राजस्थान में मौसम का यू-टर्न,आंधी, बारिश और ओलों से ठंडी हुई फिजा
राजस्थान में अप्रैल की शुरुआत के साथ ही मौसम ने अचानक करवट ले ली है। प्रदेशभर में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर शुरू हो गया है, जिससे जहां एक ओर लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है, वहीं किसानों की चिंता बढ़ गई है।

राजस्थान में अप्रैल की शुरुआत के साथ ही मौसम ने अचानक करवट ले ली है। प्रदेशभर में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर शुरू हो गया है, जिससे जहां एक ओर लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है, वहीं किसानों की चिंता बढ़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार 10 अप्रैल तक प्रदेश में तेज गर्मी और हीटवेव से राहत बनी रहेगी।
वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर
मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार प्रदेश में लगातार सक्रिय हो रहे वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के कारण मौसम में यह बदलाव देखने को मिल रहा है। पहला सिस्टम 3 अप्रैल से प्रभावी हो चुका है, जिसका असर राज्य के पश्चिमी और उत्तरी जिलों में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर में तेज आंधी के साथ बारिश और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि दर्ज की गई।
ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी
विशेषज्ञों का कहना है कि 3 अप्रैल को इस सिस्टम का प्रभाव चरम पर रहेगा। इस दिन प्रदेश के 8 जिलों में आंधी, बारिश और ओले गिरने को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि शेष जिलों में येलो अलर्ट घोषित किया गया है। हालांकि 4 अप्रैल के बाद यह सिस्टम धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगेगा।
6 अप्रैल से नया सिस्टम एक्टिव
इसके साथ ही मौसम विभाग ने एक और मजबूत सिस्टम के आने की चेतावनी दी है। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा के अनुसार 6 अप्रैल की शाम से एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होगा, जिसका असर 7 और 8 अप्रैल को अधिक देखने को मिलेगा। इस दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश, तेज आंधी, बिजली गिरने और ओलावृष्टि की गतिविधियां जारी रह सकती हैं।
पिछले 24 घंटे का मौसम
पिछले 24 घंटों के मौसम पर नजर डालें तो श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर और चूरू जिलों में कई स्थानों पर तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। श्रीगंगानगर के पदमपुर और अनूपगढ़ क्षेत्र में ओलावृष्टि की घटनाएं सामने आई हैं। अचानक बदले मौसम ने तापमान में गिरावट ला दी है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली है।
किसानों को भारी नुकसान
हालांकि इस मौसम परिवर्तन का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ा है। खासकर श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ क्षेत्रों में गेहूं की पकी फसलें खेतों में गिर गई हैं, जिससे भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। किसान अब फसल बचाने और नुकसान का आकलन करने में जुटे हैं।
कोटा रहा सबसे गर्म शहर
दूसरी ओर, प्रदेश के कुछ हिस्सों में अभी भी गर्मी का असर बना हुआ है। गुरुवार को कोटा प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 38.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा चित्तौड़गढ़ में 37.6, चूरू में 37.9, श्रीगंगानगर में 37.6, फतेहपुर (सीकर) में 37.7 और दौसा में 37.2 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ।
अन्य शहरों का तापमान
राजधानी जयपुर में भी मौसम साफ रहा और अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं बीकानेर में 36.3, उदयपुर में 35, अलवर में 35.4, पिलानी में 35.2, टोंक के वनस्थली में 35.8, जोधपुर में 34.8, बाड़मेर में 34.3, फलोदी में 34 और नागौर में 34.6 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।
10 अप्रैल तक राहत के आसार
मौसम विभाग का कहना है कि वर्तमान और आगामी दोनों सिस्टम का प्रभाव प्रदेश में व्यापक रहेगा। इसके चलते 10 अप्रैल तक तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहने की संभावना है और हीटवेव चलने के आसार नहीं हैं।
सावधानी बरतने की सलाह
मौसम विशेषज्ञों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। तेज आंधी और बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए खुले स्थानों से दूर रहने और सुरक्षित जगहों पर रहने की अपील की गई है। किसानों को भी फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।
राहत के साथ सतर्कता जरूरी
कुल मिलाकर, राजस्थान में फिलहाल मौसम राहत देने वाला बना हुआ है, लेकिन इसके साथ आने वाली प्राकृतिक गतिविधियां सतर्कता की भी मांग कर रही हैं।
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