युवाओं, महिलाओं और किसानों को फिर निराशा; केंद्रीय बजट 2026 पर बरसे सचिन पायलट
केंद्रीय बजट 2026 की घोषणाओं पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पायलट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए कहा कि यह बजट एक बार फिर आम जनता, खासकर युवाओं को निराश करने वाला साबित हुआ है।

केंद्रीय बजट 2026 की घोषणाओं पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पायलट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए कहा कि यह बजट एक बार फिर आम जनता, खासकर युवाओं को निराश करने वाला साबित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कई योजनाओं की घोषणा तो की है, लेकिन उनके क्रियान्वयन को लेकर कोई स्पष्ट, भरोसेमंद और ठोस रोडमैप सामने नहीं रखा गया।
सचिन पायलट ने कहा कि देश का युवा वर्ग लंबे समय से रोजगार के वास्तविक अवसरों की प्रतीक्षा कर रहा है, लेकिन बजट 2026 में इस दिशा में कोई ठोस रणनीति दिखाई नहीं देती। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार की पिछली रोजगार संबंधी घोषणाओं का आज तक पारदर्शी आकलन क्यों नहीं किया गया। कितने रोजगार वास्तव में सृजित हुए और कितने केवल काग़ज़ों में सीमित रह गए—इस पर सरकार चुप्पी साधे हुए है। पायलट के अनुसार, underemployment की गंभीर समस्या के बीच युवा अपने भविष्य को लेकर लगातार असमंजस और चिंता में हैं।
कांग्रेस नेता ने वैश्विक आर्थिक हालात का जिक्र करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक अस्थिरता बनी हुई है, वहीं घरेलू स्तर पर भी महंगाई, बेरोजगारी और मांग में गिरावट जैसी चुनौतियां सामने हैं। ऐसे समय में सरकार से उम्मीद थी कि बजट में इन समस्याओं से निपटने के लिए ठोस और दूरदर्शी कदम उठाए जाएंगे, लेकिन ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला। पायलट ने कहा कि बजट में आर्थिक चुनौतियों को स्वीकार करने के बजाय केवल सामान्य और अस्पष्ट घोषणाएं की गई हैं।
महंगाई को लेकर सचिन पायलट ने सरकार को घेरते हुए कहा कि आम आदमी पहले से ही बढ़ती कीमतों से परेशान है। खाद्य पदार्थों से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों तक महंगाई का असर हर परिवार पर पड़ रहा है, लेकिन बजट में महंगाई नियंत्रण के लिए कोई सशक्त और प्रभावी उपाय नजर नहीं आता। उन्होंने कहा कि सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर है।
महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन को लेकर भी पायलट ने बजट को कमजोर बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए किसी नई और प्रभावशाली योजना की घोषणा नहीं की गई। इसी तरह खेती-किसानी को लेकर भी बजट में अपेक्षित प्राथमिकता नहीं दी गई। पायलट ने आरोप लगाया कि सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के बड़े-बड़े दावे तो करती है, लेकिन बजट में उसकी झलक साफ तौर पर नहीं दिखती।
राज्यों के संदर्भ में बोलते हुए सचिन पायलट ने कहा कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों, जहां भाजपा की सरकारें हैं, वहां भी नई बड़ी परियोजनाओं की घोषणाओं का अभाव निराशाजनक है। उन्होंने इसे जनता के साथ धोखे जैसा करार देते हुए कहा कि इन राज्यों के लोगों को बजट से विशेष उम्मीदें थीं, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।
अपने बयान के अंत में सचिन पायलट ने केंद्रीय बजट 2026 को “चुनावी बजट” बताते हुए कहा कि इसमें संतुलित और समावेशी विकास की कोई स्पष्ट दिशा नजर नहीं आती। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बजट वास्तविक सुधारों और दीर्घकालिक विकास की बजाय केवल चुनावी घोषणाओं तक सीमित रह गया है। पायलट ने कहा कि आने वाले समय में जनता सरकार से जवाब मांगेगी और बजट के वादों की सच्चाई सामने आएगी।
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