल आयोजनों में हुए खर्च, खिलाड़ियों की नौकरियों में नियमों और युवाओं में बढ़ती ऑनलाइन सट्टेबाजी को लेकर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि खेलों के नाम पर खर्च की प्राथमिकताएं स्पष्ट होनी चाहिए और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
खेलो इंडिया पर खर्च बनाम ग्रामीण ओलंपिक
चर्चा के दौरान चांदना ने हाल ही में आयोजित खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम का उल्लेख करते हुए कहा कि इस आयोजन में करीब 4200 प्रतिभागियों पर लगभग 125 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके मुकाबले उन्होंने पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के दौरान आयोजित ग्रामीण ओलंपिक का हवाला देते हुए कहा कि उस समय 150 करोड़ रुपये खर्च कर 57 लाख प्रतिभागियों को जोड़ा गया था।
चांदना ने कहा, “तब बीजेपी के नेताओं ने आरोप लगाया था कि 125 करोड़ की टी-शर्ट बांट दी गईं, लेकिन आज भी गांवों में लोग वही टी-शर्ट पहन रहे हैं। उस आयोजन ने खेल को गांव-गांव तक पहुंचाया।” उन्होंने सवाल किया कि जब कम प्रतिभागियों पर लगभग समान खर्च हो रहा है तो प्राथमिकताओं और पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
खिलाड़ियों की नौकरी में CET की बाधा
पूर्व खेल मंत्री ने उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियों में आउट ऑफ टर्न नियुक्ति देने के नियमों में बदलाव की मांग की। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने खिलाड़ियों के लिए दो प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया था, लेकिन अब कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) की अनिवार्यता के कारण कई खिलाड़ी अवसर से वंचित हो रहे हैं।
चांदना ने उदाहरण देते हुए बताया कि हाल में निकली कांस्टेबल भर्ती में खिलाड़ियों के लिए 58 पद निर्धारित थे, लेकिन CET की बाध्यता के कारण केवल तीन खिलाड़ी ही चयनित हो पाए और 55 पद खाली रह गए। उन्होंने कहा, “जो खिलाड़ी मैदान में देश और प्रदेश के लिए पसीना बहा रहा है, उससे यह उम्मीद करना कि वह नियमित शैक्षणिक तैयारी कर CET भी पास करे, व्यवहारिक नहीं है। समर्पित खिलाड़ी कई बार परीक्षा की तकनीकी शर्तों में उलझ जाते हैं।”
उन्होंने सरकार से मांग की कि खिलाड़ियों के लिए अलग और व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जाए, ताकि खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिले और वे हतोत्साहित न हों।
युवाओं में सट्टे और नशे की बढ़ती लत
चांदना ने चर्चा को व्यापक सामाजिक मुद्दों से जोड़ते हुए कहा कि सरकार को युवाओं को नशे और ऑनलाइन सट्टेबाजी की लत से बचाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया, “ऑनलाइन सट्टा किसने शुरू किया? चुनावी चंदा लेकर इन पर कार्रवाई किसने नहीं की?” इस दौरान जहाजपुर विधायक गोपीचंद मीणा ने कहा कि यह कांग्रेस शासनकाल में शुरू हुआ था। इस पर चांदना ने पलटवार करते हुए पूछा, “तो क्या आप इसे जारी रखेंगे?”
उन्होंने आरोप लगाया कि सट्टेबाजी के जाल में फंसे युवाओं को 10 से 20 रुपये सैंकड़ा ब्याज पर पैसा उपलब्ध कराया जाता है और वे कर्ज के चक्रव्यूह में फंस जाते हैं। उन्होंने सरकार से ऑनलाइन सट्टा एप्स और कथित ब्याज माफिया पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
गृह राज्य मंत्री से कार्रवाई की अपील
चांदना ने गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम का नाम लेते हुए कहा कि यदि वे चाहें तो इस दिशा में प्रभावी कार्रवाई संभव है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पुलिस फिलहाल “बजरी की ट्रॉलियां गिनने में लगी है”, जबकि युवाओं को बर्बाद करने वाले नेटवर्क पर कठोर कार्रवाई की जरूरत है।
राजनीतिक संदेश और खेल नीति पर बहस
राजस्थान में खेल नीति, युवाओं की रोजगार संभावनाएं और सामाजिक चुनौतियां एक बार फिर विधानसभा में बहस के केंद्र में आ गई हैं। चांदना के आरोपों और सवालों से स्पष्ट है कि आने वाले समय में खेल आयोजनों के खर्च, पारदर्शिता और खिलाड़ियों के हितों को लेकर सियासत तेज हो सकती है।
अब देखना होगा कि सरकार इन मुद्दों पर क्या जवाब देती है और क्या खिलाड़ियों के लिए CET जैसी शर्तों में कोई व्यावहारिक बदलाव होता है। फिलहाल, विधानसभा की यह बहस खेल और युवा नीति को लेकर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ गई है।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




साइन इन