राजस्थान में व्हाट्सएप से वसूली का खेल,विदेश में बैठा मास्टरमाइंड; लोकल युवकों की भूमिका
झुंझुनूं जिले के चिड़ावा कस्बे में एक व्यापारी परिवार को निशाना बनाकर रची गई रंगदारी की खौफनाक साजिश का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। यह मामला केवल 11 लाख रुपये की मांग तक सीमित नहीं था

झुंझुनूं जिले के चिड़ावा कस्बे में एक व्यापारी परिवार को निशाना बनाकर रची गई रंगदारी की खौफनाक साजिश का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। यह मामला केवल 11 लाख रुपये की मांग तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक ऐसा डिजिटल क्राइम नेटवर्क सक्रिय था, जो विदेश में बैठकर स्थानीय युवकों के जरिए पूरे ऑपरेशन को अंजाम दे रहा था। पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों ने यह साफ कर दिया कि अपराध अब केवल स्थानीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित रूप ले चुका है।
व्हाट्सएप कॉल से शुरू हुआ डर का खेल
16 मार्च को व्यापारी ललित भगेरिया ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई कि उनके बेटे नीरज के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से लगातार व्हाट्सएप कॉल और आपत्तिजनक मैसेज आ रहे हैं। शुरुआत में इसे सामान्य शरारत समझा गया, लेकिन जल्द ही मामला गंभीर हो गया जब आरोपी ने नीरज की फोटो भेजकर यह दावा किया कि उसे परिवार की हर गतिविधि और लोकेशन की जानकारी है।
मैसेज में साफ तौर पर लिखा गया—“11 लाख रुपये नहीं दिए तो जान से मार देंगे।”इस धमकी ने पूरे परिवार को दहशत में डाल दिया।
लोकेशन ट्रैकिंग और रेकी से बना दबाव
जांच में सामने आया कि आरोपी केवल धमकी नहीं दे रहा था, बल्कि उसने पीड़ित के घर, दुकान और फार्म हाउस की लोकेशन तक की जानकारी जुटा रखी थी। यह जानकारी किसी बाहरी व्यक्ति के लिए हासिल करना आसान नहीं था, जिससे पुलिस को शुरुआत से ही ‘इनसाइड कनेक्शन’ का शक हुआ।यहीं से केस ने एक नया मोड़ लिया।
विदेश से ऑपरेट हो रहा था पूरा नेटवर्क
तकनीकी साक्ष्यों और साइबर ट्रैकिंग के जरिए पुलिस ने इस केस की परतें खोलनी शुरू कीं। जांच में सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड साहिल नाम का युवक है, जो फिलहाल कतर में बैठा हुआ है। वह वहां से इंटरनेट कॉल और व्हाट्सएप के जरिए पूरे ऑपरेशन को कंट्रोल कर रहा था।
साहिल ने खुद सीधे पीड़ित से संपर्क नहीं किया, बल्कि स्थानीय युवकों की मदद से जानकारी जुटाकर उन्हें टारगेट बनाया।
लोकल युवकों ने दी अंदर की जानकारी
पुलिस ने दो स्थानीय आरोपियों—भूपेंद्र सैनी और योगेश शर्मा—को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि भूपेंद्र ने अपने नाम से सिम कार्ड लेकर साहिल को उपलब्ध करवाया था, ताकि वह पहचान छुपाकर कॉल कर सके।
वहीं, योगेश ने पीड़ित नीरज की फोटो और मोबाइल नंबर साहिल तक पहुंचाया। यही नहीं, उसने परिवार की गतिविधियों और लोकेशन से जुड़ी अहम जानकारी भी साझा की, जिससे आरोपी ने डर का माहौल बनाया।
तकनीकी जांच ने खोली साजिश की परतें
पुलिस टीम ने साइबर सेल की मदद से कॉल डिटेल रिकॉर्ड, आईपी एड्रेस और डिजिटल ट्रेल को खंगाला। इन्हीं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों तक पहुंच बनाई गई।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी लगातार नंबर बदलकर और इंटरनेट कॉलिंग ऐप का इस्तेमाल कर ट्रैकिंग से बचने की कोशिश कर रहे थे।
गिरफ्तारी के बाद खुलेंगे और राज
गिरफ्तार दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों के नाम सामने आ सकते हैं। साथ ही, मुख्य सरगना साहिल को पकड़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
साइबर क्राइम का बदलता चेहरा
यह मामला साफ तौर पर दिखाता है कि अब अपराधियों ने तकनीक को हथियार बना लिया है। विदेश में बैठकर स्थानीय युवकों के जरिए अपराध को अंजाम देना एक नया ट्रेंड बनता जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मामलों में लोगों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज की तुरंत सूचना देने की जरूरत है।
पुलिस टीम की अहम भूमिका
इस पूरे ऑपरेशन में साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। त्वरित कार्रवाई और तकनीकी जांच के चलते ही इस साजिश का समय रहते खुलासा हो सका।
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