राजस्थान की राज्यसभा सीट पर किसकी होगी कांग्रेस से एंट्री? लोकल बनाम बाहरी का सवाल
राजस्थान में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई है। 8 जून तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे, 9 जून को नाम वापसी होगी और 18 जून को मतदान के साथ उसी दिन मतगणना कर परिणाम घोषित किए जाएंगे।

राजस्थान में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई है। 8 जून तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे, 9 जून को नाम वापसी होगी और 18 जून को मतदान के साथ उसी दिन मतगणना कर परिणाम घोषित किए जाएंगे। मौजूदा संख्या बल के आधार पर दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाती दिखाई दे रही हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा कांग्रेस की एक सीट को लेकर है—क्या पार्टी इस बार स्थानीय चेहरे को मौका देगी या फिर किसी बाहरी नेता पर दांव लगाएगी।
तीन सीटें खाली, भाजपा-कांग्रेस ने शुरू किया मंथन
राजस्थान से जिन तीन राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें भाजपा के राजेंद्र गहलोत और रवनीत सिंह बिट्टू तथा कांग्रेस के नीरज डांगी शामिल हैं। चुनाव प्रक्रिया शुरू होते ही दोनों दलों ने संभावित उम्मीदवारों को लेकर अपनी कवायद तेज कर दी है।
कांग्रेस में उठी स्थानीय उम्मीदवार की मांग
कांग्रेस के भीतर इस बार राज्यसभा सीट को लेकर अलग तरह की चर्चा चल रही है। पार्टी के एक बड़े वर्ग की मांग है कि इस बार राजस्थान से जुड़े किसी स्थानीय नेता को उम्मीदवार बनाया जाए। पार्टी नेताओं का मानना है कि स्थानीय चेहरे को राज्यसभा भेजने से आगामी निकाय और पंचायत चुनावों में राजनीतिक फायदा मिल सकता है।
कांग्रेस के पांच सांसदों में चार बाहरी चेहरे
राजस्थान से कांग्रेस के वर्तमान पांच राज्यसभा सांसदों में से चार बाहरी माने जाते हैं। इनमें कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष Sonia Gandhi, Mukul Wasnik, Randeep Singh Surjewala और Pramod Tiwari शामिल हैं। राजस्थान से कांग्रेस के एकमात्र स्थानीय सांसद नीरज डांगी का कार्यकाल अब समाप्त होने जा रहा है।
नीरज डांगी फिर से दावेदारी में, पुराने पैटर्न पर नजर
सूत्रों के अनुसार, नीरज डांगी दोबारा राज्यसभा पहुंचने के लिए प्रयास कर रहे हैं। उनकी पार्टी अध्यक्ष Mallikarjun Kharge से नजदीकियों की भी चर्चा है। नीरज डांगी वर्ष 2020 में राज्यसभा पहुंचे थे। इससे पहले अश्क अली टांक 2010 में स्थानीय उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा पहुंचे थे। इसके बाद कांग्रेस लगातार बाहरी नेताओं को राजस्थान से राज्यसभा भेजती रही है। पूर्व प्रधानमंत्री Manmohan Singh और K. C. Venugopal भी राजस्थान से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं।
महिला चेहरे को मौका देने की भी उठी मांग
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस को इस बार स्थानीय नेतृत्व को प्राथमिकता देनी चाहिए। कुछ राजनीतिक जानकार यह भी सुझाव दे रहे हैं कि यदि पार्टी किसी स्थानीय महिला नेता को उम्मीदवार बनाती है तो इससे राजनीतिक संदेश जाएगा और निकाय-पंचायत चुनावों में भी इसका असर दिख सकता है।
2023 के फैसले से मिली सीख, अब बदलेगी रणनीति?
राजनीतिक विश्लेषक मनीष गोधा का कहना है कि वर्ष 2023 के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस ने तीनों सीटों पर बाहरी चेहरों को उतारा था, जिससे संगठन के भीतर असंतोष भी देखने को मिला। ऐसे में इस बार स्थानीय प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता देना पार्टी के लिए रणनीतिक फैसला हो सकता है।
खड़गे से लेकर पवन खेड़ा तक कई नाम चर्चा में
कांग्रेस की इस एक सीट पर कई राष्ट्रीय नेताओं की नजर बनी हुई है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का कार्यकाल 26 जून को समाप्त हो रहा है और राजस्थान से उनके नाम की चर्चा है, हालांकि उनके कर्नाटक से भी राज्यसभा जाने की संभावनाएं बताई जा रही हैं। इसके अलावा Digvijaya Singh, Salman Khurshid और Pawan Khera के नाम भी प्रमुखता से लिए जा रहे हैं। पवन खेड़ा मूल रूप से राजस्थान के उदयपुर से जुड़े रहे हैं, इसलिए प्रदेश कांग्रेस का एक वर्ग उनके समर्थन में भी माना जा रहा है।
अंतिम फैसला हाईकमान के हाथ में
कांग्रेस प्रवक्ता स्वर्णिम चतुर्वेदी के अनुसार, राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम केंद्रीय चुनाव समिति की अनुशंसा के बाद पार्टी हाईकमान तय करता है। ऐसे में अंतिम फैसला दिल्ली स्तर पर होगा, लेकिन फिलहाल राजस्थान कांग्रेस में स्थानीय बनाम बाहरी चेहरे की बहस सियासी चर्चा के केंद्र में बनी हुई है।
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