सेक्स ट्रीटमेंट की आड़ में स्कैम,फर्जी फार्मेसी से चल रहा था इंजेक्शन का धंधा, जयपुर के अस्पताल में रेड
राजधानी में सेक्सुअल इलाज के नाम पर चल रहे अवैध इंजेक्शन रैकेट पर बड़ी कार्रवाई हुई है। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) और राजस्थान ड्रग कंट्रोल की टीम ने गोपालपुरा बाइपास स्थित भंडारी हॉस्पिटल पर छापा मारकर पूरे खेल का पर्दाफाश किया।

राजधानी में सेक्सुअल इलाज के नाम पर चल रहे अवैध इंजेक्शन रैकेट पर बड़ी कार्रवाई हुई है। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) और राजस्थान ड्रग कंट्रोल की टीम ने गोपालपुरा बाइपास स्थित भंडारी हॉस्पिटल पर छापा मारकर पूरे खेल का पर्दाफाश किया। कार्रवाई के दौरान कई अहम दस्तावेज जब्त किए गए।
नाम बड़ा, दवा गायब
जांच में सामने आया कि ‘ट्राइमेक्स’ नाम से इंजेक्शन ऑनलाइन बेचा जा रहा था, जबकि इस नाम की कोई दवा रजिस्टर्ड ही नहीं है। असल में यह इंजेक्शन तीन दवाओं पौपावेरिन, एल्प्रोस्टैडिल और क्लोरप्रोमाजिन—की डोज मिलाकर तैयार किया जा रहा था। यानी ब्रांड का नाम फर्जी, अंदर का माल जुगाड़!
OH! MAN प्लेटफॉर्म पर खेल
यह पूरा नेटवर्क ‘OH! MAN’ नाम के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए चलाया जा रहा था। हैरानी की बात यह है कि इस नाम से कोई वैध फार्मेसी रजिस्ट्रेशन भी नहीं मिला। इलाज के नाम पर डिजिटल ठगी का पूरा सेटअप तैयार था।
कर्मचारी निकला मास्टरमाइंड
हॉस्पिटल प्रशासन ने सारा खेल अपने कर्मचारी मनीष कुमार सोनी पर डाल दिया है। आरोप है कि उसने ‘ओमेन फार्मेसी’ के नाम से फर्जी सिस्टम बनाया, डॉक्टरों के नकली सिग्नेचर किए और मरीजों को सीधे इंजेक्शन भेजकर पैसे अपने खाते में डलवाए।
फर्जी प्रिस्क्रिप्शन, असली कमाई
2019 से कार्यरत यह कर्मचारी खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों से मोटी रकम वसूलता था। अस्पताल के दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड और GST नंबर तक का इस्तेमाल कर उसने पूरा फर्जी नेटवर्क खड़ा कर लिया। इलाज कम, कमाई ज्यादा!
अब घेरे में और लोग भी
मामला सामने आते ही अस्पताल प्रशासन ने साइबर थाने में FIR दर्ज करवाई। उधर, ड्रग कंट्रोल विभाग ने अस्पताल के सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. चिराग भंडारी की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है और राजस्थान मेडिकल काउंसिल को कार्रवाई के लिए पत्र भेजने की तैयारी है।
हमारा इससे कोई लेना-देना नहीं
अस्पताल प्रशासन ने साफ कहा कि उनके यहां केवल रजिस्टर्ड और अनुमोदित दवाओं का ही इस्तेमाल होता है। किसी भी अवैध या ऑनलाइन दवा बिक्री से उनका कोई संबंध नहीं है और ‘ट्राइमेक्स’ इंजेक्शन अस्पताल में उपयोग नहीं किया जाता।
इलाज या जाल?
फिलहाल जांच जारी है, लेकिन इस खुलासे ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है ऑनलाइन इलाज के नाम पर आखिर कितने ऐसे ‘इंजेक्शन जाल’ चल रहे हैं? मरीज सावधान रहें, क्योंकि यहां भरोसे के नाम पर खेल बड़ा है!
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