पारदर्शिता से समझौता नहीं, राजस्थान एसआई-2021 भर्ती पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
करीब ढाई महीने के इंतजार के बाद आखिरकार वह फैसला सामने आ गया, जिसका हजारों अभ्यर्थियों को बेसब्री से इंतजार था। शनिवार को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एसआई भर्ती-2021 को लेकर ऐसा निर्णय सुनाया

करीब ढाई महीने के इंतजार के बाद आखिरकार वह फैसला सामने आ गया, जिसका हजारों अभ्यर्थियों को बेसब्री से इंतजार था। शनिवार को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एसआई भर्ती-2021 को लेकर ऐसा निर्णय सुनाया, जिसने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी। कोर्ट ने साफ कर दिया कि यह भर्ती अब रद्द ही रहेगी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने एकलपीठ के फैसले को बरकरार रखते हुए चयनित अभ्यर्थियों और राज्य सरकार की अपीलों को खारिज कर दिया। हालांकि, एक अहम मोड़ देते हुए कोर्ट ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के खिलाफ एकलपीठ द्वारा लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान को रद्द कर दिया।
कोर्ट की टिप्पणी ने बढ़ाई सियासी गर्मी
फैसले में सिर्फ भर्ती रद्द करने की बात ही नहीं थी, बल्कि आयोग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए। खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि आयोग में राजनीतिक नियुक्तियां नहीं होनी चाहिए।
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह RPSC में चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए नया कानून लाए। साथ ही जिन सदस्यों पर एकलपीठ ने सवाल उठाए थे, उन्हें हटाने की प्रक्रिया तुरंत शुरू करने को कहा गया है।
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब पहले से ही भर्ती प्रक्रिया को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद
एसआई भर्ती-2021 शुरुआत से ही विवादों में रही। पेपर लीक, धांधली और भारी अनियमितताओं के आरोप लगातार सामने आते रहे। इन आरोपों के आधार पर 28 अगस्त 2025 को एकलपीठ ने भर्ती को रद्द कर दिया था।
इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार और चयनित अभ्यर्थियों ने खंडपीठ में अपील दायर की। 19 जनवरी को सभी पक्षों की बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। तब से लेकर अब तक हर सुनवाई और हर तारीख पर अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हुई थीं।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
मामले ने उस वक्त और तूल पकड़ लिया, जब 8 सितंबर 2025 को खंडपीठ ने एकलपीठ के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी। इसके बाद यह विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।
24 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश देते हुए चयनित अभ्यर्थियों की फील्ड पोस्टिंग पर रोक लगा दी और यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए। साथ ही हाईकोर्ट को तीन महीने में सुनवाई पूरी करने के लिए कहा गया था।
हालांकि, अंतिम फैसला आने में अपेक्षा से ज्यादा समय लगा, जिससे अभ्यर्थियों की बेचैनी और बढ़ती रही।
फैसले के बाद आई प्रतिक्रियाएं
फैसले के बाद गैर-चयनित अभ्यर्थियों में खुशी का माहौल देखा गया। उनके वकील हरेंद्र नील ने इसे बेरोजगार युवाओं के लिए “साहसिक और न्यायपूर्ण निर्णय” बताया।
वहीं, याचिकाकर्ता कैलाश चंद शर्मा ने कहा कि यह सत्य की जीत है। उन्होंने कहा कि जब किसी परीक्षा की पारदर्शिता और गोपनीयता पर सवाल उठते हैं, तो भर्ती को रद्द करना ही पड़ता है। यह सुप्रीम कोर्ट के स्थापित सिद्धांतों के अनुरूप है।
अब आगे क्या?
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आगे की प्रक्रिया क्या होगी। कोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि सरकार को नई और पारदर्शी व्यवस्था के तहत भर्ती प्रक्रिया शुरू करनी होगी।
इसका मतलब साफ है कि हजारों अभ्यर्थियों को एक बार फिर से परीक्षा प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। वहीं, सरकार के सामने आयोग में सुधार और नई नीति बनाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
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