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साध्वी प्रेम बाईसा मौत मामला, परिचित जांच के घेरे में, इंजेक्शन को लेकर कम्पाउंडर से फिर पूछताछ

जोधपुर में पाल गांव के आरती नगर स्थित एक आश्रम में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत को लेकर मामला लगातार उलझता जा रहा है। मौत के दस दिन बाद भी पुलिस किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाई है। शुरुआती जांच में कई सवाल खड़े हुए हैं, जिनका जवाब अब तक साफ नहीं हो सका है। 

Sat, 7 Feb 2026 02:10 PMSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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साध्वी प्रेम बाईसा मौत मामला, परिचित जांच के घेरे में, इंजेक्शन को लेकर कम्पाउंडर से फिर पूछताछ

जोधपुर में पाल गांव के आरती नगर स्थित एक आश्रम में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत को लेकर मामला लगातार उलझता जा रहा है। मौत के दस दिन बाद भी पुलिस किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाई है। शुरुआती जांच में कई सवाल खड़े हुए हैं, जिनका जवाब अब तक साफ नहीं हो सका है। खासतौर पर मौत से ठीक पहले लगाए गए इंजेक्शन को लेकर संदेह और गहराता जा रहा है, जिस पर पूरी जांच आकर अटक गई है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, साध्वी प्रेम बाईसा को कौन-सा इंजेक्शन लगाया गया था और किस उद्देश्य से लगाया गया, इसकी अब तक स्पष्ट पुष्टि नहीं हो पाई है। आशंका जताई जा रही है कि इंजेक्शन का रिएक्शन जानलेवा साबित हुआ या फिर उसमें किसी जहरीले पदार्थ का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इन सभी बिंदुओं पर स्थिति तब तक साफ नहीं हो सकेगी, जब तक फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती। फिलहाल पुलिस उसी रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।

जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि इंजेक्शन किस डॉक्टर के निर्देश पर लगाया गया था, इसे लेकर विरोधाभासी बयान मिले हैं। ऐसे में इंजेक्शन लगाने वाले कंपाउंडर की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। पुलिस अब कंपाउंडर से दोबारा गहन पूछताछ करने की तैयारी में है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इंजेक्शन कहां से लाया गया, किसने उपलब्ध कराया और किसकी सलाह पर इसे साध्वी को लगाया गया। सूत्रों का कहना है कि यदि पूछताछ में संतोषजनक जवाब नहीं मिले, तो पुलिस नार्को टेस्ट जैसे विकल्पों पर भी विचार कर सकती है।

इस पूरे प्रकरण की निगरानी सहायक पुलिस आयुक्त (पश्चिम) छवि शर्मा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मामले की हर पहलू से गहन जांच की जा रही है। “एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अभी किसी भी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी,” उन्होंने कहा।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया है। एसआईटी अब तक 37 से अधिक लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है। इनमें आश्रम से जुड़े लोग, साध्वी के परिचित, सेवक, चिकित्सकीय स्टाफ और अन्य संदिग्ध शामिल हैं। पुलिस इन सभी बयानों के आधार पर घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है, ताकि यह समझा जा सके कि साध्वी की तबीयत बिगड़ने से लेकर उनकी मौत तक क्या-क्या हुआ।

तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर भी जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। पुलिस ने साध्वी और उनके संपर्क में रहे अन्य लोगों के मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इन मोबाइल्स के डेटा की जांच में करीब 40 परिचितों की जानकारी सामने आई है, जिनसे पुलिस संपर्क कर रही है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मैसेज के जरिए घटनाओं की समयरेखा तैयार की जा रही है, ताकि यह पता चल सके कि मौत से पहले साध्वी किन लोगों के संपर्क में थीं और किन परिस्थितियों में उन्हें इंजेक्शन दिया गया।

पुलिस का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट, एफएसएल जांच और तकनीकी साक्ष्य—इन तीनों को मिलाकर ही किसी ठोस नतीजे पर पहुंचा जाएगा। अभी तक की जांच में किसी एक व्यक्ति या कारण को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। अधिकारियों का मानना है कि मामला संवेदनशील है और हर एंगल से जांच जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

फिलहाल, साध्वी प्रेम बाईसा की मौत एक रहस्य बनी हुई है। परिजन और आश्रम से जुड़े लोग भी जवाबों का इंतजार कर रहे हैं। पुलिस का दावा है कि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जा रही है और सभी संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। अब सबकी नजरें एफएसएल रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस मामले की दिशा और दशा तय कर सकती है।

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